UP में महंगाई की मार! 65 रुपये किलो हुई चीनी, 15 दिन में 15 रुपये तक बढ़ी कीमत
लखनऊ में चीनी की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. खुदरा बाजार में भाव 65 रुपये किलो हो गया है, जो 15 दिन पहले 48-50 रुपये था. त्योहारों से पहले मांग बढ़ने और स्टॉक घटने से कीमतों में तेजी आई है. इस साल चीनी उत्पादन 5 फीसदी कम रहने का अनुमान है. मिठाई कारोबारियों पर भी बढ़ती कीमतों का असर पड़ा है.
Sugar Price Hike: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चीनी की कीमतों में तेजी जारी है. खुदरा बाजार में चीनी का भाव बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है. त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और चीनी का स्टॉक घटने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है. कारोबारियों के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में चीनी करीब 15 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है. फिलहाल बाजार में चीनी की सप्लाई मांग का सिर्फ करीब 50 फीसदी ही पूरा कर पा रही है. मौजूदा पेराई सीजन खत्म होने के करीब है और स्टॉक घटने से सप्लाई पर असर पड़ा है. इससे आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव रह सकता है.
कारोबारियों का कहना है कि रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं. ऐसे में चीनी की मांग और बढ़ने की उम्मीद है. इससे आने वाले दिनों में इसके दाम में और तेजी आ सकती है. वहीं, खुदरा दुकानदारों का कहना है कि 15 दिन पहले चीनी 48-50 रुपये किलो बिक रही थी, जो अब बढ़कर 65 रुपये किलो हो गई है. थोक कारोबारियों के मुताबिक, चीनी की कीमत पहली बार 60 रुपये किलो से ऊपर गई है.
एथेनॉल की मांग बढ़ने से मार्केट पर असर
कारोबारियों के मुताबिक, चीनी की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल उत्पादन में कमी भी है. इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 5 फीसदी कम रहने का अनुमान है. इससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक घट गया है. नई चीनी मिलों का पेराई सीजन अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है. कारोबारियों का कहना है कि इस साल मिलों ने गन्ने का ज्यादा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में लगाया है, क्योंकि इसमें बेहतर रिटर्न मिल रहा है. पेट्रोल और शराब बनाने वाली कंपनियों की एथेनॉल मांग बढ़ने से भी चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है.
महंगी चीनी से मिठाई कारोबारियों की बढ़ी चिंता
चीनी के दाम बढ़ने का असर मिठाई कारोबारियों पर भी पड़ने लगा है. आने वाले एक महीने में कई बड़े त्योहार हैं, जिससे मिठाइयों की मांग बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में महंगी चीनी और कम सप्लाई से कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है. यूपी आदर्श व्यापार मंडल के राज्य उपाध्यक्ष और मिठाई कारोबारी अविनाश त्रिपाठी के मुताबिक, मिठाई बनाने में करीब 20 फीसदी हिस्सा चीनी का होता है. वहीं, 1 किलो खोया तैयार करने में करीब 200 ग्राम चीनी की जरूरत पड़ती है. उन्होंने कहा कि कारोबारियों को जरूरत की तुलना में फिलहाल सिर्फ आधी चीनी की सप्लाई मिल रही है.
चीनी कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लागू
उन्होंने कहा कि कच्चे माल की लागत में 25-30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इससे कारोबारियों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है. हालांकि, कमर्शियल LPG सिलेंडर पर सरकार की ओर से 375 रुपये की राहत मिली है. इस बीच केंद्र सरकार ने हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट तय कर दी है. नए आदेश के मुताबिक, 1 सितंबर से 30 नवंबर तक ऐसे कारोबारी 15 दिनों की जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. इसका मकसद जमाखोरी रोकना और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है.