Bread Price Hike: पश्चिम बंगाल में आम लोगों के नाश्ते की प्लेट अब थोड़ी महंगी होने जा रही है. पश्चिम बंगाल बेकर्स एसोसिएशन ने आटा, चीनी, खाद्य तेल, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की बढ़ती लागत को देखते हुए एक पाउंड ब्रेड की कीमत 32 रुपये से बढ़ाकर 36 रुपये करने का फैसला किया है. नई दरें इसी महीने लागू होंगी और इसका सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा.
8 अगस्त की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल बेकर्स एसोसिएशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आरिफुल इस्लाम ने बताया कि यह निर्णय 8 अगस्त को आयोजित कार्यसमिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया. संगठन का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में कच्चे माल और उत्पादन लागत लगातार बढ़ी है, जबकि ब्रेड की कीमत जनवरी 2024 के बाद पहली बार संशोधित की जा रही है. बेकरी कारोबारियों के अनुसार, मौजूदा कीमत पर उत्पादन जारी रखना कई इकाइयों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया था. इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी को उद्योग के अस्तित्व के लिए जरूरी कदम बताया गया है.
मैदा, चीनी और पैकेजिंग ने बढ़ाया दबाव
बेकरी उद्योग का कहना है कि पिछले एक महीने में मैदा की कीमत लगभग 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी है. वहीं चीनी में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल और खाद्य तेल में लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा दबाव पैकेजिंग सामग्री पर पड़ा है, जिसकी कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है. इसके अलावा गैस और अन्य ईंधन की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च लगातार बढ़ रहा है. कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों के सीजन से पहले मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने के कारण बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.
जानिए नई कीमतें कितनी होंगी
एसोसिएशन द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, सबसे ज्यादा बढ़ोतरी एक पाउंड ब्रेड में की गई है.
| ब्रेड का प्रकार | पुरानी कीमत | नई कीमत |
|---|---|---|
| 1 पाउंड ब्रेड | 32 रुपये | 36 रुपये |
| 200 ग्राम (आधा पाउंड) | — | 2 रुपये की बढ़ोतरी |
| 100 ग्राम प्लेन ब्रेड | 8.50 रुपये | 10 रुपये |
नई कीमतें लागू होने के बाद छोटे पैक से लेकर बड़े पैक तक सभी श्रेणियों में उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना होगा.
आम परिवारों और उद्योग दोनों पर असर
ब्रेड पश्चिम बंगाल के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रोजमर्रा के नाश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे में प्रति पाउंड चार रुपये की बढ़ोतरी मध्यमवर्गीय और निम्न आय वाले परिवारों के मासिक खर्च को प्रभावित कर सकती है. खासकर वे परिवार जो नियमित रूप से ब्रेड का उपयोग करते हैं, उनके घरेलू बजट पर इसका असर साफ दिखाई देगा. दूसरी ओर, बेकर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता तो कई छोटी और मध्यम बेकरी इकाइयों के बंद होने की नौबत आ सकती थी. उद्योग का दावा है कि बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच यह फैसला उपभोक्ताओं और कारोबार दोनों के हितों में संतुलन बनाने की कोशिश है.