India tea industry crisis: भारत का चाय उद्योग इस समय बड़े आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है. एक तरफ देश ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 280.40 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया, वहीं दूसरी तरफ चाय बागानों की लागत लगातार बढ़ने और नीलामी कीमतों में गिरावट ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) ने सरकार से तत्काल मदद की मांग की है.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. वैश्विक चाय उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है. वर्ष 2025 में देश में 1,369.98 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ और निर्यात से लगभग 8,488.43 करोड़ रुपये की कमाई हुई. इसके बावजूद चाय उद्योग आर्थिक दबाव में दिखाई दे रहा है.
बढ़ती लागत ने बिगाड़ा चाय बागानों का गणित
आईटीए के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में चाय की नीलामी कीमतों में औसतन केवल 3.81 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है. दूसरी तरफ बिजली, उर्वरक, मजदूरी और खेती से जुड़े दूसरे खर्च तेजी से बढ़े हैं. इस वजह से चाय बागानों की लागत लगातार बढ़ रही है और कई बागानों के लिए संचालन मुश्किल होता जा रहा है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्पादन खर्च बढ़ने के बावजूद बाजार में चाय की सही कीमत नहीं मिल रही.
नीलामी कीमतों में आई बड़ी गिरावट
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, चाय उद्योग के सामने सबसे बड़ी चिंता कीमतों में गिरावट को लेकर है. वर्ष 2025 में देशभर में चाय की औसत नीलामी कीमत घटकर 186.92 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि 2024 में यह 201.28 रुपये प्रति किलोग्राम थी. यानी एक साल में कीमतों में करीब 7.13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. उत्तर भारत में हालात और ज्यादा खराब रहे, जहां कीमतों में लगभग 9.87 प्रतिशत की गिरावट आई. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार घटती कीमतें चाय उत्पादकों के लिए बड़ा संकट बनती जा रही हैं.
असम में बारिश की भारी कमी से उत्पादन प्रभावित
मौसम में बदलाव ने भी चाय उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. आईटीए के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान असम में 97 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई. इसका सीधा असर चाय की फसल और पौधों की गुणवत्ता पर पड़ा. खराब मौसम की वजह से उत्पादन में गिरावट देखने को मिली.
जनवरी से मार्च 2026 के बीच देश का कुल चाय उत्पादन घटकर 98.01 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 110.4 मिलियन किलोग्राम था. यानी उत्पादन में करीब 11.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
दार्जिलिंग चाय उद्योग पर सबसे ज्यादा असर
दार्जिलिंग का चाय उद्योग भी गंभीर संकट से गुजर रहा है. कभी अपनी खुशबू और गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में मशहूर दार्जिलिंग चाय का उत्पादन लगातार घट रहा है. वर्ष 2008 में दार्जिलिंग में करीब 11.58 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता था, जो अब घटकर सिर्फ 5.3 मिलियन किलोग्राम रह गया है. इसके अलावा 2018 से 2024 के बीच दार्जिलिंग चाय की कीमतों में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई. उद्योग के अनुसार कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर देखने को मिली है.
नेपाल से बढ़ते आयात ने बढ़ाई चिंता
आईटीए ने नेपाल से बढ़ते चाय आयात पर भी चिंता जताई है. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत ने नेपाल से 11.70 मिलियन किलोग्राम चाय आयात की, जो दार्जिलिंग के कुल उत्पादन से भी ज्यादा है. उद्योग का कहना है कि सस्ती आयातित चाय की वजह से घरेलू उत्पादकों पर दबाव बढ़ रहा है. इससे खास तौर पर दार्जिलिंग और उत्तर भारत के चाय उत्पादकों को नुकसान हो रहा है.
सरकार से मदद की मांग
इंडियन टी एसोसिएशन ने सरकार से कई बड़े कदम उठाने की मांग की है. उद्योग चाहता है कि उत्पादन लागत के आधार पर न्यूनतम टिकाऊ मूल्य प्रणाली लागू की जाए, ताकि किसानों और बागान मालिकों को उचित कीमत मिल सके. इसके अलावा निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं में सुधार, ऑर्थोडॉक्स चाय उत्पादन पर मिलने वाली सहायता को फिर से शुरू करने और दार्जिलिंग के बागानों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की गई है. आईटीए का कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो चाय उद्योग की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है.
लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी
भारत का चाय उद्योग केवल व्यापार नहीं बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का बड़ा आधार है. असम, पश्चिम बंगाल, दार्जिलिंग और दक्षिण भारत के कई इलाकों में हजारों परिवार सीधे चाय बागानों पर निर्भर हैं. ऐसे में उद्योग की मौजूदा स्थिति सरकार और नीति निर्माताओं के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है.