महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और किसानों के मुद्दे को लेकर सियासत गरमा गई है. सांसद बंडू जाधव के संवाद कार्यक्रम में पहुंचे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में नारेबाजी हुई. इस कार्यक्रम को मनोज जरांगे के अनिश्चितकालीन अनशन के विरोध में आयोजित करने की बात आरक्षण समर्थकों ने कही. वहीं, एकनाथ शिंदे ने किसानों और मराठा समुदाय के मुद्दे पर सरकार और मनोज जरांगे की सोच एक जैसी है, कहकर हालात साधने की कोशिश की है और सीएम फडणवीस के वार्ता करने की बात भी कही है. लेकिन, मनोज जरांगे ने फिर से कहा है कि अगर 6 करोड़ मराठा मुंबई पहुंच गए तो वह पीछे नहीं हटेंगे और सरकार को खेती-किसानी करने वाले मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र देना ही होगा.
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर 11वां अनिश्चितकालीन अनशन का तीसरा दिन है. उनके आंदोलन के समर्थन में समुदाय के हजारों लोग वहां जुटे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से सातारा गजट के आधार पर आरक्षण देने, पूरे महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लेने और पिछले आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा देने की भी मांग की है.
कृषक समुदाय से जुड़े मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र दे सरकार
मनोज जरांगे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए. कुनबी एक कृषक समुदाय है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को सभी मराठों को कुनबी घोषित करना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मराठा खेती-किसानी के काम से जुड़े हैं. ऐसे में वे सिफारिशों के अनुसार आरक्षण के हकदार हैं.
6 करोड़ मराठा मुंबई पहुंचे तो पीछे नहीं हटेंगे, 12 को फैसला लेंगे
जरांगे की मांग है कि मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को 58 लाख ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं. उन्होंने कहा कि समुदाय अब इसके लिए और समय देने को तैयार नहीं है. उन्होंने यह भी मांग की है कि जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन रोक दिया जाए, क्योंकि जिन मामलों में ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उनमें सत्यापन की कोई जरूरत नहीं है. जरांगे ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वह मुंबई तक मार्च करेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 6 करोड़ मराठा मुंबई पहुंचे तो फिर वह पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को कोर कमेटी आंदोलन पर फैसला लेगी.
किसानों और मराठा मुद्दे पर सरकार और जरांगे की सोच एक है- डिप्टी सीएम
शिवसेना शिंदे गुट के सांसद बंडू जाधव ने परभणी में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पहुंचे. इस आयोजन को मनोज जरांगे के अनशन को हल्का करने के इरादे से आयोजित करने की बात जरांगे समर्थकों ने कही. कार्यक्रम में जरांगे समर्थकों ने एक मराठा लाख मराठा के नारे भी लगाए. कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य की सरकार और अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे किसानों के समर्थन के मुद्दे पर एक ही सोच रखते हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समुदाय के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है.
कृषि मंत्री दत्तात्रेय बोले- एक दो दिन में बातचीत से हल निकल आएगा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे से रविवार को संपर्क किया. उन्होंने यह कदम ऐसे समय उठाया जब जरांगे ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार 12 सितंबर तक सभी योग्य मराठाओं के लिए कुनबी (अन्य पिछड़ा वर्ग) जाति प्रमाण पत्र की उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं करती है, तो वह मुंबई तक मार्च करेंगे. उधर, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता विखे पाटिल जारांगे दादा से बात कर रहे हैं. निश्चित रूप से, बातचीत से आगे का कोई रास्ता निकलेगा. जारांगे दादा द्वारा उठाए गए मुद्दों और सवालों को लेकर सरकार सकारात्मक है. निश्चित रूप से, एक-दो दिनों में इस मामले में कोई समाधान या आगे का रास्ता निकल आएगा.