पूरे देश में पहुंचा मानसून, जुलाई में 38 फीसदी अधिक बारिश..फसलों की बुवाई में आएगी तेजी

दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई को पूरे देश में पहुंच गया है, जो सामान्य से सिर्फ एक दिन देरी से है. जुलाई की अच्छी बारिश से खरीफ बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है. हालांकि, 5 जुलाई तक बुवाई पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी कम रही है. IMD के अनुसार, 1 जून से 9 जुलाई तक देश में 14 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 10 Jul, 2026 | 08:29 AM

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई को पूरे भारत में पहुंच गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून इस बार सामान्य तारीख 8 जुलाई की तुलना में सिर्फ एक दिन देरी से पूरे देश में फैला है. हालांकि इसकी शुरुआत केरल में 4 जून को हुई थी, जो सामान्य से तीन दिन देर थी. पिछले चार वर्षों में मानसून सामान्य समय से पहले पूरे देश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार शुरुआत में देरी हुई. इसके बावजूद जुलाई के पहले नौ दिनों में देश में 38 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है. इससे खरीफ फसलों की बुवाई को रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

दरअसल, जून महीने में देश में 37 फीसदी कम बारिश हुई थी, जिससे खरीफ बुवाई प्रभावित  हुई थी. अब अच्छी बारिश होने से किसानों को राहत मिलने की संभावना है और बुवाई में तेजी आ सकती है. IMD ने बताया कि 9 जुलाई को मानसून ने उत्तर अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों को भी कवर कर लिया. इसके साथ ही मानसून ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है. मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश का सिलसिला जारी रहने पर खेती को और फायदा मिलेगा.

कब-कब देर से पहुंचा मानसून

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, साल 2000 के बाद सिर्फ छह बार ऐसा हुआ है जब मानसून जून महीने में ही पूरे देश में पहुंच गया. सबसे जल्दी मानसून 16 जून 2013 को पूरे देश में पहुंचा था. उस साल पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 106 फीसदी बारिश हुई थी. वहीं, सबसे ज्यादा देरी 2002 में हुई थी, जब मानसून 15 अगस्त को पूरे देश में पहुंचा था. उस साल पूरे सीजन में 19 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी. इस साल IMD ने जून से सितंबर के मानसून सीजन में सामान्य से 90 फीसदी (यानी 10 फीसदी कम) बारिश होने का अनुमान जताया है.

अब तक 14 फीसदी कम बारिश

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 9 जुलाई के बीच देश में 204.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 239.1 मिमी होती है. यानी अब तक देश में 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

कहां कितनी कम बारिश हुई

  • पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 38 फीसदी कम बारिश हुई है.
  • उत्तर-पश्चिम भारत में 9 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई.
  • मध्य भारत में सामान्य से 3 फीसदी ज्यादा बारिश हुई.
  • दक्षिण भारत में 15 फीसदी कम बारिश हुई है.

इस दौरान 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य से कम बारिश हुई है. इनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल और असम प्रमुख हैं. IMD ने यह भी बताया कि पहले जून महीने में बारिश की कमी 40 फीसदी बताई गई थी, लेकिन बाद में सभी इलाकों के आंकड़े मिलने के बाद इसे संशोधित कर 37 फीसदी कर दिया गया.

खरीफ फसलों की बुवाई 350.85 लाख हेक्टेयर में हुई

वहीं, कृषि मंत्रालय के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 350.85 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 442.80 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी. यानी इस बार अब तक 21 फीसदी कम क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. हालांकि, जुलाई मानसून का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना माना जाता है. इसी महीने किसान सबसे अधिक बुवाई करते हैं, ताकि खरीफ की अच्छी फसल मिल सके और नवंबर से पहले खेत रबी फसलों की बुवाई के लिए तैयार हो जाएं.

फसलों की बुवाई में मौजूदा बारिश से तेजी आएगी

पूर्व कृषि आयुक्त जे. एस. संधू का कहना है कि धान को छोड़कर ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई में मौजूदा बारिश से तेजी आएगी. धान की रोपाई वैसे भी अगस्त के आखिर तक चलती रहती है, इसलिए किसानों के पास अभी पर्याप्त समय है. उन्होंने कहा कि हाल की अच्छी बारिश से जलाशयों और तालाबों में पानी बढ़ेगा, जिससे जुलाई में सिंचाई की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी. अगर इस महीने कुछ दिनों तक बारिश कम भी होती है, तो भी खेती पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है.

 

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Published: 10 Jul, 2026 | 08:22 AM

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