महाराष्ट्र के नासिक में किसानों का प्रदर्शन, इस वजह से नाराज हैं अन्नदाता
महाराष्ट्र के नासिक जिले में आदिवासी किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं. AIKS के बैनर तले किसान FRA के तहत जमीन का कब्जा, सरकारी योजनाओं का लाभ और सिंचाई सुविधाएं मांग रहे हैं. प्रशासन ने उनकी मांगें सुनकर उच्च स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है.
Agriculture News: महाराष्ट्र के नासिक जिले के आदिवासी इलाकों के किसान अपनी कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के बैनर तले किसान अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं और उन्होंने नासिक से गुजरात जाने वाले प्रमुख रास्तों को जाम कर दिया है. हालात को संभालने के लिए प्रशासन ने यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया है, ताकि दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही बनी रहे.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, AIKS के पदाधिकारी इरफान शेख ने कहा कि किसानों की मुख्य मांग है कि उन्हें वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आवंटित की गई जमीन का वास्तविक कब्जा मिले. जिन किसानों को पहले ही जमीन मिल चुकी है, उन्हें शेतकरी सम्मान योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए. साथ ही, जमीन मालिकों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएं.
नदी जोड़ो और जल-वितरण परियोजनाएं चल रही हैं
इस आंदोलन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जिला सचिव इंद्रजीत गावित ने कहा कि नासिक जिले से जुड़ी कई नदी जोड़ो और जल-वितरण परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन इसका लाभ स्थानीय किसानों तक नहीं पहुंच रहा है. किसानों का कहना है कि उनकी उपेक्षा हो रही है. आंदोलन कर रहे किसान जिले के अलग-अलग तालुका मुख्यालयों और प्रमुख बाजार क्षेत्रों में धरने पर बैठे हैं. इनमें वणी- सापुतारा रोड पर बोरगड, नासिक- धरमपुर रोड पर बरहे, पेट, हरसुल, त्र्यंबकेश्वर, दिंडोरी और सुरगाणा जैसे इलाके शामिल हैं.
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किसान एक बार फिर मुंबई तक लंबा मार्च करेंगे
सोमवार को कलेक्टरेट में किसानों की मांगों को लेकर एक बैठक हुई, जिसमें अतिरिक्त कलेक्टर हेमांगी पाटिल और देवदत्त केकन ने किसानों की समस्याएं सुनीं. किसानों का नेतृत्व पूर्व विधायक जे.पी. गावित, इरफान शेख और अन्य राजनीतिक प्रतिनिधियों ने किया. पूर्व विधायक जे.पी. गावित ने बताया कि बैठक में किसानों से जुड़े मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे गए. उन्होंने यह भी कहा कि नासिक से मुंबई तक किसानों द्वारा निकाली गई दो लंबी पदयात्राओं के दौरान जो वादे और आश्वासन दिए गए थे, उन पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. गावित ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो किसान एक बार फिर मुंबई तक लंबा मार्च करेंगे.
प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना
जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने कहा कि प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना है. उन्होंने बताया कि किसानों की अधिकतर मांगें नीतिगत स्तर से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. साथ ही प्रशासन ने आंदोलनकारियों से सड़कों को जाम न करने और यातायात में बाधा न डालने की अपील की, जिस पर किसानों ने सहयोग का आश्वासन दिया है.