ईरान-अमेरिका टेंशन की आग हरियाणा पहुंची! इस इंडस्ट्री को लगा धक्का, कारोबार प्रभावित

केमिकल्स की कमी और बढ़ती लागत का असर अब यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ रहा है. इससे सीधे तौर पर काम करने वाले मजदूर, ट्रांसपोर्टर और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. यह उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देता है और अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Apr, 2026 | 05:03 PM

Plywood Industry: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की आग हरियाणा तक पहुंच गई है. युद्ध के चलते केवल बासमती चावल के निर्यात पर ही असर नहीं पड़ा है, बल्कि यमुनानगर जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री भी प्रभावित हुई है. इस समय यह प्लाईवुड इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है. कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है. क्योंकि अरब देशों से आने वाले जरूरी केमिकल्स का आयात प्रभावित हुआ है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है.

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, प्लाईवुड बनाने में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मेलिन, फिनोल और मेलामाइन जैसे महत्वपूर्ण केमिकल्स की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. वैश्विक तनाव के कारण इन केमिकल्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही पोपलर लकड़ी जैसे अन्य कच्चे माल की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं, जिससे फैक्ट्री मालिकों पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है.

फॉर्मेलिन की कीमत बढ़ गई

हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य अनिल गर्ग ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से पहले फॉर्मेलिन की कीमत 18 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 33 रुपये प्रति किलो हो गई है. इसी तरह फिनोल की कीमत 85 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि मेलामाइन का रेट 80 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है.

केमिकल्स अरब देशों से आयात किए जाते हैं

जानकारी के मुताबिक, ये सभी केमिकल्स मुख्य रूप से अरब देशों से आयात किए जाते हैं और प्लाईवुड बनाने के लिए जरूरी एडहेसिव तैयार करने में इस्तेमाल होते हैं. अब इनकी सप्लाई काफी कम हो गई है. युद्ध जैसे हालात के कारण कार्गो शिप की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे आयातित सामग्री समय पर नहीं पहुंच पा रही है.
ट्रेडर्स का कहना है कि ऑर्डर देने के बाद भी समय पर डिलीवरी की कोई गारंटी नहीं है, जिससे उत्पादन और प्लानिंग दोनों प्रभावित हो रहे हैं. वहीं देश में इन केमिकल्स का उत्पादन सीमित होने के कारण निर्माताओं के पास विकल्प भी बहुत कम बचे हैं.

सप्लाई चेन को सामान्य होने में समय लगेगा वक्त

व्यापारियों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद भी सप्लाई चेन को सामान्य होने में समय लगेगा. मौजूदा संकट के कारण कई प्लाईवुड फैक्ट्रियां कम क्षमता पर काम करने को मजबूर हैं. अजय गर्ग ने कहा कि जिले की ज्यादातर प्लाईवुड फैक्ट्रियों में उत्पादन धीमा हो गया है. कच्चे माल, खासकर पोपलर लकड़ी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के कारण पहले जैसे स्तर पर उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो गया है, इसलिए उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है. बाजार सूत्रों के अनुसार इस समय पोपलर लकड़ी का दाम 1,600 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. कमजोर सप्लाई चेन और बढ़ती ऑपरेशनल लागत ने स्थिति को और कठिन बना दिया है, जिससे यह पूरा सेक्टर गंभीर दबाव में आ गया है.

हजारों परिवारों की आजीविका पर असर

केमिकल्स की कमी और बढ़ती लागत का असर अब यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ रहा है. इससे सीधे तौर पर काम करने वाले मजदूर, ट्रांसपोर्टर और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. यह उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देता है और अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है.

काम के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

इसके अलावा, असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों का भी इस उद्योग पर असर पड़ा है. यहां की ज्यादातर पीलिंग यूनिट्स में काम करने वाले मजदूर असम और पश्चिम बंगाल से आते हैं. एक प्लाईवुड निर्माता के अनुसार, चुनावों के चलते ये मजदूर अपने घर लौट गए हैं, जिससे श्रमिकों की भारी कमी हो गई है और यमुनानगर की कई पीलिंग यूनिट्स का काम प्रभावित हुआ है. यमुनानगर जिला भारत में प्लाईवुड उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां करीब 350 प्लाईवुड फैक्ट्रियां, लगभग 400 पीलिंग यूनिट्स और इससे जुड़ी कई अन्य सहायक इकाइयां संचालित होती हैं.

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Published: 24 Apr, 2026 | 04:57 PM
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