Thresher machine safety: आज के समय में खेती केवल मेहनत का काम नहीं रह गई है, बल्कि मशीनों के सहारे चलने वाला एक पूरा सिस्टम बन चुकी है. खेत में हल चलाने से लेकर कटाई और गहाई तक, हर जगह मशीनों ने किसान की ताकत कई गुना बढ़ा दी है. थ्रेशर मशीन भी ऐसी ही एक जरूरी मशीन है, जिसने गहाई के काम को बहुत आसान बना दिया है. पहले जहां अनाज निकालने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब थ्रेशर की मदद से कुछ घंटों में यह काम पूरा हो जाता है.
लेकिन जितनी बड़ी मदद यह मशीन है, उतना ही बड़ा खतरा इसके गलत इस्तेमाल में छिपा हुआ है. हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से थ्रेशर मशीन से जुड़ी दर्दनाक दुर्घटनाओं की खबरें आती हैं. किसी का हाथ चला जाता है, किसी की उंगली कट जाती है और कई बार जान तक चली जाती है. अधिकतर मामलों में वजह मशीन नहीं, बल्कि जल्दबाजी, थकान और सुरक्षा नियमों की अनदेखी होती है. इसलिए जरूरी है कि थ्रेशर मशीन का इस्तेमाल समझदारी और सावधानी के साथ किया जाए.
थ्रेशर मशीन क्यों है जरूरी, लेकिन खतरनाक भी
थ्रेशर मशीन का मुख्य काम फसल से अनाज के दाने अलग करना होता है. गेहूं, धान, चना, सरसों जैसी फसलों की गहाई आज इसी मशीन से की जाती है. भारत में थ्रेशर मशीन का इस्तेमाल करीब 1950 के बाद शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह हर गांव का अहम हिस्सा बन गई. समय के साथ मशीनें ज्यादा ताकतवर और तेज होती गईं, जिससे काम तो आसान हुआ, लेकिन खतरे भी बढ़ गए.
थ्रेशर के अंदर लगे ड्रम, बेल्ट, पुली और पंखे बहुत तेज गति से घूमते हैं. अगर शरीर का कोई हिस्सा इनके पास चला जाए, तो संभलने का मौका तक नहीं मिलता. कई बार कपड़े फंस जाते हैं और व्यक्ति खुद मशीन की चपेट में आ जाता है. यही वजह है कि थ्रेशर को हमेशा “सावधानी की मशीन” माना जाना चाहिए.
हादसों की असली वजह क्या है
अधिकांश दुर्घटनाएं किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि मानवीय गलती से होती हैं. जल्दबाजी में अकेले फसल डालना, ऊंचे या असंतुलित स्थान पर खड़े होकर काम करना, थकान के बावजूद मशीन चलाते रहना ये सब हादसों की बड़ी वजहें हैं.
कई किसान ढीले कपड़े पहनकर थ्रेशर पर काम करने लगते हैं. धोती, गमछा या साड़ी का पल्लू मशीन में फंस जाए, तो गंभीर हादसा हो सकता है. इसके अलावा, कई बार मशीन के सुरक्षा कवर हटे होते हैं या बेल्ट-पुली खुले रहते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देते हैं.
सही थ्रेशर चुनना क्यों जरूरी है
हर थ्रेशर मशीन सुरक्षित नहीं होती. बाजार में सस्ती और बिना मानक वाली मशीनें भी मिल जाती हैं, जिनमें सुरक्षा इंतजाम ठीक नहीं होते. अच्छी थ्रेशर वही मानी जाती है, जिसमें फसल डालने का मुंह सही ऊंचाई पर हो, हाथ सीधे ड्रम तक न पहुंच सके और सभी घूमने वाले पुर्जे लोहे की जाली या कवर से ढके हों.
अगर मशीन में सुरक्षा कवच नहीं है या बेल्ट-पुली खुले हैं, तो उसे चलाना अपने आप को खतरे में डालने जैसा है. गहाई शुरू करने से पहले मशीन की पूरी जांच करना बहुत जरूरी है.
फसल डालते समय रखें पूरा ध्यान
थ्रेशर पर सबसे ज्यादा हादसे फसल डालते समय होते हैं. कई बार किसान अकेले ही जल्दी-जल्दी फसल डालने लगते हैं. सही तरीका यह है कि यह काम दो लोग मिलकर करें. एक व्यक्ति फसल को संभाले और दूसरा धीरे-धीरे मशीन में डाले.
जिस जगह खड़े होकर फसल डाली जा रही हो, वह जगह मजबूत और समतल होनी चाहिए. चारपाई, बोरे, टायर या फसल के ढेर पर खड़े होकर काम करना बहुत खतरनाक है. संतुलन बिगड़ते ही व्यक्ति मशीन की ओर गिर सकता है. हाथ या पैर से फसल को अंदर धकेलने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए.
थकान को नजरअंदाज न करें
कई हादसे तब होते हैं, जब किसान लगातार कई घंटे तक बिना रुके काम करता रहता है. थकान आने पर ध्यान कम हो जाता है और छोटी-सी गलती बड़ा नुकसान कर सकती है. इसलिए थ्रेशर पर बहुत लंबे समय तक लगातार काम न करें. बीच-बीच में आराम करें, पानी पिएं और अगर शरीर थका हुआ लगे तो काम रोक दें.
आग का खतरा भी रहता है
थ्रेशर के आसपास सूखी फसल और भूसा होता है. अगर मशीन के अंदर किसी पुर्जे से चिंगारी निकल जाए या बिजली के खुले तार हों, तो आग लग सकती है. इसलिए मशीन को ट्रांसफॉर्मर या बिजली की लाइन के नीचे नहीं लगाना चाहिए. खलिहान में धूम्रपान बिल्कुल नहीं होना चाहिए.
आग से बचाव के लिए पास में पानी और बालू की व्यवस्था रखना बहुत जरूरी है. मशीन शुरू करने से पहले यह देख लें कि कोई पुर्जा ढीला तो नहीं है, जिससे घर्षण पैदा हो.
सुरक्षा ही असली समझदारी है
थ्रेशर मशीन खेती का बड़ा सहारा है, लेकिन लापरवाही इसे जानलेवा बना सकती है. थोड़ी-सी सावधानी, सही मशीन का चुनाव और काम करने का सही तरीका कई जिंदगियां बचा सकता है. खेती तभी आगे बढ़ेगी, जब किसान सुरक्षित रहेगा. इसलिए गहाई करते समय जल्दबाजी नहीं, समझदारी और सतर्कता को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं.