आदिवासी महिलाओं को लखपति बना रहा औषधि बोर्ड, 28 गांवों की कमाई बढ़ी.. खेत-बीज ट्रेनिंग और पैसा भी मिला
छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि 3 हजार औषधीय पौधों में से 1500 औषधीय पौधों का सर्वे हो चुका है और आदिवासी महिलाओं को समूहों में जोड़कर खेती कराई जा रही है. उनकी उपज बोर्ड खरीद रहा है, जिससे किसानों को बाजार में बिना भटके अच्छी कीमत मिल रही है और महिलाएं लखपति बन रही हैं.
छत्तीसगढ़ के दूर-दराज आदिवासी अंचलों में अब बदलाव की एक नई खुशबू फैल रही है. कभी सीमित संसाधनों और अनिश्चित कमाई में जीवन गुजारने वाली आदिवासी महिला किसान आज औषधीय खेती के जरिये आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही हैं. जंगलों और मिट्टी से उनका पारंपरिक रिश्ता अब वैज्ञानिक गाइडेंस के साथ कमाई का स्थायी साधन बन गया है. अश्वगंधा, शतावर, लेमनग्रास, पामारोजा जैसी औषधियों की खेती ने न सिर्फ उनकी कमाई बढ़ाई है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, सम्मान और भविष्य को लेकर भरोसा भी पैदा किया है. खेतों में उगती ये औषधियां अब सिर्फ फसल नहीं रहीं, बल्कि आदिवासी महिलाओं के सपनों, स्वाभिमान और बेहतर जीवन की उम्मीद का प्रतीक बन गई हैं.
अभाव में जी रहीं आदिवासी समाज की महिलाओं के जीवन को बेहतर करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कमर कस ली है. छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने महिलाओं को खेती के लिए वन विभाग की जमीन दी है. औषधीय खेती के लिए किसानों को मुफ्त बीज, पौधे, फर्टिलाइजर, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी दी गई है. कई खेती मॉडल को लागू करके कई जिलों की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के साथ ही कमाई करने वाला बना दिया है. अब महिलाएं खुद स्वयं सहायता समूह बनाकर अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं. धमतरी और महासमुंद जिले समेत अन्य जिलों में बोर्ड ने औषधीय पौधों की खेती के लिए कमर्शियल मॉडल, मिनी क्लस्टर मॉडल, पैडी डायवर्जन मॉडल, एकीकत खेती और बंजर भूमि को कमाई कराने वाली उपजाऊ भूमि बनाने का मॉडल लागू किया है.
महासमुंद के भनपुरी गांव में बनाया ट्रेनिंग सेंटर
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेएसीएस राव (JACS Rao) ने किसान इंडिया को बताया कि औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और वह आदिवासी समाज की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर लखपति बनाने के मिशन में जुटे हुए हैं. उनका बोर्ड आदिवासी महिलाओं को मुफ्त पौधे-बीज दे रहा है और वन विभाग की बंजर जमीन भी किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराई जा रही है. उनका बोर्ड और उससे जुड़े अधिकारी किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं और टेक्नोलॉजी भी उपलब्ध करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि महासमुंद जिले के बागबाहरा के भनपुरी गांव में बोर्ड ने ट्रेनिंग सेंटर बनाया है, जहां पर महिला समेत पुरुष किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए ट्रेनिंग दी जाती है.
- पीएम फसल बीमा योजना में बड़ा घोटाला, जालसाजों ने 5 करोड़ रुपये हड़पे.. 26 पर एक्शन और एक सस्पेंड
- प्रदूषण से 2022 में 17 लाख भारतीयों की मौत, पराली बनी वजह या कोई और है कारण, यहां जानिए
- आठवें वेतन आयोग से कितनी बढ़ेगी सैलरी? वेतन दोगुना होगा या भत्ते बढ़ेंगे.. जानिए पूरा गणित
- 60 फीसदी छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पा रही वित्तीय मदद, पैसा हासिल करना बन रहा चुनौती
100 एकड़ जमीन पर महिला किसान कर रहीं औषधीय खेती
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड अकेले धमतरी और महासमुंद जिले के 28 गांवों में किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए जोड़ा है. जबकि, 24 गांवों में इस सीजन का प्लांटेशन भी पूरा हो चुका है. इन गांवों में 1 लाख से ज्यादा औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं जबकि इस साल के आगामी जून माह तक 2 लाख औषधीय पौधों की रोपाई और की जाएगी. JACS Rao ने बताया कि 100 एकड़ जमीन पर औषधीय पौधों के खेती मॉडल को लागू किया जा चुका है. जबकि, पूरे प्रदेश में इसे लागू करने की तैयारियां चल रही हैं. उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे बंजर पड़ी जमीन, सरकारी पंचायती जमीन और वन विभाग बेकार पड़ी जमीनों पर महिला किसानों से कमाई कराने वाले औषधीय पौधों की खेती कराई जा रही है.
छत्तीसगढ़ मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के CEO JACS Rao महिला किसानों के साथ.
बंजर जमीन पर खस की खेती कर रहीं महिलाएं
महिला किसान रेनू छाबरा ने कहा कि वह एकीकृत खेती कर रही हैं और बोर्ड की ओर से उन्हें पौधे, बीज, खेती की ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी मिली है. उन्होंने बताया कि बोर्ड से बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ी हैं और खेती मॉडल को अपना रही हैं. धमतरी जिले के परखंडा गांव की महिला किसान मधु निर्मलकर ने बताया कि वह बंजर जमीन पर खस की खेती कर रही हैं. बोर्ड की मदद से सहायता समूह में जोड़ी गई महिलाओं को जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि हमारा गांव महानदी के किनारे है और यहां की ज्यादातर जमीन सामान्य फसलों लायक नहीं है. इसलिए यहां पर खस की खेती की जा रही है और इसकी जड़ों से तेल निकालकर इत्र बनाया जाता है, जिसे बोर्ड की ओर से निर्धारित एनजीओ या फर्म खरीदती हैं. जबकि, कम सिंचाई वाले इलाकों के लिए बोर्ड महिला किसानों को पामारोजा की खेती करा रहा है. इसका तेल बाजार में काफी महंगा बिकता है और इसकी खेती में बहुत कम पानी की जरूरत होती है.
आदिवासी महिलाएं कमा रहीं 1 लाख रुपये और बन रहीं लखपति – बोर्ड सीईओ
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ JACS Rao ने कहा कि महिला किसानों को लखपति बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जो महिलाएं एक एकड़ में खस की खेती कर रही हैं वे एक साल में कम से कम 1 लाख रुपये की कमाई हासिल कर पा रही हैं. जबकि, लागत के रूप में उन्हें केवल अपनी मेहनत करनी है. क्योंकि, खस के लिए पौधे और बीज की गांठें और खेती करने की ट्रेनिंग उनका बोर्ड मुफ्त में दे रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों की फसल कटाई के बाद उपज बोर्ड बायबैक मॉडल के जरिए खरीदता है, ताकि किसानों को उपज बिक्री के लिए बाजार या व्यापारियों के पास न भटकना पड़े. उन्होंने कहा कि बायबैक मॉडल के जरिए किसानों को निश्चित आय मिलना पक्का हुआ है, जिसकी वजह से महिला किसानों में औषधीय पौधों की खेती के लिए उत्साह बढ़ा है.
1500 औषधीय पौधों का सर्वे पूरा, जल्द इनकी खेती भी शुरू कराएंगे – बोर्ड अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष और राज्यमंत्री विकास मरकाम ने किसान इंडिया को बताया कि छत्तीसगढ़ में करीब 3 हजार औषधीय पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से 1500 औषधीय पौधों का सर्वे हो चुका है. जबकि, 33 औषधीय वनस्पतियों का बड़े स्तर पर व्यापार किया जा रहा है. इसका सालाना करीब 1 हजार टन है. बोर्ड का यह प्रयास है कि वन औषधियों और औषधि पौधों की खेती किसानों के जरिए कराई जा रही है. महिला सहकारिता समूह बनाकर महिलाओं को भी इससे जोड़ा जा रहा है, ताकि महिलाओं की कमाई को बढ़ाया जा सके और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सके. उन्होंने कहा कि इसके अलावा राज्य में वनस्तपतीय पौधों और औषधीय पौधों की टेस्टिंग लैब्स भी विकसित की जाएंगी और इस क्षेत्र में युवाओं को भी जोड़ा जाएगा.
छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम.
छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड की अनूठी पहल
- छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की राज्य के आदिवासी किसानों के लिए अनूठी पहल
- 28 से ज्यादा गांवों की महिलाओं को 100 एकड़ जमीन पर कराई जा रही औषधीय पौधों की खेती
- सीईओ JACS Rao के निर्देशन में किसानों के लिए सालाना 2 करोड़ पौधे तैयार कर रहा औषधि पादप बोर्ड
- राज्यभर में चलाया जा रहा खेती मॉडल और किसानों को मुफ्त उपलब्ध कराए गए पौधे, बीज, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी
- फसल बुवाई से लेकर कटाई तक किसानों को सरकार कर रही मदद
- अनिद्रा, थकान, तनाव, मधुमेह समेत कई गंभीर बीमारियों में पौधों से बचाव में मिल रही मदद
- तना, पत्ता और जड़ के अलावा छाल समेत तेल निकालकर की जा रही बिक्री
- बायबैक स्कीम के तहत किसानों से फसल उत्पादन खुद खरीद रहा बोर्ड, एनजीओ और फर्म
- बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर खेती कर रहीं आदिवासी महिलाओं की बढ़ रही आमदनी
- अश्वगंधा, सतावर, लेमनग्रास, पामारोजा, सर्पगंधा समेत कई औषधीय पौधों के उत्पादन पर छत्तीसगढ़ स्टेट मेडिसनल प्लांट्स बोर्ड का जोर