Dairy Farming: क्या आपकी गाय-भैंस भी नहीं खा रही चारा? ये गलतियां बर्बाद कर रही है आपकी डेयरी, जानें

Dairy Farming Tips: जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, उसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि गाय-भैंस जैसे पशुओं पर भी साफ दिखने लगता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और तपते शेड के कारण पशु चारा कम खाने लगते हैं, जिससे उनका दूध उत्पादन गिर जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, यही कारण है कि गर्मियों में पशुपालकों की कमाई पर सीधा असर पड़ता है. लेकिन अगर सही समय पर ठंडक, पानी और ताजे चारे का इंतजाम कर लिया जाए, तो इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 7 Apr, 2026 | 09:24 PM
1 / 6भीषण गर्मी के कारण गाय-भैंस चारा कम खाने लगते हैं, क्योंकि तेज धूप और गर्म हवा उन्हें असहज कर देती है. इसका सीधा असर उनके दूध उत्पादन पर पड़ता है, जिससे डेयरी किसानों की आय में गिरावट आती है.

भीषण गर्मी के कारण गाय-भैंस चारा कम खाने लगते हैं, क्योंकि तेज धूप और गर्म हवा उन्हें असहज कर देती है. इसका सीधा असर उनके दूध उत्पादन पर पड़ता है, जिससे डेयरी किसानों की आय में गिरावट आती है.

2 / 6गर्मी के मौसम में पशुओं का शरीर तेजी से गर्म हो जाता है, खासकर जब वे टिन शेड या बंद जगह में बंधे होते हैं. इससे उन्हें बेचैनी होती है और वे खाना-पीना कम कर देते हैं. विदेशी नस्ल की गायें जैसे होल्स्टीन फ्रीसियन और जर्सी इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं.

गर्मी के मौसम में पशुओं का शरीर तेजी से गर्म हो जाता है, खासकर जब वे टिन शेड या बंद जगह में बंधे होते हैं. इससे उन्हें बेचैनी होती है और वे खाना-पीना कम कर देते हैं. विदेशी नस्ल की गायें जैसे होल्स्टीन फ्रीसियन और जर्सी इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं.

3 / 6पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए हर 2-3 दिन में नहलाना जरूरी है. इसके साथ ही शेड में पंखा, कूलर या फॉगर लगाने से वातावरण ठंडा रहता है. टिन शेड के नीचे घास-फूस या सफेद कपड़ा डालने से गर्मी कम की जा सकती है और हवा के अच्छे प्रवाह का इंतजाम भी जरूरी है.

पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए हर 2-3 दिन में नहलाना जरूरी है. इसके साथ ही शेड में पंखा, कूलर या फॉगर लगाने से वातावरण ठंडा रहता है. टिन शेड के नीचे घास-फूस या सफेद कपड़ा डालने से गर्मी कम की जा सकती है और हवा के अच्छे प्रवाह का इंतजाम भी जरूरी है.

4 / 6गर्मी में पानी की कमी से पशुओं की भूख सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. इसलिए हर पशु को दिनभर में कम से कम 40 लीटर साफ और ठंडा पानी देना चाहिए. पानी छांव में रखना चाहिए ताकि वह ज्यादा गर्म न हो और पशु बार-बार थोड़ा-थोड़ा पी सकें.

गर्मी में पानी की कमी से पशुओं की भूख सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. इसलिए हर पशु को दिनभर में कम से कम 40 लीटर साफ और ठंडा पानी देना चाहिए. पानी छांव में रखना चाहिए ताकि वह ज्यादा गर्म न हो और पशु बार-बार थोड़ा-थोड़ा पी सकें.

5 / 6गर्मी के मौसम में सूखा और बासी चारा पशु कम पसंद करते हैं. इसके बजाय बरसीम, ज्वार और बाजरा जैसे ताजे हरे चारे खिलाने चाहिए, जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है. इससे पशुओं का शरीर हाइड्रेट रहता है और उनकी भूख भी बनी रहती है.

गर्मी के मौसम में सूखा और बासी चारा पशु कम पसंद करते हैं. इसके बजाय बरसीम, ज्वार और बाजरा जैसे ताजे हरे चारे खिलाने चाहिए, जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है. इससे पशुओं का शरीर हाइड्रेट रहता है और उनकी भूख भी बनी रहती है.

6 / 6सुबह और शाम के ठंडे समय में चारा खिलाना ज्यादा फायदेमंद होता है. अगर पशुओं को ठंडी जगह, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार मिले, तो गर्मी के बावजूद दूध उत्पादन में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है, जिससे पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है.

सुबह और शाम के ठंडे समय में चारा खिलाना ज्यादा फायदेमंद होता है. अगर पशुओं को ठंडी जगह, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार मिले, तो गर्मी के बावजूद दूध उत्पादन में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है, जिससे पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है.

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