क्या 2019 के बाद कृषि भूमि के मालिक बने किसानों को भी मिलेगा PM Kisan का लाभ? गरमाया मुद्दा

महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने मांग की है कि पीएम-किसान और नमो शेतकरी योजना का लाभ उन किसानों को भी मिले, जिन्होंने 2019 के बाद जमीन खरीदी या विरासत में प्राप्त की है. किसानों का कहना है कि वे खेती की पूरी लागत उठाते हैं, लेकिन तकनीकी नियमों के कारण योजनाओं से वंचित हैं. मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है.

नोएडा | Published: 4 Jul, 2026 | 04:24 PM

PM Kisan: महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि पीएम-किसान सम्मान निधि और नमो शेतकरी योजना का लाभ उन किसानों को भी दिया जाए, जिन्होंने वर्ष 2019 के बाद कृषि भूमि खरीदी है या विरासत में प्राप्त की है. किसानों का कहना है कि वे खेती की पूरी लागत उठा रहे हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए हैं.

न्यज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि पात्र किसानों को योजनाओं में शामिल करने और लंबित वित्तीय सहायता जारी करने के लिए जल्द नियमों में बदलाव नहीं किया गया, तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने मांग की है कि वर्ष 2019 के बाद जमीन खरीदने, विरासत में पाने या पारिवारिक बंटवारे के जरिए कृषि भूमि प्राप्त करने वाले सभी पात्र किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) और राज्य सरकार की नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना का लाभ दिया जाए.

लंबित किस्तें जल्द जारी की जाएं

संघ ने यह भी मांग की है कि पात्र किसानों को योजनाओं की सभी लंबित किस्तें जल्द जारी की जाएं. साथ ही, योजना की पात्रता तय करने में भूमि स्वामित्व की बजाय “वास्तविक खेती करने वाले किसान” को आधार बनाया जाए. इसके अलावा, योजनाओं से बाहर रह गए किसानों की पहचान  के लिए विशेष पंजीकरण और सत्यापन अभियान चलाने की भी मांग की गई है.

संबंधित विभागों को औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा

संघ का कहना है कि यह समस्या केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के लाखों किसान परिवार इससे प्रभावित हैं. कई किसान जमीन खरीदने, विरासत में मिलने या पारिवारिक बंटवारे के बाद खेती कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्याज उत्पादक संघ ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित विभागों को औपचारिक ज्ञापन सौंपेगा. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा.

पात्रता शर्तों में बदलाव किया जाना चाहिए

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि पीएम-किसान और नमो शेतकरी योजना  की पात्रता शर्तों में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि हर वास्तविक किसान को इन योजनाओं का लाभ मिल सके. उन्होंने यह भी मांग की कि पात्र किसानों की सभी लंबित किस्तें जल्द जारी की जाएं. संघ के राज्य कोर समिति सदस्य और नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने कहा कि जमीन पर खेती करने वाले किसान ही बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, बिजली, मजदूरी, ईंधन और अन्य कृषि कार्यों का पूरा खर्च उठाते हैं. ऐसे में सिर्फ भूमि रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक खेती करने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए.

वित्तीय सहायता से वंचित रखना उचित नहीं है

जयदीप भदाणे ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसानों को वित्तीय सहायता से वंचित रखना उचित नहीं है क्योंकि उनके नाम वर्ष 2019 के बाद भूमि रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं. उनका कहना है कि यह दोनों योजनाओं के मूल उद्देश्य के खिलाफ है, क्योंकि इनका मकसद जरूरतमंद किसानों को आर्थिक सहायता देना है. उन्होंने बताया कि कई किसानों ने जमीन कानूनी रूप से खरीदकर, विरासत में प्राप्त करके या पारिवारिक बंटवारे के जरिए हासिल की है. ये किसान सक्रिय रूप से खेती कर रहे हैं और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन तकनीकी नियमों के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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