Annapurna Summit 2025: किसान नेता गुणी प्रकाश ने तीन कृषि कानूनों का किया समर्थन, वीएम सिंह का MSP पर बड़ा बयान

Kisan India Annapurna Summit 2025: किसान इंडिया अन्नपूर्णा समिट 2025 में शामिल हुए किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि देश के कई राज्यों में किसान बड़े स्तर पर गन्ने की खेती कर रहे हैं. गन्ने से लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों किसान परिवारों का घर का खर्च चल रहा है. लेकिन केंद्र सरकार का गन्ना किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं है. वहीं, किसान नेता गुणी प्रकाश ने तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया और किसानों के लिए नए बाजार के विकल्प पर जोर दिया.

नोएडा | Updated On: 18 Dec, 2025 | 10:22 AM

Kisan India Annapurna Summit 2025: किसान इंडिया अन्नपूर्णा समिट 2025 का आयोजन दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में किया गया. कार्यक्रम में सरकार के प्रतिनिधि, किसान नेता, प्रगतिशील किसान, इंडस्ट्री एक्सपर्ट और कृषि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का हिस्सा बने भारतीय किसान यूनियन मान के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष और एमएसपी कमेटी के सदस्य ठाकुर गुणी प्रकाश ने केंद्र सरकार की ओर से पूर्व में लाए गए तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया. जबकि, राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी के संस्थापक वीएम सिंह ने सरकार के तीन कृषि कानूनों का विरोध किया. दोनों किसान नेताओं ने खेती-किसानी के विकास पर पैनल में जोरदार विचार रखे.

किसान इंडिया के अन्नपूर्णा समिट 2025 का हिस्सा बने भारतीय किसान यूनियन मान के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष और एमएसपी कमेटी के सदस्य ठाकुर गुणी प्रकाश ने केंद्र सरकार की ओर से पूर्व में लाए गए तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यह कानून छोटे और सीमांत किसानों के हित में था. इससे छोटी जोत वाले किसानों को फायदा होता. अन्नदाताओं को उनकी उपज का बेहतर रेट मिलता.

किसानों को नए बाजार का विकल्प मिलना चाहिए- गुणी प्रकाश

किसान नेता गुणी प्रकाश ने कहा कि किसानों को अपनी फसलों की बिक्री के लिए खुद नया बाजार तलाशना और बनाना होगा. उन्होंने कहा कि एमएसपी से क्या हो जाएगा या अब तक क्या बदलाव आ गया है. क्या किसानों की आर्थिक हालत ठीक हो गई है. क्या मौजूदा मंडी व्यवस्था किसानों की स्थिति को बेहतर कर पा रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को नए बाजार का विकल्प मिलना चाहिए. ताकि उन्हें मंडियों के बिचौलियों और दलालों से छुटकारा मिल सके और उन्हें अपनी उपज का सही दाम हासिल हो सके.

तीन कृषि कानून किसानों के हित में नहीं थे – वीएम सिंह

प्रमुख किसान नेता और राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी के संस्थापक वीएम सिंह ने कहा कि केंद्र की ओर से पूर्व में लाए गए तीन कृषि कानून किसानों के हित में नहीं थे. वीएम सिंह ने कहा कि देश के कई राज्यों में किसान बड़े स्तर पर गन्ने की खेती  कर रहे हैं. गन्ने से लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों किसान परिवारों का घर का खर्च चल रहा है. लेकिन केंद्र सरकार का गन्ना किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं है. उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि सरकार ने अभी तक किसी को गन्ना मंत्री नहीं बनाया है.

सरकार का किसान हित पर ध्यान नहीं

किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी किसानों के हितों का खयाल नहीं रखती हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों से मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSAP) पर फसल की खरीदी कर रही है. क्योंकि सरकार किसानों को केवल वोट बैंक  मानती है. वोट के लालच में ही वह एमएसपी पर किसानों से फसलों की खरीद कर रही है. इसके बावजूद भी किसानों को खेती में आर्थिक नुकसान हो रहा है.

सरकार मजबूरी में देर रही एमएसपी

वीएम सिंह ने कहा कि देश में किसान परिवारों की कुल आबादी करीब 80 करोड़ है. उनके अनुसार किसानों की ये आबादी सरकार की नजर में केवल और केवल वोट बैंक है. सरकार इन वोटों को ध्यान में रखकर ही फसलों की खरीद एमएसपी पर कर रही है. उन्होंने कहा है कि सरकार शुगर मिलों की हर मांगे मान लेती है, लेकिन किसानों की मांगें को नजरअंदाज कर देती है.

फ्री राशन योजना का हो रहा दुरुपयोग

खास बात यह है कि वीएम सिंह ने सरकार कि फ्री राशन योजना  को भी कम असरदार बताया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लाभार्थी केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से फ्री राशन का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन फ्री राशन का पूरी तरह से सदुपयोग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राशन दुकान से लाभार्थी एक थैला राशन खाने के लिए घर ले जाते हैं, तो दूसरे थैले के राशन को मार्केट में ही बेचकर शराब पी जा रहे हैं. यानी सरकार का फ्री राशन फिर से मार्केट में पहुंच जा रहा है.

कार्यक्रम के स्पॉन्सर पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड यानी मार्कफेड, मिल्कफेड पंजाबवेरका, नेक्संस बाइ पीसीए टेक्नोलॉजीज और बीएमएस ऑर्गेनिक फार्मर्स प्रॉड्यूसर कंपनी लिमिटेड थे.

Published: 17 Dec, 2025 | 11:31 AM

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