यकीन नहीं होगा! कभी टोमैटो केचप को समझा जाता था चमत्कारी दवा, जानिए कैसे फैला यह भ्रम
उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में टमाटर को आज की तरह सेहतमंद नहीं माना जाता था. अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में लोगों को लगता था कि टमाटर जहरीला होता है. लेकिन आज की रिसर्च बताती है कि टमाटर में लाइकोपीन जैसे तत्व होते हैं, जो दिल की सेहत और कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव में मदद कर सकते हैं.
Tomato ketchup history: आज टोमैटो केचप हमारी थाली का आम हिस्सा है. समोसे, बर्गर, फ्राइज या सैंडविच…बिना केचप सब फीका लगता है. बच्चे हों या बड़े, केचप का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस केचप को आज हम सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए खाते हैं, उसे करीब दो सौ साल पहले गंभीर बीमारियों की दवा बताकर बेचा जाता था? यह सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन इतिहास में केचप का सफर दवा से शुरू होकर खाने की मेज तक पहुंचा है.
जब टमाटर को माना जाता था जहरीला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में टमाटर को आज की तरह सेहतमंद नहीं माना जाता था. अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में लोगों को लगता था कि टमाटर जहरीला होता है. इसकी वजह यह थी कि उस दौर में लोग सीसे (Lead) की बनी प्लेटों में खाना खाते थे और टमाटर की एसिडिक प्रकृति के कारण प्लेट से सीसा घुलकर खाने में चला जाता था. इससे लोग बीमार पड़ते थे और दोष टमाटर को दे दिया जाता था. यही कारण था कि टमाटर को लंबे समय तक शक की नजर से देखा गया.
मशरूम और मछली से बनता था शुरुआती केचप
आज जिस केचप को हम टमाटर से जोड़ते हैं, वह हमेशा ऐसा नहीं था. 1800 के शुरुआती वर्षों में केचप मशरूम, मछली और नमक से बनाया जाता था. इसका स्वाद आज के मीठे और खट्टे केचप से बिल्कुल अलग होता था. उस समय केचप को एक तरह की औषधीय चटनी की तरह देखा जाता था, जिसे पाचन सुधारने वाला माना जाता था.
एक डॉक्टर ने बदली केचप की किस्मत
साल 1834 में अमेरिकी डॉक्टर जॉन कुक बेनेट ने टमाटर को लेकर एक नई सोच सामने रखी. उन्होंने दावा किया कि टमाटर कई बीमारियों में फायदेमंद हो सकता है. उन्होंने टमाटर को पीसकर सॉस और अर्क के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी और कहा कि इससे दस्त, हैजा, पीलिया और पाचन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है. उस दौर में जब वैज्ञानिक जानकारी सीमित थी, ऐसे दावे लोगों को बेहद आकर्षक लगे.
केचप बना दवा और शुरू हुआ बड़ा कारोबार
डॉ. बेनेट के दावों को पढ़कर कई कारोबारियों को इसमें मुनाफा नजर आने लगा. अमेरिका में एक व्यापारी ने टमाटर से बनी दवा को गोलियों और सिरप के रूप में बेचना शुरू किया. इसे “एक्सट्रैक्ट ऑफ टोमैटो” जैसे नाम दिए गए और प्रचार ऐसा किया गया मानो यह हर बीमारी का इलाज हो. अखबारों और विज्ञापनों के जरिए लोगों को यकीन दिलाया गया कि यह दवा शरीर को अंदर से ठीक कर देगी.
पूरे अमेरिका में केचप को लेकर मच गया था क्रेज
कुछ ही समय में अमेरिका में केचप को दवा समझकर खरीदने का जबरदस्त चलन शुरू हो गया. लोग इसे नियमित रूप से लेने लगे, उम्मीद थी कि इससे सेहत सुधरेगी. हालांकि बाद में वैज्ञानिक शोध से साफ हुआ कि केचप कोई चमत्कारी दवा नहीं है. धीरे-धीरे यह दवा वाला भ्रम टूटा, लेकिन इसका एक बड़ा फायदा जरूर हुआ लोगों का टमाटर से डर खत्म हो गया.
दवा नहीं, लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद
आज की रिसर्च बताती है कि टमाटर में लाइकोपीन जैसे तत्व होते हैं, जो दिल की सेहत और कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव में मदद कर सकते हैं. हालांकि केचप को दवा कहना गलत था, लेकिन टमाटर को पूरी तरह बेकार या जहरीला मानना भी सही नहीं था. समय के साथ विज्ञान ने सच्चाई सामने रखी और केचप ने दवा की बोतल से निकलकर खाने की प्लेट में अपनी जगह बना ली.