Edible Oil Import: भारत में खाने के तेल की मांग हर दिन बढ़ती जा रही है और इसका सीधा असर देश के आयात पर दिखाई दे रहा है. कभी सोयाबीन तेल की बढ़ती खरीद तो कभी पाम ऑयल की डिमांड, अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव ने घरेलू कीमतों और सप्लाई दोनों को प्रभावित किया है. रुपये की कमजोरी और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत में खाद्य तेल का आयात क्यों लगातार बढ़ रहा है और इसका असर आम उपभोक्ता पर क्या पड़ेगा.
कुल आयात में 13 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी
नवंबर से मई 2025-26 के दौरान भारत में कुल खाद्य तेल का आयात बढ़कर 92.17 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 81.31 लाख टन था. यानी इसमें करीब 13.35 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
मई 2026 में भी बढ़ा आयात
मई 2026 में भारत ने 13.29 लाख टन खाद्य तेल आयात किया, जो अप्रैल 2026 के 13.07 लाख टन से थोड़ा अधिक है.
इसमें हिस्सेदारी इस प्रकार रही:
- सोयाबीन तेल: 4.93 लाख टन
- पाम ऑयल: 5.49 लाख टन (क्रूड पाम ऑयल प्लस RBD पामोलीन)
- सनफ्लावर ऑयल: 2.95 लाख टन
क्यों बढ़ा सोयाबीन ऑयल का आयात?
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सोयाबीन तेल की कीमतों में आई प्रतिस्पर्धा की वजह से आयात बढ़ा है. जब सोयाबीन और पाम ऑयल के दामों में अंतर कम हो गया, तो आयातकों ने सोयाबीन तेल को ज्यादा चुना और उसकी खरीद बढ़ा दी.
रुपये की कमजोरी बनी चिंता का कारण
पिछले एक साल में भारतीय रुपया 12 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है. इससे आयात महंगा हो गया है और रिफाइनर्स पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है. साथ ही, पिछले साल की तुलना में कच्चे तेलों की कीमतों में भी 19 से 23 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई है.
पाम ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का भी बढ़ा आयात
पहले सात महीनों में:
- पाम ऑयल आयात बढ़कर 45.20 लाख टन हुआ (पिछले साल 33.37 लाख टन)
- सनफ्लावर ऑयल आयात बढ़कर 18.48 लाख टन हुआ
लेकिन इसी दौरान सोयाबीन ऑयल का कुल आयात थोड़ा घटकर 28.41 लाख टन रह गया.
RBD पामोलीन आयात में बड़ी गिरावट
भारत में RBD पामोलीन (पाम के तेल का एक रिफाइंड रूप) का आयात काफी कम हो गया है. यह केवल 47,270 टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 8.26 लाख टन था. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीति के कारण ऐसा हुआ है, जिसमें कच्चे तेल के आयात को ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि देश में रिफाइनिंग और रोजगार को बढ़ाया जा सके.
नेपाल से आयात में तेज बढ़ोतरी
नेपाल से रिफाइंड तेलों का आयात भी तेजी से बढ़ा है. नवंबर से मार्च के बीच नेपाल ने लगभग 2.80 लाख टन रिफाइंड तेल भारत को भेजा. अप्रैल और मई में भी यह आयात करीब 58,000 से 60,000 टन प्रति माह रहा. यह आयात मुख्य रूप से सोयाबीन तेल का था.
प्रमुख देशों से आयात स्थिति
भारत को तेल आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश:
- इंडोनेशिया: 17.2 लाख टन (मुख्य रूप से पाम ऑयल)
- मलेशिया: 17.6 लाख टन
- अर्जेंटीना: 16.4 लाख टन (सोयाबीन तेल)
- ब्राजील: 5.66 लाख टन
- रूस, यूक्रेन: सनफ्लावर ऑयल के प्रमुख स्रोत
भारत में खाद्य तेलों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण आयात भी तेजी से ऊपर जा रहा है. कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक सप्लाई चेन का असर सीधे तौर पर देश के तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है. आने वाले समय में यह स्थिति और भी अहम हो सकती है, खासकर जब घरेलू उत्पादन और आयात नीति दोनों पर नजर रखनी जरूरी होगी.