हर साल मुनाफा देने वाला ये फल बना किसानों की पहली पसंद, कम मेहनत में होगा ज्यादा फायदा

नाशपाती को ताजा फल के रूप में खाने के साथ-साथ जूस, जैम और डेज़र्ट में भी इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है. एक बार बाग तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक नियमित उत्पादन मिलता रहता है, जिससे किसान को लंबे समय तक फायदा होता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Jan, 2026 | 09:00 AM

भारतीय खेती अब परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रही है. किसान धीरे-धीरे बागवानी और फलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि इनमें जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा है. ऐसी ही एक फल वाली खेती है नाशपाती, जो ठंडे और पहाड़ी इलाकों में किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन रही है. अगर सही जलवायु, मिट्टी और देखभाल का ध्यान रखा जाए, तो नाशपाती की खेती से हर साल लाखों रुपये तक की आमदनी संभव है.

नाशपाती की खेती क्यों है खास

नाशपाती एक स्वादिष्ट और पोषक फल है, जिसकी मांग शहरों से लेकर बड़े बाजारों तक बनी रहती है. इसे ताजा फल के रूप में खाने के साथ-साथ जूस, जैम और डेज़र्ट में भी इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है. एक बार बाग तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक नियमित उत्पादन मिलता रहता है, जिससे किसान को लंबे समय तक फायदा होता है.

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

नाशपाती की खेती के लिए ठंडी और समशीतोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह फल ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पाता. सामान्य तौर पर नाशपाती के पेड़ को सर्दियों में कम तापमान की जरूरत होती है, ताकि फूल और फल अच्छे से आ सकें. पहाड़ी क्षेत्र और ठंडे मैदानी इलाके इसके लिए बेहतर रहते हैं. बहुत अधिक गर्म जगहों पर इसका उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

जमीन और मिट्टी का सही चुनाव

नाशपाती के पेड़ के लिए ऐसी जमीन जरूरी होती है जिसमें पानी जमा न हो. अच्छी जल निकासी वाली, उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी इस खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है. मिट्टी का pH स्तर 6 से 7 के बीच हो तो पेड़ को पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते हैं. खेत तैयार करते समय गहरी जुताई करने से जड़ों को फैलने में आसानी होती है और पौधा मजबूत बनता है.

पौधरोपण से तय होती है बाग की उम्र

नाशपाती के पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना बेहद अहम होता है, ताकि बड़े होने पर पेड़ आपस में न टकराएं और उन्हें भरपूर धूप व हवा मिल सके. आमतौर पर रोपाई के बाद शुरुआती कुछ साल पौधों की देखभाल पर खास ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि यही समय पेड़ की मजबूती तय करता है.

सिंचाई में संतुलन है जरूरी

नाशपाती के पेड़ को नियमित पानी की जरूरत होती है, खासकर गर्मियों में. लेकिन जरूरत से ज्यादा सिंचाई नुकसान पहुंचा सकती है. अधिक पानी से जड़ों में सड़न की समस्या आ सकती है, जिससे पूरा पेड़ कमजोर हो जाता है. इसलिए खेत में पानी की निकासी की सही व्यवस्था होना बहुत जरूरी है. ड्रिप सिंचाई जैसे आधुनिक तरीके अपनाने से पानी की बचत के साथ बेहतर परिणाम मिलते हैं.

खाद और पोषण से बढ़ता है उत्पादन

नाशपाती के पेड़ों को समय-समय पर खाद और पोषक तत्व देना जरूरी होता है. जैविक खाद, गोबर की खाद और कंपोस्ट से मिट्टी की ताकत बनी रहती है. सही पोषण मिलने से पेड़ स्वस्थ रहते हैं और फल का आकार, रंग और स्वाद बेहतर होता है. संतुलित खाद प्रबंधन से उत्पादन भी बढ़ता है.

रोग और कीट से बचाव जरूरी

नाशपाती के बाग में रोग और कीट उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. समय-समय पर छंटाई करने से हवा का संचार अच्छा रहता है और बीमारियों का खतरा कम होता है. अगर शुरुआती लक्षण दिखें तो समय रहते उपचार करना जरूरी है, ताकि नुकसान ज्यादा न हो.

फल आने और कटाई का सही समय

नाशपाती के पेड़ आमतौर पर 3 से 4 साल में फल देना शुरू कर देते हैं. फल पकने पर उन्हें सावधानी से तोड़ना चाहिए, ताकि पेड़ को नुकसान न पहुंचे. सही समय पर कटाई करने से फल की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.

कमाई की मजबूत संभावना

अगर नाशपाती की खेती सही तरीके से की जाए, तो यह किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है. एक अच्छी तरह से तैयार बाग से हर साल स्थिर आमदनी होती है. बाजार में मांग अच्छी होने के कारण किसान स्थानीय मंडियों के साथ-साथ बड़े खरीदारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जुड़ सकते हैं. यही वजह है कि नाशपाती की खेती को भविष्य की फायदेमंद खेती माना जा रहा है.

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Published: 24 Jan, 2026 | 09:00 AM

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