India inflation Explainer: देश में चुनाव खत्म होने के बाद महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. पेट्रोल-डीजल, दूध, ब्रेड, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि थोक महंगाई साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत में साफ दिखाई दे रहा है. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में महंगाई सबसे ज्यादा दर्ज की गई है, जबकि आम लोगों का घरेलू बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है.
आम लोगों का कहना है कि घर का बजट अब पहले जैसा संभालना मुश्किल होता जा रहा है. हर हफ्ते किसी न किसी जरूरी चीज की कीमत बढ़ने से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ रहा है.
महंगाई को लेकर मोदी सरकार पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव खत्म होने तक ईंधन की कीमतें जानबूझकर नहीं बढ़ाईं और चुनाव के तुरंत बाद दाम बढ़ा दिए. उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई की वजह से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है. खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार में दूरदृष्टि की कमी है और इसी वजह से देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है.
अगर PM मोदी चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल समेत बाक़ी चीजों की कीमतें बढ़ा देते तो उन्हें बड़ा नुकसान होता।
मोदी सरकार ने चुनाव तक सभी बातों को देश से छिपाकर रखा, लेकिन जब चुनाव ख़त्म हो गए तो सभी चीजों की क़ीमतें बढ़ गईं।
BJP सरकार और मोदी जी में दूरदर्शिता में कमी है।
हम इस… pic.twitter.com/JBOa1WI1JC
— Mallikarjun Kharge (@kharge) May 18, 2026
सिर्फ विपक्ष ही नहीं, आम जनता को 4 राज्यों के चुनाव के नतीजे आने के बाद महंगाई का इतना बड़ा झटका लगेगा इसका अंदाजा नहीं था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार चुनाव के रिजल्ट आने तक का इंतजार कर रही थी, क्यों अगर पहले ही रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ा दिए जाते तो, इसका सीधा असर चुनाव के नतीजों पर पड़ता. तो चलिए समझते हैं आखिर देश में आचानक हर तरफ से महंगाई की बाढ़ कैसे आ रही है.
आखिर अचानक क्यों बढ़ रही है महंगाई?
महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और युद्ध माना जा रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं.
पहले जहां कच्चा तेल करीब 67 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है. इसका सीधा असर भारत पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. जब तेल महंगा होता है तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही महंगा नहीं होता, बल्कि ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से हर चीज की कीमत बढ़ने लगती है.
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से लोगों की सबसे ज्यादा चिंता बढ़ी है. पहले 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई और फिर कुछ दिनों बाद करीब 90 पैसे और दाम बढ़ा दिए गए. अब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 99 रुपये और डीजल 92 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच चुका है. अगर कोई व्यक्ति हर महीने 50 लीटर पेट्रोल इस्तेमाल करता है तो सिर्फ इस बढ़ोतरी से उसका खर्च करीब 150 रुपये तक बढ़ जाएगा. लेकिन असली असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा होता है. ट्रकों का किराया बढ़ेगा, बसों का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जियों से लेकर कपड़े और दवाइयों तक सब महंगे होने लगेंगे.
दूध के बाद अब ब्रेड भी महंगी
भारत में लगभग हर घर में दूध और ब्रेड रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं. ऐसे में इनके दाम बढ़ना सीधे रसोई के बजट पर असर डाल रहा है. अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं. वहीं मॉडर्न ब्रेड ने भी ब्रेड के दाम 5 रुपये प्रति पैकेट बढ़ा दिए हैं. जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में दूसरी ब्रेड कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं. ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाला आटा, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट सभी महंगे हो चुके हैं. ऐसे में बेकरी उत्पादों के दाम और बढ़ने की आशंका है.
सीएनजी और गैस सिलेंडर ने भी बढ़ाया बोझ
दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में सीएनजी के दाम भी बढ़ चुके हैं. इससे ऑटो और टैक्सी का किराया बढ़ सकता है. रोज ऑफिस जाने वाले लोगों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा. वहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम करीब 1000 रुपये तक बढ़ गए हैं. दिल्ली में 19 किलो वाला कॉमर्शियल सिलेंडर 3071 रुपये से ज्यादा का हो गया है. घरेलू एलपीजी सिलेंडर भी पहले महंगा हो चुका है.
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित होने से गैस की कमी जैसी स्थिति बन रही है. कई देशों में गैस की मांग बढ़ गई है, जबकि सप्लाई पहले जैसी नहीं हो पा रही. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का असर सीधे देश में दिखाई दे रहा है.
गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और छोटे फूड बिजनेस का खर्च भी बढ़ रहा है. इसका असर अब बाहर मिलने वाले खाने-पीने की चीजों पर भी दिखाई देने लगा है.
खाने-पीने की चीजें भी तेजी से हो रहीं महंगी
महंगाई अब रसोई तक पूरी तरह पहुंच चुकी है. दाल, आटा, तेल, चीनी और सब्जियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कई जरूरी चीजों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं. टमाटर, फूलगोभी और नारियल जैसी चीजों की कीमतों में बड़ी तेजी आई है.
खाने के तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में तेल विदेशों से आयात करता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ीं तो आने वाले दिनों में रसोई का खर्च और बढ़ सकता है.
सोना-चांदी खरीदना हुआ मुश्किल
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है. इसके बाद सोने की कीमत एक ही दिन में हजारों रुपये बढ़ गई. अब 10 ग्राम सोना 1.60 लाख रुपये के पार पहुंच गया है. इससे शादी-ब्याह और निवेश करने वाले लोग परेशान हैं.
दवाइयां भी हो सकती हैं महंगी
महंगाई का असर अब मेडिकल सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है. दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत तेजी से बढ़ रही है. पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवाओं का कच्चा माल 250 रुपये से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में दवाइयां और मेडिकल उपकरण महंगे हो सकते हैं.
रुपया कमजोर होने से बढ़ी चिंता
डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है. जब रुपया कमजोर होता है तो विदेशों से सामान खरीदना और महंगा पड़ता है. उदाहरण के तौर पर अगर पहले 1 डॉलर खरीदने के लिए 83 रुपये देने पड़ते थे और अब 96 रुपये देने पड़ रहे हैं, तो आयात करने वाली कंपनियों का खर्च अपने आप बढ़ जाता है. बाद में यही बढ़ा हुआ खर्च आम लोगों से वसूला जाता है. यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल, गैस, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाइयां और यहां तक कि खाने-पीने की चीजें भी महंगी होने लगती हैं.
आने वाले समय में और बढ़ सकती है महंगाई
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो महंगाई और बढ़ सकती है. पेट्रोल-डीजल में अभी और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा साबुन, शैंपू, बिस्किट, कपड़े, जूते और रोजमर्रा के अन्य सामान भी महंगे हो सकते हैं. कुछ कंपनियां सीधे कीमत बढ़ाने की बजाय पैकेट का वजन कम करने की तैयारी भी कर सकती हैं.
आम आदमी क्या करे?
फिलहाल लोगों को अपने खर्चों को संभालकर चलना होगा. गैरजरूरी खर्च कम करने और बजट बनाकर खर्च करने की जरूरत है. क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में महंगाई का असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है. फिलहाल देशभर के लोगों की नजर सरकार और अंतरराष्ट्रीय हालात पर बनी हुई है.
रिपोर्ट- प्रतिभा सारस्वत