खर्च आधा, कमाई डबल! बकरी-मुर्गी पालन का ये मॉडल चमकाएगा आपकी किस्मत, हर महीने होगी ₹25,000 की कमाई

Rural Business Ideas: अगर आप खेती के साथ-साथ कम खर्च में ज्यादा कमाई का तरीका खोज रहे हैं, तो बकरी और मुर्गी को एक साथ पालने का मॉडल आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. यह तरीका न सिर्फ चारे और शेड का खर्च घटाता है, बल्कि अंडे, दूध, खाद और मांस से डबल इनकम का रास्ता भी खोलता है. सही मैनेजमेंट अपनाकर किसान घर बैठे हर महीने अच्छी आमदनी कर सकते हैं, वो भी बिना ज्यादा मेहनत के.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 7 Jan, 2026 | 06:28 PM
1 / 6जब बकरी और मुर्गी को साथ पाला जाता है, तो बकरियों का बचा हुआ चारा मुर्गियां खा लेती हैं. इससे मुर्गियों के लिए अलग से दाना डालने की जरूरत काफी कम हो जाती है और रोज प्रति मुर्गी 30-40 ग्राम दाने की बचत होती है, जो महीने में बड़ी रकम बन जाती है.

जब बकरी और मुर्गी को साथ पाला जाता है, तो बकरियों का बचा हुआ चारा मुर्गियां खा लेती हैं. इससे मुर्गियों के लिए अलग से दाना डालने की जरूरत काफी कम हो जाती है और रोज प्रति मुर्गी 30-40 ग्राम दाने की बचत होती है, जो महीने में बड़ी रकम बन जाती है.

2 / 6बकरी और मुर्गी के लिए अलग-अलग शेड बनाने की बजाय एक साझा शेड बनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है. बीच में जाली लगाकर दोनों को अलग रखा जा सकता है. बकरियों के बाहर जाने पर मुर्गियों को अंदर छोड़ने से बचा चारा साफ हो जाता है.

बकरी और मुर्गी के लिए अलग-अलग शेड बनाने की बजाय एक साझा शेड बनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है. बीच में जाली लगाकर दोनों को अलग रखा जा सकता है. बकरियों के बाहर जाने पर मुर्गियों को अंदर छोड़ने से बचा चारा साफ हो जाता है.

3 / 6अक्सर किसान बकरियों की मेंगनी को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि इससे बेहतरीन कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है. यह ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की ताकत बढ़ाती है और खेत में हरा चारा उगाने में मदद करती है, जिससे बाहर से चारा खरीदने का खर्च घटता है.

अक्सर किसान बकरियों की मेंगनी को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि इससे बेहतरीन कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है. यह ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की ताकत बढ़ाती है और खेत में हरा चारा उगाने में मदद करती है, जिससे बाहर से चारा खरीदने का खर्च घटता है.

4 / 6बकरी की मेंगनी से बनी खाद से अजोला आसानी से उगाया जा सकता है. अजोला प्रोटीन से भरपूर हरा चारा है, जिसे मुर्गियां और बकरियां दोनों शौक से खाती हैं. इससे पशुओं की सेहत सुधरती है और दूध व अंडे का उत्पादन भी बढ़ता है.

बकरी की मेंगनी से बनी खाद से अजोला आसानी से उगाया जा सकता है. अजोला प्रोटीन से भरपूर हरा चारा है, जिसे मुर्गियां और बकरियां दोनों शौक से खाती हैं. इससे पशुओं की सेहत सुधरती है और दूध व अंडे का उत्पादन भी बढ़ता है.

5 / 6मुर्गियां साल में औसतन 180-200 अंडे देती हैं. अगर किसान 50-100 मुर्गियां पालते हैं, तो रोज़ाना अंडों की बिक्री से अच्छी कमाई हो सकती है. साथ ही कुछ समय बाद मुर्गियों को मांस के रूप में बेचकर अतिरिक्त आय भी मिलती है.

मुर्गियां साल में औसतन 180-200 अंडे देती हैं. अगर किसान 50-100 मुर्गियां पालते हैं, तो रोज़ाना अंडों की बिक्री से अच्छी कमाई हो सकती है. साथ ही कुछ समय बाद मुर्गियों को मांस के रूप में बेचकर अतिरिक्त आय भी मिलती है.

6 / 6बकरियों से दूध, बच्चे और खाद मिलती है, जबकि मुर्गियों से अंडे और मांस. जब दोनों को सही योजना और मैनेजमेंट के साथ पाला जाए, तो कम खर्च और कम मेहनत में किसान हर महीने ₹20-25 हजार तक की कमाई कर सकते हैं.

बकरियों से दूध, बच्चे और खाद मिलती है, जबकि मुर्गियों से अंडे और मांस. जब दोनों को सही योजना और मैनेजमेंट के साथ पाला जाए, तो कम खर्च और कम मेहनत में किसान हर महीने ₹20-25 हजार तक की कमाई कर सकते हैं.

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Published: 7 Jan, 2026 | 06:28 PM

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