सरकार का बड़ा फैसला! एक्सपोर्ट बैन के बीच अमेरिका को भेजी जाएगी 8,606 टन कच्ची चीनी

भारत सरकार ने इस समय देश में चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है. यह प्रतिबंध 30 सितंबर तक लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया है. दरअसल, अगर बड़े पैमाने पर चीनी निर्यात की अनुमति दी जाती तो घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ सकती थीं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 25 May, 2026 | 08:42 AM

Raw sugar export to US: केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग से जुड़ा बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिका को 8,606 टन कच्ची गन्ना चीनी के निर्यात की अनुमति दी है. यह निर्यात टैरिफ रेट कोटा (TRQ) योजना के तहत किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों और उद्योग जगत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि फिलहाल देश में सामान्य चीनी निर्यात पर रोक लगी हुई है.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह निर्यात 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा. सरकार ने साफ किया है कि यह अनुमति केवल अमेरिका के लिए तय कोटे के तहत दी गई है. इसके अलावा अन्य देशों के लिए चीनी निर्यात पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेगा.

क्यों दी गई अमेरिका को निर्यात की अनुमति?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौतों के तहत हर साल कुछ निश्चित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी जाती है. इसे टैरिफ रेट कोटा योजना कहा जाता है. इस योजना के तहत तय सीमा तक कम शुल्क पर चीनी निर्यात की जा सकती है. सरकार ने इसी व्यवस्था के तहत 8,606 मीट्रिक टन कच्ची गन्ना चीनी के निर्यात को मंजूरी दी है. हालांकि यह मात्रा कुल उत्पादन के मुकाबले काफी कम मानी जा रही है, लेकिन उद्योग के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

देश में चीनी निर्यात पर क्यों लगी रोक?

भारत सरकार ने इस समय देश में चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है. यह प्रतिबंध 30 सितंबर तक लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया है.

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण सरकार महंगाई को लेकर सतर्क है. ऐसे में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को काबू में रखना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है.

दरअसल, अगर बड़े पैमाने पर चीनी निर्यात की अनुमति दी जाती तो घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ सकती थीं. इसी वजह से सरकार ने फिलहाल निर्यात पर नियंत्रण बनाए रखा है.

उद्योग जगत ने जताई चिंता

चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और कारोबारियों ने सरकार के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि अचानक लगाए गए प्रतिबंध से चीनी मिलों और किसानों पर असर पड़ सकता है. उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि निर्यात बंद होने से घरेलू बाजार में चीनी की अधिक सप्लाई हो जाएगी, जिससे कीमतें गिर सकती हैं. इसका सीधा असर किसानों और चीनी मिलों की आय पर पड़ सकता है. कई मिलों पर पहले से ही भारी कर्ज का दबाव बना हुआ है.

पारदर्शी मूल्य निर्धारण की मांग तेज

CNBC की खबर के अनुसार, चीनी उद्योग अब सरकार से पारदर्शी मूल्य निर्धारण व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहा है. डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज के शुगर और एथेनॉल बिजनेस के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कपिल नेमा का कहना है कि गन्ने की कीमत, चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और एथेनॉल की दरों को एक-दूसरे से जोड़कर तय किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि खेती और उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में उद्योग को स्थिर और पारदर्शी नीति की जरूरत है.

किसानों की नजर सरकार के अगले फैसले पर

देश के लाखों गन्ना किसान अब सरकार की अगली नीति का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि अगर चीनी की कीमतें गिरती हैं तो इसका असर सीधे उनकी आय पर पड़ेगा. वहीं उद्योग जगत चाहता है कि सरकार घरेलू जरूरतों और निर्यात के बीच संतुलन बनाकर फैसला ले. फिलहाल अमेरिका को सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति मिलने से उद्योग को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है.

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