चीन में भारतीय कॉटन यार्न की धूम! निर्यात 8 फीसदी बढ़ा, कारोबारियों को मिला फायदा
चीन में भारतीय कॉटन यार्न की मांग तेजी से बढ़ी है. चालू मार्केटिंग ईयर के पहले 10 महीनों में चीन को भारत का यार्न निर्यात तीन गुना हो गया. चीन के यार्न आयात में भारत की हिस्सेदारी 7 से बढ़कर 21 फीसदी हो गई. खास तौर पर 16 और 21 काउंट के मोटे धागे की मांग बढ़ी है.
Cotton Export: चीन में भारतीय कॉटन यार्न यानी सूती धागे की मांग तेजी से बढ़ी है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मजबूत मांग से भारत की कपास खपत को बढ़ावा मिल रहा है. इसके अलावा विकसित देशों से भी कॉटन उत्पादों की मांग भी बढ़ी है. USDA के अनुसार, चालू मार्केटिंग ईयर के अब तक भारत से सभी देशों को कॉटन यार्न का निर्यात 8 फीसदी बढ़ा है. इसमें चीन को निर्यात में तेज बढ़ोतरी अहम वजह रही. हालांकि, बांग्लादेश को निर्यात घटने से कुल बढ़त कुछ कम हुई.
चीन को भारत का कॉटन यार्न निर्यात पहले 10 महीनों में तीन गुना हो गया है. चीन के यार्न आयात में भारत की हिस्सेदारी भी 7 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसी दौरान चीन का कुल यार्न आयात भी बढ़ा, लेकिन भारत से आयात की रफ्तार दूसरे प्रमुख सप्लायरों से काफी ज्यादा रही. कमजोर रुपये और यार्न की घटती कीमतों से भारतीय निर्यातकों को फायदा मिला.
चीन में 16 और 21 काउंट के मोटे धागे की मांग तेज
कोलकाता की यार्न निर्माता और निर्यातक कंपनी S.P. Yarns के मैनेजिंग डायरेक्टर शरद खेमका ने बिजनेसलाइन से कहा कि इस साल चीन की ओर से भारतीय कॉटन यार्न की खरीद काफी मजबूत रही है. चीन में स्थानीय कीमतें ज्यादा होने के कारण वहां यार्न बनाना महंगा पड़ रहा है. हालांकि, भारत में हाल में बढ़ी कपास की कीमतें निर्यातकों के लिए चुनौती बन रही हैं. चीन इस साल भारत से खास तौर पर मोटे कॉटन यार्न की खरीद बढ़ा रहा है. उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, चीन में 16 और 21 काउंट के धागे की मांग ज्यादा है. इनका इस्तेमाल भारी-भरकम घरेलू कपड़ों और निटेड फैब्रिक बनाने में किया जाता है.
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कच्ची कपास के बजाय सस्ता यार्न खरीद रहे खरीदार
शरद खेमका ने कहा कि चीन के बाजार में भारत को वियतनाम से प्रतिस्पर्धा मिल रही है. पहले पाकिस्तान भी चीन को इस तरह का धागा सप्लाई करता था, लेकिन अब भारत इस कैटेगरी में प्रमुख सप्लायर बन गया है. हैदराबाद की श्री सालासर बालाजी एग्रोटेक के धीरज खेतान ने कहा कि इस साल चीन और बांग्लादेश जैसे देशों को कॉटन यार्न का निर्यात बढ़ा है. चीन कच्ची कपास के बजाय धागा खरीदना ज्यादा पसंद कर रहा है, क्योंकि भारत में यार्न की कीमत अपेक्षाकृत कम है.
ICE पर कपास के भाव 2 फीसदी गिरे
इस बीच, पिछले कुछ दिनों से तेजी के बाद गुरुवार को ICE एक्सचेंज पर कपास की कीमतों में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई. इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा. रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बू्ब के मुताबिक, बाजार में नरमी है. रीसेलर और मल्टीनेशनल कंपनियां सक्रिय हैं और उन्होंने कपास के भाव करीब 500 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) घटा दिए हैं. आगे नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद के बीच कपास की मांग में भी कुछ नरमी आ सकती है.
टेक्सटाइल सेक्टर को राहत देने के लिए आयात शुल्क में छूट
भारत का कपास आयात 2025-26 में रिकॉर्ड 48 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के मुताबिक, 2026-27 में भारत का कपास आयात करीब 30 लाख गांठ रह सकता है. एक गांठ का वजन 480 पाउंड यानी करीब 218 किलो माना गया है. USDA के अनुसार, घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को समर्थन देने के लिए भारत सरकार ने 2025-26 में छह महीने से ज्यादा समय तक और 2026-27 के शुरुआती तीन महीनों में आयातित कपास पर शुल्क हटा दिया था. इस नीति और अन्य उपायों से भारत में कपास की खपत बढ़ने की उम्मीद है. भारत में कपास की खपत 2026-27 में रिकॉर्ड 2.65 करोड़ गांठ तक पहुंच सकती है, जो 2025-26 के 2.60 करोड़ गांठ से ज्यादा है. इससे पहले 2020-21 में कपास की खपत 2.60 करोड़ गांठ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी.