Monsoon 2026: देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब लोगों की नजर मानसून पर टिकी हुई है. इसी बीच मौसम विभाग ने मानसून 2026 को लेकर राहत भरी खबर दी है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून समय पर अंडमान सागर में दस्तक दे सकता है. विभाग का अनुमान है कि मानसून 20 मई के आसपास अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पहुंच जाएगा.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं. कई राज्यों में गरज-चमक और बारिश देखने को मिल रही है. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने लगी है.
20 मई के आसपास अंडमान सागर पहुंचेगा मानसून
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 14 से 20 मई के बीच दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत होने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि मई के तीसरे सप्ताह में बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के आसपास दक्षिण-पश्चिमी हवाएं मजबूत होने लगेंगी. यही हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं. अगर मौसम की स्थितियां सामान्य रहीं, तो मानसून तय समय पर आगे बढ़ता हुआ जून की शुरुआत तक केरल पहुंच सकता है.
दक्षिण भारत में बढ़ीं प्री-मानसून गतिविधियां
इस समय दक्षिण भारत के कई राज्यों में प्री-मानसून बारिश हो रही है. केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा रही है. कई जगहों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश भी हो रही है. मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 14 से 20 मई के बीच दक्षिण भारत में कई स्थानों पर भारी बारिश देखने को मिल सकती है. बारिश की वजह से तापमान में गिरावट आ रही है और लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है.
केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की भी संभावना जताई गई है. मछुआरों और समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
इस बार मानसून पर अल नीनो का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मानसून पर प्रशांत महासागर में बन रही अल नीनो की स्थिति का असर देखने को मिल सकता है. अल नीनो ऐसी जलवायु स्थिति होती है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ जाता है और इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है. भारत में कई बार एल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश दर्ज की जाती है. इसी वजह से मौसम विभाग ने अप्रैल में अनुमान जताया था कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.
सामान्य से कम रह सकती है बारिश
मौसम विभाग के अनुसार 2026 में पूरे देश में औसतन बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. विभाग ने कहा है कि इस साल मानसून के दौरान देश में लगभग 92 प्रतिशत बारिश हो सकती है. यह आंकड़ा 1971 से 2020 के लंबे औसत के आधार पर तैयार किया गया है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में समुद्री परिस्थितियों और हवाओं की स्थिति को देखते हुए अनुमान में बदलाव भी हो सकता है.
भारत के लिए क्यों अहम है मानसून?
भारत की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. देश में सालभर होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से मिलता है. मानसून अच्छा रहने पर खेती, जलाशय, बिजली उत्पादन और पेयजल व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ता है. वहीं कमजोर मानसून से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.
हर साल कितनी होती है बारिश?
आमतौर पर भारत में मानसून सीजन के दौरान करीब 880 मिलीमीटर बारिश होती है. यह चार महीने का समय देश की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों की नजर अब मानसून की प्रगति पर बनी हुई है क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर ही निर्भर करती है.
किसानों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून समय पर पहुंचना किसानों के लिए राहत की बात है. हालांकि बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका को देखते हुए किसानों को पानी प्रबंधन और फसल चयन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है. जहां सिंचाई की सुविधा कम है, वहां कम पानी वाली फसलों पर जोर देने की बात कही जा रही है.
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है बारिश
मौसम विभाग के अनुसार मई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. अगर समुद्री हवाएं मजबूत बनी रहीं तो मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ सकता है. फिलहाल देशभर में लोग भीषण गर्मी के बीच मानसून के इंतजार में हैं और मौसम विभाग के इस अपडेट ने कुछ राहत जरूर दी है.