बदलते जलवायु परिदृश्य और भूजल संरक्षण की चुनौती के बीच आधुनिक कृषि तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. यूपी के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने लीची की खेती में ड्रिप सिंचाई प्रणाली को देखा. उन्होंने कहा कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली न केवल पानी की खपत को कम किया है, बल्कि लीची उत्पादन और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है. इस तकनीक की मदद से किसानों का समय और पैसा दोनों के खर्च में भी कमी लाई है. जबकि, पौधों को कई घंटे तक पानी की आपूर्ति के साथ ही भरपूर नमी मिल रही है.
सीतापुर के अल्ट्रा हाई डेन्सिटी लीची बागों में पहुंचे उद्यान मंत्री
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के हरगांव विकास खंड के ग्राम खमौना में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने अल्ट्रा हाई डेन्सिटी लीची बागों का निरीक्षण कर किसानों से आधुनिक तकनीक के अनुभव साझा किए और इसे व्यापक स्तर पर अपनाने का आह्वान किया.
किसानों बोले पारंपरिक सिंचाई में ज्यादा पानी की खपत
मंत्री ने किसान प्रशांत मिश्रा के 1.3 हेक्टेयर तथा हरीश मिश्रा के 1.6 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित ड्रिप सिंचाई आधारित लीची बाग का निरीक्षण किया. किसानों ने बताया कि पहले पारंपरिक सिंचाई में अधिक पानी, समय और श्रम लगता था। खरपतवार की अधिकता के कारण उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था. ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने के बाद कम पानी में बेहतर सिंचाई संभव हुई है, खरपतवार पर नियंत्रण मिला है और पौधों में अच्छी फ्लावरिंग के साथ पहले की अपेक्षा अधिक फल उत्पादन प्राप्त हो रहा है.
लीची किसानों को इंटरक्रॉपिंग करने की सलाह
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने किसानों से ड्रिप सिंचाई संयंत्र की स्थापना, विभाग से प्राप्त अनुदान तथा इस तकनीक से होने वाले लाभों की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, लागत में कमी और अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है. उन्होंने किसानों को साफ-सफाई बनाए रखने और इंटरक्रॉपिंग पद्धति अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित करने की भी सलाह दी.

उद्यान मंत्री ने जमीनी हकीकत देखी.
ड्रिप सिंचाई योजना और सब्सिडी का प्रचार करेगा विभाग
मंत्री ने जिला उद्यान अधिकारी राजश्री को निर्देश दिए कि जन चौपालों के माध्यम से ड्रिप सिंचाई योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इस तकनीक का लाभ उठाकर अपनी खेती को लाभकारी बना सकें. उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण के लक्ष्य को भी प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है.