पंजाब के किसान खेती साथ खुद कर रहे फसल की बिक्री, QR कोड की मदद से कर रहे कमाई
पंजाब के किसान QR कोड के जरिए अपनी फसल को डिजिटल पहचान दे रहे हैं. इससे उपभोक्ता भरोसा बढ़ता है, बेहतर कीमत मिलती है और मिलावट से सुरक्षा होती है. फार्म से थाली तक पारदर्शिता, स्थानीय ब्रांड मजबूती और बिचौलियों की भूमिका कम होती है. यह प्रणाली किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए सस्ती और व्यावहारिक है.
Agriculture News: पंजाब के किसान अब डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर यानी QR कोड के जरिए अपनी फसल को नई पहचान दे रहे हैं. अब किसान सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें बेहतर कीमत पर बिक्री करना और सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना की वैज्ञानिकों के अनुसार, बाजार में असली और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में फर्क पहचानना मुश्किल होता है और QR कोड इस समस्या का सरल और प्रभावी समाधान है.
इस पहल के तहत किसान गेहूं का आटा, चावल, गुड़, हल्दी और अन्य उत्पादों पर QR कोड छाप सकते हैं. उपभोक्ता इसे स्कैन करके जान सकते हैं कि उत्पाद कब और कहां तैयार हुआ, किस विधि से बनाया गया और इसे बनाने वाला किसान या यूनिट कौन है. वैज्ञानिकों के अनुसार, QR कोड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम जगह में अधिक जानकारी डिजिटल रूप में स्टोर की जा सकती है.
QR कोड में बदलकर उत्पाद पैकेज पर प्रिंट किया गया
PAU के एग्रो प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स में किए गए अध्ययन में दिखाया गया कि QR कोड के इस्तेमाल से किसान और छोटे प्रोसेसर अपनी फसल को फार्म से कंज्यूमर तक डिजिटल पहचान दे सकते हैं. अध्ययन में गुड़, बेसन, हल्दी पाउडर, चावल और आटे पर QR कोड लगाया गया. पहले सभी उत्पाद जानकारी Excel में दर्ज कर क्लाउड प्लेटफॉर्म (OneDrive) पर रखी गई, फिर इसका लिंक QR कोड में बदलकर उत्पाद पैकेज पर प्रिंट किया गया.
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स्मार्टफोन और इंटरनेट की जरूरत होती है
यह आसान तकनीक सिर्फ स्मार्टफोन और इंटरनेट की जरूरत होती है, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं. इससे किसान उपभोक्ता का भरोसा जीतकर बेहतर कीमत पा सकते हैं, मिलावट और नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलती है और FSSAI पंजीकरण या GI टैग जैसी प्रमाणिकताओं तक आसानी से पहुंच होती है. क्लाउड प्लेटफॉर्म पर स्टोर किए गए उत्पाद डेटा को QR कोड से जोड़कर, किसान और छोटे प्रोसेसर फार्म से थाली तक पूरी पारदर्शिता बना सकते हैं, अपने स्थानीय ब्रांड को मजबूत कर सकते हैं और बिचौलियों की भूमिका कम कर सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम व्यक्तिगत किसानों, FPOs, SHGs और गांव स्तर की इकाइयों के लिए सस्ता और व्यावहारिक है. प्रशिक्षित ग्रामीण युवा इसे स्किल डेवलपमेंट सेंटर के जरिए आसानी से अपना सकते हैं.