चीनी के बाद आटा भी महंगा, कीमत में 3 रुपये किलो की बढ़ोतरी.. रसोई का बजट बिगड़ा

रसोई के जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है. चीनी के बाद अब आटे के दाम भी बढ़ गए हैं. बिना ब्रांड वाले आटे की कीमत करीब 3 रुपये और ब्रांडेड आटे की कीमत 1 रुपये प्रति किलो बढ़ी है. गेहूं महंगा होने के साथ सरसों तेल के दाम भी तेजी से बढ़े हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 25 Aug, 2026 | 12:42 PM

पंजाब में रसोई के जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है. चीनी के दाम बढ़ने के बाद अब आटे की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. बिना ब्रांड वाले चक्की आटे के दाम करीब 3 रुपये प्रति किलो और ब्रांडेड आटे के दाम करीब 1 रुपये प्रति किलो बढ़ गए हैं. वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि पंजाब में गेहूं की उपलब्धता कम होने से आटा मिलों की खरीद लागत बढ़ गई है. इसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है.

गेहूं महंगा होने से बढ़े आटे के दाम

पंजाब रोलर फ्लोर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश घई ने द ट्रिब्यून से कहा कि आटे की कीमतों में यह बढ़ोतरी देशभर में देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि पंजाब में करीब 90 रोलर फ्लोर मिलें और हजारों आटा चक्कियां हैं, जिन सभी ने आटे के दाम बढ़ाए हैं. उनके मुताबिक, पंजाब में गेहूं की उपलब्धता कम होने से आटा मिलों की खरीद लागत बढ़ गई है. इसके चलते कीमतें बढ़ गई हैं.

केंद्र सरकार ने अप्रैल की खरीद के दौरान पंजाब से 122 लाख टन गेहूं खरीदा था. यह राज्य के कुल गेहूं उत्पादन का करीब 98 फीसदी है. बाकी 2 फीसदी गेहूं आटा मिलों ने अपने पास रखा था, लेकिन अब यह स्टॉक खत्म हो चुका है. घई ने कहा कि स्टॉक खत्म होने के बाद मिलों को दूसरे राज्यों से गेहूं खरीदना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि खरीद सीजन खत्म होने के बाद हर साल पंजाब में ऐसी स्थिति बनती है. पंजाब गेहूं उत्पादन के साथ-साथ खपत के लिहाज से भी बड़ा राज्य है, इसलिए खरीद सीजन के बाद यहां गेहूं की कमी हो जाती है. उन्होंने केंद्र से पंजाब के लिए विशेष नीति बनाने की मांग की.

MSP से महंगा मिल रहा गेहूं

वहीं, आटा मिलर राघव अरोड़ा ने कहा कि अप्रैल में मिलों ने 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य  (MSP) पर गेहूं खरीदा था. अब यही गेहूं करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आटे की कीमत बढ़ने की मुख्य वजह गेहूं की बढ़ी लागत और प्रोसेसिंग खर्च है. रसोई के जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों से लोगों के घर का बजट प्रभावित हो रहा है. ब्रांडेड आटे की 10 किलो की पैकिंग 420 से 460 रुपये तक बिक रही है. वहीं, एक बड़े ब्रांड ने आटे के नए लॉट की 10 किलो पैकिंग की कीमत 500 रुपये रखी है, जबकि पहले इसकी कीमत 489 रुपये थी.

बिना ब्रांड वाला आटा 350 रुपये 10 किलो

रिटेल दुकानदार बूटा राम ने कहा कि थोक विक्रेताओं द्वारा कीमत बढ़ाने के बाद वह 10 किलो बिना ब्रांड वाला आटा 350 रुपये में बेच रहे हैं. पहले इसकी कीमत 315 रुपये थी. उन्होंने कहा कि उनके ज्यादातर ग्राहक मध्यम और निम्न-मध्यम आय वर्ग से आते हैं, इसलिए वह ब्रांडेड आटा नहीं बेचते.  इधर, चीनी की खुदरा कीमत भी बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो हो गई है. इसकी कीमत क्वालिटी के हिसाब से अलग-अलग है. वहीं, सरसों तेल के दाम में पिछले एक महीने में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बिना ब्रांड वाला सरसों तेल अब 180 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो एक महीने पहले करीब 140 रुपये था. वहीं, ब्रांडेड सरसों तेल की कीमत करीब 220 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है.

 

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