Kisan Credit Card: 5 लाख रुपये का KCC लोन और 4 फीसदी ब्याज! किसान ऐसे उठाएं योजना का फायदा

किसानों के लिए KCC अब पहले से ज्यादा फायदेमंद हो गया है. ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़कर 5 लाख रुपये हो गई है. समय पर भुगतान करने पर ब्याज दर प्रभावी रूप से 4 फीसदी रह जाती है. खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन भी इसके दायरे में हैं.

नोएडा | Published: 8 Aug, 2026 | 04:52 PM

Kisan Credit Card: खेती में बीज, खाद, सिंचाई और कीटनाशकों का खर्च बढ़ता जा रहा है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर पैसे जुटाने की होती है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना किसानों के लिए बड़ी मदद बन रही है. 1998 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब किसान 5 लाख रुपये तक का ऋण ले सकते हैं. खास बात यह है कि समय पर कर्ज चुकाने पर ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत रह जाती है.

3 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपये हुई KCC की सीमा

KCC की सामान्य ब्याज  दर 7 प्रतिशत सालाना है. लेकिन मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (MISS) के तहत समय पर भुगतान करने वाले किसानों को 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है. यानी ऐसे किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत रह जाती है. सरकार 2024-25 तक इस योजना पर करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी खर्च कर चुकी है. बजट 2025-26 में KCC की ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई. वहीं बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे मिलने वाले ऋण की सीमा 1.60 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है. यह बदलाव 1 जनवरी 2025 से पूरे देश में लागू है. 3 लाख रुपये तक के ऋण पर प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लगता.

जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं किसान

KCC एक तरह की रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा है. यह ATM या RuPay डेबिट कार्ड की तरह काम करती है. किसान अपनी मंजूर सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार पैसा निकाल सकते हैं और ब्याज केवल निकाली गई राशि पर लगता है. एक बार मंजूर हुई KCC लिमिट 5 साल तक वैध रहती है. किसानों को हर महीने EMI चुकाने की जरूरत नहीं होती. फसल बिकने के बाद  वे एकमुश्त राशि चुका सकते हैं. सूखा या बाढ़ जैसी स्थिति आने पर RBI के नियमों के तहत ब्याज में राहत और कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ाने की सुविधा भी मिल सकती है.

खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन भी दायरे में

अब KCC का फायदा केवल फसल उगाने वाले किसानों  तक सीमित नहीं है. पशुपालन, डेयरी, मछली पालन, बकरी पालन और सूअर पालन करने वाले लोग भी इसके तहत ऋण ले सकते हैं. जमीन नहीं रखने वाले किसान भी JLG यानी ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप या SHG यानी स्वयं सहायता समूह के जरिए आवेदन कर सकते हैं. मछली पालक और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह भी पात्र हैं. योजना में ऊपरी आयु सीमा नहीं है और 75 साल तक के किसान भी आवेदन कर सकते हैं.

आधार-पैन से लेकर ऑनलाइन आवेदन तक, आसान है प्रक्रिया

कृषि ऋण के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन की पासबुक और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है. पशुपालन या मछली पालन  के लिए संबंधित काम की जगह की जानकारी या लाइसेंस की जरूरत हो सकती है. ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान बैंक की वेबसाइट पर KCC विकल्प चुनकर आवेदन कर सकते हैं. जानकारी भरकर सबमिट करने के बाद एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर मिलता है और पात्र होने पर बैंक 5 दिनों के भीतर संपर्क करता है.

किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ, ई-KCC और कृषिका जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी आवेदन कर सकते हैं. PM-KISAN का रिकॉर्ड जुड़ने से प्रक्रिया तेज होती है. ऑफलाइन आवेदन के लिए नजदीकी सरकारी, ग्रामीण या सहकारी बैंक जाना होगा. देश में फिलहाल 7.72 करोड़ से ज्यादा सक्रिय KCC हैं और इनके जरिए करीब 10.2 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण दिया गया है. 450 से ज्यादा बैंक इस योजना से जुड़े हैं. ISEC के अध्ययन के मुताबिक KCC से खेती में लगाए गए हर 1 रुपये से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 2.30 रुपये का शुद्ध मूल्यवर्धन हो रहा है.

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