WMO की चेतावनी: इस साल अल नीनो से कमजोर पड़ सकता है मानसून, बढ़ सकती है भीषण गर्मी

El Nino 2026: भारतीय मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रह सकता है. जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना जताई गई है.

नई दिल्ली | Updated On: 12 Mar, 2026 | 10:56 AM

El Nino 2026: भारत में आने वाले महीनों का मौसम सामान्य से अलग हो सकता है. विश्व मौसम संगठन (WMO) की हालिया रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि इस साल के दूसरे हिस्से में अल नीनो विकसित होने की संभावना बन रही है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के साल में अक्सर बारिश कम होती है और गर्मी अधिक महसूस होती है. हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन मौसम वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं.

मार्च से मई के बीच बढ़ सकती है गर्मी

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, मार्च से मई के बीच दुनिया के कई हिस्सों में जमीन का तापमान सामान्य से अधिक रहने के संकेत मिल रहे हैं. भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. देश के कई राज्यों में पहले से ही हीटवेव और भीषण गर्मी के हालात बनने लगे हैं.

भारतीय मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रह सकता है. जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना जताई गई है. वहीं दिल्ली-एनसीआर, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाके, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी तापमान 4 से 6 डिग्री तक ज्यादा रह सकता है. दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले कुछ दिनों तक तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री ज्यादा रहने का अनुमान है.

क्या होता है अल नीनो और क्यों पड़ता है असर

अल नीनो एक वैश्विक मौसम प्रणाली है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवा के दबाव, हवाओं की दिशा और बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं.

भारत जैसे मानसून आधारित देश में अल नीनो का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. आमतौर पर अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इसके उलट ला नीना की स्थिति में भारत में अच्छी बारिश देखने को मिलती है.

जून तक साफ होगी स्थिति

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल अल नीनो के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. इस समय जो अनुमान लगाए जा रहे हैं उनके मुताबिक सीजन के दूसरे हिस्से में मध्यम स्तर का अल नीनो विकसित हो सकता है. हालांकि अभी इसमें काफी अनिश्चितता बनी हुई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जून तक स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी. इसलिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है.

खेती और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर

अगर अल नीनो का असर मजबूत रहता है तो इसका प्रभाव सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. भारत की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. ऐसे में कमजोर मानसून से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इससे खाद्य उत्पादन, पानी की उपलब्धता और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है.

विश्व मौसम संगठन का कहना है कि अल नीनो और ला नीना जैसी मौसमी भविष्यवाणियां कई क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं. इनकी मदद से कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में पहले से तैयारी की जा सकती है और संभावित आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है.

पहले भी दिख चुका है अल नीनो का असर

हाल के वर्षों में अल नीनो के प्रभाव ने वैश्विक तापमान को भी प्रभावित किया है. 2023-24 का अल नीनो रिकॉर्ड के सबसे मजबूत अल नीनो में से एक था, जिसने दुनिया भर में तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी. इसी वजह से वैज्ञानिक इस बार भी मौसम के हर संकेत पर नजर रख रहे हैं. अगर अल नीनो सक्रिय होता है तो आने वाले महीनों में गर्मी के तेवर और भी तेज हो सकते हैं और मानसून की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है.

Published: 12 Mar, 2026 | 10:53 AM

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