संतरे की खेती से होगा मुनाफा, जानिए बेस्ट किस्में और उगाने का सही तरीका
संतरे की खेती के लिए दोमट मिट्टी और गर्म-शुष्क जलवायु जरूरी होती है. सही देखभाल और सिंचाई से एक पेड़ से 300 से 500 संतरे तक की उपज ली जा सकती है, जो कई सालों तक मुनाफा देती है.

संतरे की खेती के लिए दोमट मिट्टी और गर्म-शुष्क जलवायु के साथ- साथ अच्छी जल निकासी जरूरी है. एक हेक्टेयर में करीबन 150 से 200 पौधे लगाये जा सकते हैं, जिन्हें 6×6 मीटर की दूरी पर लगाना होता है.

संतरे का पेड़ तीन साल में फल देना शुरू करते हैं. अगर जैविक खाद, सही सिंचाई और कीट नियंत्रण से बचा लिया जाए तो एक पेड़ से हर साल 300 से 500 संतरे तक की पैदावार ली जा सकती है. खास बात यह है कि यह पेड़ कई साल तक मुनाफा देता है.

नागपुरी संतरा अपने पतले छिलके और रसीले गूदे के लिए जाना जाता है, जिसका स्वाद हल्का मीठा-खट्टा होता है. यह नवंबर से जनवरी तक तैयार होता है. GI टैग मिलने के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ी है.

कूर्ग संतरा अपने स्वाद और खुशबू के लिए जाना जाता है. इसका आकार मध्यम, मोटा छिलका और अंदर के मुलायमका गूदे के साथ हल्का खट्टा-मीठा और बहुत ही खुशबूदार होता हैं. जिसके चलते यह दिसंबर से फरवरी तक बाजार में खूब बिकता है.

पंजाबी देसी संतरा, पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में उगाया जाने वाला यह संतरा छोटा आकार, मोटा छिलका और बेहतर ट्रांसपोर्ट क्षमता के लिए प्रसिद्ध है. इसकी फसल जनवरी से मार्च तक रहती है.

दार्जिलिंग संतरा, जो दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है, पश्चिम बंगाल की विशेष पहचान है. इसका छोटा आकार, पतला छिलका, तीव्र खट्टा स्वाद और रसीला गूदा इसे खास बनाता है. यह संतरा नवंबर से दिसंबर तक उपलब्ध रहता है.

खासी संतरा, खासी हिल्स और असम में उगाया जाने वाला यह संतरा, मध्यम आकार, रसीले गूदे और तीखे खट्टे-मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसकी खेती अक्टूबर से दिसंबर तक होती है और इसे GI टैग भी प्राप्त है.
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तरबूज की खेती किस सीजन में की जाती है?
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