Land Survey: यूपी में अब जमीन की पैमाइश होगी हाईटेक, GNSS रोवर से 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक नाप

UP Land Survey: उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन को डिजिटल बनाने के लिए GNSS रोवर तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश में 504 में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंच चुके हैं और फील्ड सर्वे शुरू हो गया है. यह तकनीक जमीन की सीमा की 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 15 Sep, 2026 | 08:22 PM

UP Land Survey 2026: उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन का तरीका अब तेजी से बदल रहा है. योगी सरकार राजस्व विभाग के काम को ज्यादा तेज, आसान और पारदर्शी बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रही है. सरकार के मुताबिक प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और उनसे मौके पर जमीन की पैमाइश का काम शुरू हो गया है. इससे पुराने जंजीर और फीते से जमीन नापने के तरीकों पर निर्भरता कम होगी और जमीन की सही माप डिजिटल तरीके से दर्ज की जा सकेगी.

तहसीलों से शहरों तक हो रहा इस्तेमाल

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के मुताबिक, इन जीएनएसएस रोवर का इस्तेमाल सिर्फ गांवों या तहसीलों में ही नहीं हो रहा है. 350 रोवर तहसीलों में फील्ड सर्वे के लिए काम कर रहे हैं. इसके अलावा 143 रोवर 10 शहरी स्थानीय निकायों की नक्शा तैयार करने वाली परियोजनाओं में लगाए गए हैं. हरदोई के चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र को भी 2 रोवर दिए गए हैं. वहीं लेखपालों को इस नई तकनीक का इस्तेमाल सिखाने के लिए 9 रोवर खरीदे गए थे और उनका प्रशिक्षण पूरा हो चुका है. यानी सरकार सिर्फ मशीनें पहुंचाने पर ही जोर नहीं दे रही, बल्कि कर्मचारियों को इन्हें चलाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

सहारनपुर से शुरू हुआ था विशेष अभियान

जमीन की सीमा और पैमाइश से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने के लिए राजस्व विभाग ने धारा-24 के तहत 1 जुलाई से 15 अगस्त तक विशेष महाअभियान चलाया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी. अभियान को एक तय तरीके से चलाने के लिए राजस्व विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की थी. अब इसी काम में डिजिटल सर्वे तकनीक को जोड़ा गया है. इससे जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा ज्यादा व्यवस्थित तरीके से करने की कोशिश की जा रही है.

1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक होगी पैमाइश

जीएनएसएस रोवर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है. अधिकारियों के मुताबिक, यह मशीन सैटलाइट से मिलने वाले संकेतों की मदद से जमीन की सही स्थिति पता करती है. उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह करीब 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक जानकारी दे सकती है. जमीन की पैमाइश के दौरान उसकी सीमा के जरूरी बिंदुओं को दर्ज किया जाता है. इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर खुद दूरी और जमीन का क्षेत्रफल निकालता है और उसी के आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार हो जाता है. इससे हाथ से हिसाब लगाने की जरूरत कम होती है और जमीन की माप का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है.

फसल को नुकसान पहुंचाए बिना होगी नाप

खेतों की पैमाइश के दौरान अक्सर कर्मचारियों को कई बार खेत के अंदर जाना पड़ता है. इससे खड़ी फसल को नुकसान होने की आशंका रहती है. GNSS रोवर की मदद से अब इस परेशानी को भी कम किया जा सकता है. सरकार के मुताबिक, नाप के लिए खेत की सीमा के सिर्फ कुछ जरूरी बिंदुओं की डिजिटल रीडिंग लेनी होती है. इससे बार-बार खेत में चलने की जरूरत कम पड़ती है और किसान की फसल भी सुरक्षित रहती है.

कम होंगी गलतियां, बढ़ेगी पारदर्शिता

जमीन की पैमाइश डिजिटल तरीके से होने पर इंसानी गलती की गुंजाइश भी कम हो सकती है. कम कर्मचारियों की मदद से ज्यादा बड़े इलाके का सर्वे कम समय में किया जा सकता है. इससे समय और खर्च दोनों की बचत होने की उम्मीद है. डिजिटल सर्वे से तैयार जानकारी को भूमि रिकॉर्ड और जीआईएस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है. इससे जमीन से जुड़े पुराने और नए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना आसान होगा. जरूरत पड़ने पर अधिकारी किसी जमीन की पैमाइश और नक्शे से जुड़ी जानकारी दोबारा देख सकेंगे.

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Published: 15 Sep, 2026 | 08:22 PM