तेल आयात घटाने की तैयारी, सरकार एथेनॉल के लिए जुटाएगी 90 लाख टन चावल… जानें कैसे मिलेगा फायदा

पिछले कुछ समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. सिर्फ तीन हफ्तों में ही कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है. ऐसे में सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. ऐसे में लाखों टन टूटे चावल का उपयोग एथेनॉल बनाने में किया जाएगा.

नई दिल्ली | Published: 24 Mar, 2026 | 03:52 PM

India ethanol policy 2026: देश में बढ़ती ईंधन जरूरतों और महंगे कच्चे तेल के बीच सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. केंद्र सरकार जल्द ही ऐसी योजना ला सकती है, जिससे लाखों टन टूटे चावल (ब्रोकन राइस) का उपयोग एथेनॉल बनाने में किया जाएगा. इससे न सिर्फ ईंधन उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों और उद्योग दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) सम्मेलन में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मीडियो को इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी कर रही है.

पीडीएस में घटेगा टूटे चावल का हिस्सा

फिलहाल सरकार की खाद्य योजना के तहत करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा टूटे चावल का होता है. सरकार अब इस हिस्से को घटाकर 10 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है. ऐसा करने से हर साल करीब 90 लाख टन टूटे चावल अतिरिक्त उपलब्ध होंगे, जिन्हें एथेनॉल उद्योग में इस्तेमाल किया जा सकेगा. यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे खाद्य सुरक्षा पर असर डाले बिना अतिरिक्त संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा.

क्यों जरूरी हुआ यह फैसला

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. सिर्फ तीन हफ्तों में ही कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है. ऐसे में सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. संजीव चोपड़ा ने कहा कि अब सरकार सिर्फ एथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है.

एथेनॉल ब्लेंडिंग में भारत की बड़ी छलांग

भारत ने एथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. 2013 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे देश को करीब 1.63 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और 277 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है. सरकार अब इस सीमा को 20 प्रतिशत से भी आगे बढ़ाने, डीजल में एथेनॉल मिलाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है.

डिस्टिलरी को मिलेगा स्थायी कच्चा माल

2023 में गन्ने की कम पैदावार और चावल उत्पादन को लेकर अनिश्चितता के कारण डिस्टिलरी उद्योग को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ा था. इससे एथेनॉल उत्पादन प्रभावित हुआ था.

नई योजना के तहत टूटे चावल को एक स्थायी और सालभर उपलब्ध रहने वाले कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उत्पादन में रुकावट नहीं आएगी.

अगले साल से बदलेगा FCI का सिस्टम

सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगले साल से FCI (भारतीय खाद्य निगम) के भंडार से पूरा चावल डिस्टिलरी को देना बंद कर दिया जाएगा. इसके बजाय केवल टूटे चावल का उपयोग किया जाएगा. इससे अनाज का बेहतर प्रबंधन होगा और खाद्य वितरण प्रणाली भी प्रभावित नहीं होगी.

मक्का भी बनेगा विकल्प

सरकार एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का को भी बढ़ावा दे रही है. खासतौर पर ऐसी किस्मों पर काम किया जा रहा है जो बिना सिंचाई के भी अच्छी पैदावार दे सकें. इस समय देश में बनने वाले एथेनॉल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित है, जिसमें मक्का का योगदान लगातार बढ़ रहा है.

तेजी से बढ़ रही उत्पादन क्षमता

भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. 2013-14 में यह क्षमता 420 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 2000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है. पिछले तीन सालों में ही 650 करोड़ लीटर की नई क्षमता जुड़ी है, जो इस सेक्टर के तेजी से विस्तार को दिखाती है.

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