पशुपालन विभाग में करोड़ों का गबन कर गया खजांची.. जांच में खुलासे ने उड़ा दी अफसरों की नींद, पढ़ें पूरा मामला

Jharkhand Animal Dept Treasury Fraud: झारखंड पशुपालन विभाग में वेतन मद से अवैध निकासी का बड़ा मामला सामने आया है. जांच में खुलासा हुआ कि लेखापाल लंबे समय से रिकॉर्ड में हेराफेरी कर लाखों रुपये निकाल रहा था. नए निदेशक की जांच के बाद मामला खुला, आरोपी को हटाकर आगे कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 Apr, 2026 | 02:29 PM

Animal Husbandry Scam: झारखंड में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामलों की चर्चा अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब पशुपालन विभाग से भी एक बड़ा वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आ गया है. झारखंड पशुपालन विभाग के अनुसार इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (IAHP) में तैनात लेखापाल मुनिंद्र कुमार पर वेतन में हर महीने लाखों रुपये की अवैध निकासी का गंभीर आरोप लगा है. शुरुआती जांच में सामने आया कि उनका असली वेतन करीब 55 हजार रुपये था, लेकिन हेराफेरी कर के वे साल 2022 के पहले से हर महीने 3 लाख रुपये से ज्यादा निकाल रहे थे. मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और आरोपी को पद से हटा दिया गया है.

2022 से चल रहा था वेतन निकासी का खेल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच में पता चला कि यह पूरा खेल वित्तीय वर्ष 2022-23 से लगातार चल रहा था. मुनिंद्र कुमार वेतन भुगतान के दौरान  बेहद शातिर तरीके से रिकॉर्ड में बदलाव करते थे. बताया गया कि वे रोकड़ बही (Cash Book) में सही राशि दर्ज करते थे, ताकि कागजों पर सब कुछ सामान्य दिखे. इसके बाद अधिकारियों से उसी सही राशि पर हस्ताक्षर करा लेते थे. लेकिन असली गड़बड़ी तब होती थी जब वही डेटा कंप्यूटर सिस्टम में फीड किया जाता था. आरोप है कि मुनिंद्र वहां राशि बदलकर कई गुना ज्यादा रकम दर्ज कर देते थे, जिससे हर महीने लाखों रुपये अतिरिक्त उनके खाते में चले जाते थे. यही वजह रही कि लंबे समय तक किसी को इस गड़बड़ी की भनक नहीं लगी.

कंप्यूटर फीडिंग में हेराफेरी कर निकाले लाखों

विभागीय जानकारी के अनुसार, गबन का तरीका बेहद चालाकी भरा था. कागज पर सब कुछ सही दिखता था, लेकिन कंप्यूटर एंट्री में रकम बदल दी जाती थी. कई बार मुनिंद्र कुमार शाम के समय अधिकारियों पर ये कहकर जल्दी हस्ताक्षर करने का दबाव बनाते थे कि ट्रेजरी बंद होने वाली है. जल्दबाजी में अधिकारी रिकॉर्ड को विस्तार से जांच नहीं पाते थे. इसी का फायदा उठाकर कंप्यूटर में गलत राशि डालकर वेतन मद से लाखों रुपये की अवैध निकासी की जाती  रही. विभाग के मुताबिक यह सिर्फ साधारण गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी वित्तीय हेराफेरी का मामला है, जिसमें मिलीभगत की भी जांच की जा रही है.

लग्जरी लाइफस्टाइल और 4 कारों से बढ़ा शक

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी की लग्जरी लाइफस्टाइल रही. संस्थान के नए निदेशक देवनाथ चौरसिया ने जब 1 सितंबर 2025 को पदभार संभाला, तभी से उन्हें मुनिंद्र कुमार के रहन-सहन पर शक होने लगा था. जानकारी के मुताबिक मुनिंद्र अक्सर शराब पीकर ऑफिस आते थे और सहकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार भी करते थे. सबसे बड़ी बात यह थी कि एक साधारण लेखापाल के पास 3 से 4 लग्जरी कारें थीं और उनका जीवन स्तर बेहद खर्चीला था. यही बात निदेशक को खटक गई. इसके बाद जब बैंक स्टेटमेंट और रोकड़ बही का मिलान शुरू हुआ, तो करोड़ों रुपये के घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुलने लगीं.

जांच कमेटी बनी, रिपोर्ट के बाद पद से हटाया गया

मामले की गंभीरता को देखते हुए निदेशक देवनाथ चौरसिया ने तुरंत तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया. कमेटी ने दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और वेतन रिकॉर्ड की जांच की. रिपोर्ट में अवैध वेतन निकासी की पुष्टि होने के बाद 2 मार्च 2026 को मुनिंद्र कुमार को लेखापाल पद से हटा दिया गया. झारखंड पशुपालन विभाग  के अनुसार इस पूरे मामले की लिखित शिकायत विभाग के सचिव और पशुपालन निदेशक को भेज दी गई है. साथ ही आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है. फिलहाल विभाग अब ये भी जांच कर रहा है कि इस गड़बड़ी में कोई और कर्मचारी शामिल था या नहीं.

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