फल-सब्जियों की खेती से बदल रही गांवों की अर्थव्यवस्था, मोदी बोले-खेती ही देश की ताकत

प्रधानमंत्री ने किसानों को “अन्नदाता” कहकर उनके योगदान को सम्मान दिया. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की बदौलत ही देश में खाद्य सुरक्षा बनी रहती है. अगर किसान खेतों में मेहनत न करें, तो न केवल अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि समाज का संतुलन भी बिगड़ सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 20 Apr, 2026 | 12:50 PM

Horticulture crops: भारत की पहचान हमेशा एक कृषि प्रधान देश के रूप में रही है, लेकिन अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान मुख्य रूप से गेहूं, धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब बागवानी फसलें उनकी आय और भविष्य दोनों को नया आकार दे रही हैं. फल, सब्जियां, फूल, मसाले और बागान फसलें आज सिर्फ खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन चुकी हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को देश का सच्चा “अन्नदाता” बताया है.

बदलती खेती की तस्वीर

आज के समय में खेती सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक लाभकारी व्यवसाय का रूप ले रही है. किसान अब ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम जमीन में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा दे सकें. यही कारण है कि बागवानी फसलों का महत्व तेजी से बढ़ा है. ये फसलें न केवल उत्पादन बढ़ाती हैं, बल्कि बाजार में भी अच्छे दाम दिलाती हैं. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, उच्च मूल्य वाली फसलों में बागवानी का विशेष स्थान है. यह क्षेत्र अब कृषि के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है और ग्रामीण इलाकों में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है.

विकास की रफ्तार में कृषि का योगदान

अगर पिछले एक दशक की बात करें, तो कृषि क्षेत्र ने लगभग 4.45 प्रतिशत की दर से विकास किया है, जो पहले के मुकाबले बेहतर है. यह दिखाता है कि खेती के क्षेत्र में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा योगदान बागवानी क्षेत्र का रहा है, जिसने किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद की है.

कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के कुल सकल मूल्य उत्पादन में बागवानी का योगदान करीब 37 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. यह इस बात को दिखाती है कि खेती का यह हिस्सा अब देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन चुका है.

देश की अर्थव्यवस्था और खेती

भारत की जीडीपी में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान करीब 18.2 प्रतिशत है. यह आंकड़ा बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था में खेती की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. इतना ही नहीं, देश की लगभग आधी आबादी की आजीविका सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है.

गांवों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह खेती पर आधारित है. ऐसे में अगर खेती मजबूत होगी, तो ग्रामीण भारत भी मजबूत होगा और इसका सीधा असर देश की तरक्की पर पड़ेगा.

किसानों का महत्व और उनका सम्मान

इसी बात को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने संदेश में दोहराया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर किसानों को देश का “अन्नदाता” बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही देश को आगे बढ़ाते हैं. किसान न केवल अन्न पैदा करते हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित करते हैं.

अगर किसान खेतों में मेहनत न करें, तो न सिर्फ अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि समाज का संतुलन भी बिगड़ सकता है. इसलिए किसानों का सम्मान और उनका सशक्तिकरण बेहद जरूरी है.

परंपरा और ज्ञान का महत्व

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में एक संस्कृत सुभाषित का भी उल्लेख किया, जिसमें कृषि को जीवन का आधार बताया गया है. इस श्लोक का अर्थ यह है कि खेती केवल धन कमाने का जरिया नहीं, बल्कि समाज को चलाने वाली सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था है.

इसमें यह भी कहा गया है कि अगर अन्न नहीं होगा, तो कोई भी संपत्ति या दान मायने नहीं रखता. यानी भोजन ही जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है और इसे उपलब्ध कराने वाला किसान सबसे अहम है.

आज खेती कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जैसे बदलता मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत. ऐसे में जरूरी है कि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और सरकार भी उन्हें हर संभव मदद दे. बागवानी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें इस दिशा में एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रही हैं.

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Published: 20 Apr, 2026 | 11:19 AM
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