फसल विविधीकरण पर बोले किसान नेता- प्रोत्साहन राशि ऊंट के मुंह में जीरा, मिले MSP की गारंटी.. किसान खुद करेंगे खेती

भारतीय किसान एकता (BKE) के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविन्दर सिंह औलख ने कहा कि फसल विविधीकरण की प्रोत्साहन राशि ऊंट के मुंह में जीरा है. जब तक सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देगी, तब तक किसान धान-गेहूं को छोड़कर दूसरी फसलों की खेती की तरफ रूख करने से कतराएंगे.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 21 Mar, 2026 | 04:11 PM

Mandi Rate: हरियाणा और पंजाब सरकार अपने-अपने राज्यों में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है. इस योजना के तहत धान-गेहूं की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. लेकिन इसके बावजूद किसान धान-गेहूं को छोड़कर दूसरी फसलों की खेती करने में उतनी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें नुकसान का डर है. भारतीय किसान एकता (BKE) के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविन्दर सिंह औलख ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि ऊंट के मुंह में जीरा है. जब तक सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देगी, तब तक किसान धान-गेहूं को छोड़कर इन फसलों की खेती की तरफ रूख नहीं करेंगे. क्योंकि इन फसलों का रेट मंडी में हमेशा एमएसपी से कम रहता है. ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.

लखविन्दर सिंह औलख ने कहा कि किसान प्रोत्साहन राशि के ऐलान के बाद भी मक्का, दलहन और तिलहन  की फसल से दूरी बना रहे हैं. क्योंकि सरकार किसानों से एमएसपी पर इन फसलों की खरीद नहीं करती. ऐसे में किसान ओने-पौने दाम पर व्यापारियों के हाथों फसल बेचने पर मजबूर हो जाते हैं. कुछ मायनों में लखविन्दर सिंह औलख की बात सही भी है. क्योंकि अभी पंजाब- हरियाणा की मंडियों में सरसों, मक्का सहित कई फसलों का रेट एमएसपी से काफी कम है. Agmarknet की मंथली रुपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में मार्च 2026 में मक्के की कीमत 1,888 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जो एमएसपी से काफी कम है. जबकि फरवरी महीने में मक्के का रेट 2,152 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी मार्च महीने में मक्के का रेट बढ़ने के बजाए 12.3 फीसदी कम हो गया. ऐसे में मक्का किसानों को नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि, केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2025-26 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. यानी पंजाब में मार्च महीने के दौरान मक्के का रेट एमएसपी 512 रुपये क्विंटल कम है, जो 21.33 फीसदी है.

प्रोत्साहन राशि से कुछ नहीं होने वाला, सरकार दे एमएसपी की गारंटी

एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनिन मान के पूर्व हरियाणा प्रेसिडेंट गुणी प्रकाश का कहना है कि प्रोत्साहन राशि से कुछ नहीं होने वाला है. सरकार एमएसपी पर मोटे अनाज, दलहन, तिलहन की खरीद की गारंटी दे. किसान खुद ही धान-गेहूं  के साथ-साथ अन्य फसलों की भी खेती शुरू कर देंगे. उन्होंने कहा कि किसान नुकसान के डर से दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती बड़े स्तर पर नहीं करते हैं, क्योंकि पूरी फसल एमएसपी पर खरीद न होने के चलते आर्थिक नुकसान होता है.

हरियाणा में एमएसपी से सरसों का कम है रेट

अभी हरियाणा में सरसों का रेट एमएसपी से कम है. Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, 12 मार्च को हरियाणा के अंबाला जिले के अंबाला कैंट एपीएमसी मार्केट में सरसों की कीमतें MSP से काफी कम रहीं. इस दिन न्यूनतम कीमत 5,250 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम कीमत 5,900 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य (मॉडल) कीमत 5,400 रुपये प्रति क्विंटल रही. हालांकि, मौजूदा सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये क्विंटल है. यानी किसान एमएसपी से कम कीमत में सरसों बेचने को मजबूर हैं. इसी तरह 11 मार्च को अंबाला कैंट एपीएमसी मार्केट में स्थानीय काली सरसों (तेलबीन) की कीमतें 12 मार्च से भी कम रहीं. इस दिन न्यूनतम कीमत 5,200 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम कीमत 5,600 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य (मॉडल) कीमत 5,480 रुपये प्रति क्विंटल रही.

तिथि मार्केट न्यूनतम कीमत (₹/क्विंटल) अधिकतम कीमत (₹/क्विंटल) मॉडल कीमत (₹/क्विंटल) एमएसपी (₹/क्विंटल)
12 मार्च 2026 अंबाला कैंट एपीएमसी (सरसों) 5,250 5,900  5,400  6,200
11 मार्च 2026 अंबाला कैंट एपीएमसी (स्थानीय काली सरसों/तेलबीन)  5,200 5,600 5,480  6,200

 

‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर किसान करें रजिस्ट्रेशन

बात दें कि हरियाणा में कृषि और किसान कल्याण विभाग ने फसल विविधीकरण के तहत ढैंचा, दलहन और ग्वार की खेती बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. फसल वर्ष 2026 में राज्य में 4.50 लाख एकड़ भूमि पर इन फसलों की खेती करने का लक्ष्य तय किया गया है. इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1,000 रुपये की आर्थिक मदद भी दी जाएगी. इसके लिए किसानों को 1 मार्च से 15 अप्रैल तक ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है.

 

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Published: 21 Mar, 2026 | 03:06 PM
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