Tip Of The Day: गलत समय पर बुवाई से हो सकता है बड़ा नुकसान! जानें बाजरे की खेती का सही तरीका

Bajra Ki Kheti: राजस्थान की खेती में बाजरा सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका और उम्मीदों का बड़ा सहारा है. खरीफ सीजन के दौरान जब मानसून की पहली बारिश खेतों को छूती है, तो सही समय पर की गई बाजरे की बुवाई पूरे सीजन की पैदावार तय कर देती है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, ऐसे में वैज्ञानिक तरीकों और सही प्रबंधन के साथ खेती करना किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफे का रास्ता खोल सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Jun, 2026 | 06:32 PM
1 / 6राजस्थान में बाजरा खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है और यह किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है. प्रदेश में करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, जिससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.

राजस्थान में बाजरा खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है और यह किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है. प्रदेश में करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, जिससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.

2 / 6कृषि विशेषज्ञ के अनुसार बाजरे की बुवाई का सबसे सही समय मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ होता है. इस समय बुवाई करने से बीज का अंकुरण बेहतर होता है और फसल की पैदावार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जाती है.

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार बाजरे की बुवाई का सबसे सही समय मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ होता है. इस समय बुवाई करने से बीज का अंकुरण बेहतर होता है और फसल की पैदावार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जाती है.

3 / 6उन्नत और बायोफोर्टिफाइड किस्मों जैसे RHB-173, RHB-177, RHB-223, RHB-228, RHB-233 और RHB-234 का चयन करने से किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. सही किस्म का चुनाव फसल की क्वालिटी और लाभ दोनों को बढ़ाता है.

उन्नत और बायोफोर्टिफाइड किस्मों जैसे RHB-173, RHB-177, RHB-223, RHB-228, RHB-233 और RHB-234 का चयन करने से किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. सही किस्म का चुनाव फसल की क्वालिटी और लाभ दोनों को बढ़ाता है.

4 / 6बाजरे की खेती में बीजोपचार बेहद जरूरी माना जाता है. बीजों को नमक के घोल में उपचारित करने के साथ-साथ कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके सफेद लट, दीमक और अन्य रोगों से फसल की सुरक्षा की जा सकती है, जिससे नुकसान कम होता है.

बाजरे की खेती में बीजोपचार बेहद जरूरी माना जाता है. बीजों को नमक के घोल में उपचारित करने के साथ-साथ कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके सफेद लट, दीमक और अन्य रोगों से फसल की सुरक्षा की जा सकती है, जिससे नुकसान कम होता है.

5 / 6बुवाई का उपयुक्त समय मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक होता है. इस दौरान कतारों और पौधों के बीच सही दूरी रखना आवश्यक है ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण, धूप और जगह मिल सके, जिससे विकास बेहतर होता है.

बुवाई का उपयुक्त समय मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक होता है. इस दौरान कतारों और पौधों के बीच सही दूरी रखना आवश्यक है ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण, धूप और जगह मिल सके, जिससे विकास बेहतर होता है.

6 / 6संतुलित खाद, गोबर की सड़ी खाद और समय पर नत्रजन-फॉस्फोरस का उपयोग करके तथा रोग एवं कीट प्रबंधन अपनाकर किसान बाजरे की खेती में कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

संतुलित खाद, गोबर की सड़ी खाद और समय पर नत्रजन-फॉस्फोरस का उपयोग करके तथा रोग एवं कीट प्रबंधन अपनाकर किसान बाजरे की खेती में कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

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Published: 17 Jun, 2026 | 06:32 PM

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