Bakrid 2026: भारत में इस साल बकरीद यानी ईद-उल-अजहा (Eid ul Adha) 28 मई 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी और मरकजी रुयत हिलाल कमेटी की ओर से चांद को लेकर आधिकारिक घोषणा की गई है. इस्लामी मान्यताओं के अनुसार कुर्बानी का सिलसिला तीन दिनों तक चलता है, जो 28 मई से 30 मई तक जारी रहेगा. ऐसे में देशभर की मंडियों में बकरों की खरीदारी तेज हो गई है. लेकिन कई लोग बिना जानकारी के बकरा खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए बकरा खरीदने से पहले उसकी नस्ल, उम्र और सेहत की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है.
कौन सी नस्ल के बकरे माने जाते हैं सबसे बेहतर?
कुर्बानी के लिए भारत में कुछ खास नस्लों के बकरों की सबसे ज्यादा मांग रहती है. इनमें जमुनापारी नस्ल सबसे बड़ी और भारी मानी जाती है. इसका वजन 65 से 90 किलो तक पहुंच जाता है और इसकी ऊंचाई व खूबसूरती लोगों को आकर्षित करती है. राजस्थान का सोजत बकरा अपने गुलाबी रंग और मजबूत शरीर के कारण काफी लोकप्रिय है. पंजाब की बीटल नस्ल मांस के लिए बेहतरीन मानी जाती है. इसके अलावा सिरोही नस्ल गर्मी सहने की क्षमता और अच्छी सेहत के लिए जानी जाती है. बरबरी नस्ल छोटे और मध्यम आकार के खरीदारों के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है. वहीं सोनपरी नस्ल इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इसमें मांस की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है.
बकरा खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
इस्लामी नियमों के अनुसार कुर्बानी के लिए बकरा कम से कम एक साल का होना चाहिए. आमतौर पर इसकी पहचान आगे के दो पक्के दांतों से की जाती है. बकरा पूरी तरह स्वस्थ होना चाहिए और उसमें किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं होनी चाहिए. खरीदते समय यह भी देखना जरूरी है कि जानवर बहुत ज्यादा कमजोर न हो. उसका चलना-फिरना सामान्य हो और शरीर मजबूत दिखे. भारी-भरकम और चमकदार बकरों को लोग ज्यादा पसंद करते हैं. दिल्ली का मीना बाजार और राजस्थान की मंडियां बड़े और प्रीमियम बकरों के लिए मशहूर मानी जाती हैं.
ऐसे बकरे बिल्कुल न खरीदें, नहीं मानी जाएगी कुर्बानी
धार्मिक नियमों के मुताबिक अंधे, काने या लंगड़े बकरे की कुर्बानी मान्य नहीं मानी जाती. अगर बकरे के कान या पूंछ का एक-तिहाई हिस्सा कटा हुआ हो तो उसे भी कुर्बानी के लिए सही नहीं माना जाता. इसके अलावा बहुत बीमार, कमजोर या चलने में असमर्थ बकरा को खरीदने (Goat Buying Tips) से बचना चाहिए. जिन बकरों के सींग जड़ से टूट गए हों और खून बह रहा हो, उन्हें भी नहीं खरीदना चाहिए. बकरे के थन या जननांग कटे होने पर भी कुर्बानी मान्य नहीं मानी जाती.
सही जानकारी से होगा फायदा, जल्दबाजी से बचें
बकरीद के दौरान बाजारों में हजारों बकरे बिकते हैं और कई बार लोग सिर्फ सुंदरता देखकर खरीदारी कर लेते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारी से पहले नस्ल, उम्र और सेहत की पूरी जांच जरूरी है. सही बकरा चुनने से न सिर्फ धार्मिक नियम पूरे होते हैं बल्कि आर्थिक नुकसान से भी बचाव होता है. इसलिए इस बार बकरीद पर खरीदारी करते समय पूरी सावधानी बरतें और भरोसेमंद बाजार से ही बकरा खरीदें.