भारत-चीन व्यापार में तनाव गहराया, GMO विवाद के बाद 3 चावल कंपनियों के लाइसेंस रद्द

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब कुछ हफ्ते पहले ही चीन ने इन कंपनियों के चावल के शिपमेंट को GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) के कथित अंश मिलने के कारण खारिज कर दिया था. अब इस फैसले ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 18 Apr, 2026 | 07:39 AM

China India rice trade dispute: भारत और चीन के बीच चावल व्यापार को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने निर्यातकों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है. चीन ने भारत की तीन चावल निर्यात करने वाली कंपनियों के आयात लाइसेंस रद्द कर दिए हैं. यह फैसला 17 अप्रैल से लागू कर दिया गया है.

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब कुछ हफ्ते पहले ही चीन ने इन कंपनियों के चावल के शिपमेंट को GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) के कथित अंश मिलने के कारण खारिज कर दिया था. अब इस फैसले ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

किन कंपनियों पर कार्रवाई

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, चीन की इस कार्रवाई से NM FoodImpex Pvt. Ltd., Shriram Food Industry Ltd और Sponge Enterprises Pvt Ltd प्रभावित हुई हैं. इन कंपनियों को अब चीन को चावल निर्यात करने की अनुमति नहीं होगी. इस फैसले की जानकारी चीन में मौजूद भारतीय दूतावास ने भारत की कृषि निर्यात प्रोत्साहन संस्था APEDA को दी, जिसके बाद इन कंपनियों को सूचित किया गया.

GMO को लेकर विवाद क्यों?

चीन ने आरोप लगाया है कि भारतीय चावल में GMO के अंश पाए गए हैं. लेकिन इस दावे पर सवाल भी उठ रहे हैं. भारत में कपास को छोड़कर किसी भी GM फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है. यानी चावल में GMO होना अपने आप में संदेह पैदा करता है.

इसके अलावा जिन शिपमेंट को चीन ने खारिज किया, उन्हें पहले China Certification & Inspection Group (CCIC) ने जांच कर पास कर दिया था. इससे भी चीन के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

भारत सरकार क्या कर सकती है?

खबर के मुताबिक, अगर चीन ने यह रोक जारी रखी तो भारत भी जवाबी कदम उठा सकता है. सरकार का मानना है कि जिस आधार पर यह कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह से कानूनी रूप से मजबूत नहीं है. इसी वजह से प्रभावित कंपनियों ने इस मामले को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और APEDA से संपर्क किया है और चीन के साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है.

निर्यात के आंकड़े क्या बताते हैं

भारत से चीन को नॉन-बासमती चावल का निर्यात पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. 2024-25 में भारत ने चीन को 1,80,805 टन चावल निर्यात किया, जिसकी कीमत 79.43 मिलियन डॉलर रही. वहीं 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के बीच यह मात्रा बढ़कर 1,86,013 टन हो गई, हालांकि कीमत घटकर 65.59 मिलियन डॉलर रह गई. यह भी दिलचस्प है कि 2019-20 में यह निर्यात सिर्फ 567 टन था, लेकिन 2020-21 में चीन द्वारा पाबंदियां हटाने के बाद यह बढ़कर 3,31,571 टन तक पहुंच गया.

चीन की मांग और उत्पादन भी बढ़ रहा

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, 2025-26 में चीन का चावल आयात 3.1 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल 2.3 मिलियन टन था. साथ ही चीन का उत्पादन भी 145.3 मिलियन टन से बढ़कर 146.3 मिलियन टन होने का अनुमान है. यानी चीन में चावल की मांग भी बढ़ रही है और उत्पादन भी, जिससे व्यापार के अवसर बने हुए हैं.

पहले भी उठा था ऐसा विवाद

GMO को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. साल 2006 में यूरोपीय संघ ने भी चीन के चावल में GMO के अंश मिलने का मुद्दा उठाया था. इसलिए भारतीय उद्योग के लोग चीन के इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मान रहे हैं.

इस फैसले से भारत के चावल निर्यात पर असर पड़ सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो चीन पर निर्भर हैं. अगर यह मामला जल्दी नहीं सुलझा, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है. हालांकि अगर दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल लेते हैं, तो स्थिति सामान्य भी हो सकती है.

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