खेत में लगाएं ये ‘फ्यूचर का ATM’, 12 साल में बना देगा करोड़पति, किसानों के लिए बना सबसे मजबूत इन्वेस्टमेंट!

Lal Chandan Ki Kheti: अगर खेती में हर साल की मार से परेशान हैं और चाहते हैं कि एक बार मेहनत करें और जिंदगी भर सुकून मिले, तो यह खबर आपके लिए है. सोचिए… खेत में ऐसा पेड़ लगा हो जो न ज्यादा पानी मांगे, न रोज की देखभाल और जब कटे तो सीधा लाखों की कमाई करवा दे. गांव में आजकल इसी पेड़ की चर्चा जोरों पर है और किसान इसे प्यार से ‘फ्यूचर का एटीएम’ कह रहे हैं. हम बात कर रहे हैं लाल चंदन की, जो आज खेती नहीं बल्कि भविष्य की सबसे मजबूत इन्वेस्टमेंट बन चुका है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 20 Jan, 2026 | 06:45 PM
1 / 6लाल चंदन ऐसा पेड़ है जो रोज-रोज कमाई नहीं देता, लेकिन जब 12–15 साल बाद तैयार होता है तो एक साथ इतनी बड़ी रकम देता है कि किसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है. यही वजह है कि इसे खेती का ‘फयूचर ATM’ कहा जा रहा है.

लाल चंदन ऐसा पेड़ है जो रोज-रोज कमाई नहीं देता, लेकिन जब 12–15 साल बाद तैयार होता है तो एक साथ इतनी बड़ी रकम देता है कि किसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है. यही वजह है कि इसे खेती का ‘फयूचर ATM’ कहा जा रहा है.

2 / 6लाल चंदन की लकड़ी की कीमत ₹3,000 से ₹10,000 प्रति किलो तक जाती है. आयुर्वेदिक दवाओं, इत्र, हैंडीक्राफ्ट और विदेशों में महंगे फर्नीचर की वजह से इसकी डिमांड साल दर साल बढ़ती जा रही है.

लाल चंदन की लकड़ी की कीमत ₹3,000 से ₹10,000 प्रति किलो तक जाती है. आयुर्वेदिक दवाओं, इत्र, हैंडीक्राफ्ट और विदेशों में महंगे फर्नीचर की वजह से इसकी डिमांड साल दर साल बढ़ती जा रही है.

3 / 6इस पेड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी, खाद या देखभाल की जरूरत नहीं होती. शुरुआती 2–3 साल थोड़ी निगरानी जरूरी होती है, उसके बाद पेड़ खुद ही बढ़ता रहता है.

इस पेड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी, खाद या देखभाल की जरूरत नहीं होती. शुरुआती 2–3 साल थोड़ी निगरानी जरूरी होती है, उसके बाद पेड़ खुद ही बढ़ता रहता है.

4 / 6लाल चंदन की खेती में सबसे अहम बात है असली पौधे की पहचान. नर्सरी से प्रमाणित पौधे ही लें, क्योंकि नकली किस्म न तो सही बढ़ती है और न ही बाजार में उसका कोई दाम मिलता है.

लाल चंदन की खेती में सबसे अहम बात है असली पौधे की पहचान. नर्सरी से प्रमाणित पौधे ही लें, क्योंकि नकली किस्म न तो सही बढ़ती है और न ही बाजार में उसका कोई दाम मिलता है.

5 / 610-12 साल बाद पेड़ में रंग और खुशबू आने लगती है, जिससे लकड़ी की कीमत और बढ़ जाती है. अगर किसान 15-20 साल तक इंतजार कर ले, तो यही पेड़ करोड़ों रुपये की आमदनी दे सकता है.

10-12 साल बाद पेड़ में रंग और खुशबू आने लगती है, जिससे लकड़ी की कीमत और बढ़ जाती है. अगर किसान 15-20 साल तक इंतजार कर ले, तो यही पेड़ करोड़ों रुपये की आमदनी दे सकता है.

6 / 6लाल चंदन वन विभाग की निगरानी में आता है. इसकी कटाई और बिक्री से पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और हॉर्टिकल्चर ऑफिस से परमिट लेना जरूरी होता है, वरना कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

लाल चंदन वन विभाग की निगरानी में आता है. इसकी कटाई और बिक्री से पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और हॉर्टिकल्चर ऑफिस से परमिट लेना जरूरी होता है, वरना कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

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Published: 20 Jan, 2026 | 06:45 PM

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