कोकून बेचने की टेंशन खत्म! अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे आदिवासी किसान, 3.88 करोड़ से बनेगा सरकारी कोकून बाजार

यह परियोजना राज्य की नई वस्त्र नीति 2023–28 के तहत मंजूर की गई है. सरकार का साफ कहना है कि तसर रेशम की खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक मजबूत आजीविका के रूप में आगे बढ़ाया जाए. इसके लिए जरूरी है कि किसानों को स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिले.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 23 Jan, 2026 | 09:01 AM

महाराष्ट्र के गड़चिरौली जिले के तसर रेशम किसानों के लिए आखिरकार अच्छी खबर आई है. सालों से अपनी मेहनत का पूरा दाम पाने के लिए जूझ रहे किसानों को अब सरकार का सहारा मिलने जा रहा है. राज्य सरकार ने आर्मोरी क्षेत्र में एक सरकारी तसर रेशम कोकून बाजार बनाने की मंजूरी दे दी है. इस बाजार पर करीब 3.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. उम्मीद है कि इसके शुरू होते ही किसानों की कई पुरानी परेशानियां दूर होंगी.

क्यों जरूरी था तसर कोकून का सरकारी बाजार

बिजनेस लाइन की रिपो्रट के अनुसार, गड़चिरौली और आसपास के इलाकों में तसर रेशम की खेती करने वाले ज्यादातर किसान आदिवासी और छोटे किसान हैं. ये लोग जंगलों और गांवों के बीच रहकर मेहनत से रेशम के कोकून तैयार करते हैं, लेकिन जब इन्हें बेचने की बारी आती है, तो सही बाजार न होने की वजह से उन्हें कम दाम पर सौदा करना पड़ता है. कई बार बिचौलिये बीच में आ जाते हैं और किसान को उसकी मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिल पाता.

सरकारी बाजार बनने से किसानों को एक भरोसेमंद जगह मिलेगी, जहां वे सीधे अपनी उपज बेच सकेंगे. यहां खुले तरीके से नीलामी होगी, जिससे कोकून का सही भाव मिल पाएगा.

3.88 करोड़ की योजना, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

यह परियोजना राज्य की नई वस्त्र नीति 2023–28 के तहत मंजूर की गई है. सरकार का साफ कहना है कि तसर रेशम की खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक मजबूत आजीविका के रूप में आगे बढ़ाया जाए. इसके लिए जरूरी है कि किसानों को स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिले. इसी सोच के साथ इस कोकून बाजार को हरी झंडी दी गई है.

बाजार में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

आर्मोरी में बनने वाला यह बाजार सिर्फ एक खरीद-बिक्री की जगह नहीं होगा, बल्कि यहां किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे. कोकून को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण की व्यवस्था होगी, ताकि माल खराब न हो. नीलामी के लिए अलग जगह होगी, जहां खरीददार और किसान खुले तौर पर सौदा कर सकेंगे.

इसके साथ ही बाजार परिसर में कार्यालय भवन, पीने का पानी, शौचालय, बिजली, अंदरूनी सड़कें और पानी निकासी की सुविधा भी होगी. सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि दिव्यांग लोगों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो.

गांव में ही मिलेगा रोजगार का मौका

इस बाजार के बनने से सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी फायदा होगा. बाजार के संचालन, रखरखाव, नीलामी और अन्य कामों के लिए लोगों की जरूरत पड़ेगी. इससे गांव और आसपास के इलाकों में रोजगार के नए मौके पैदा होंगे और लोगों को बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा.

तसर रेशम उद्योग को मिलेगा नया भरोसा

इस परियोजना को रेशम निदेशालय के जरिए लागू किया जाएगा और इसमें केंद्रीय रेशम बोर्ड के नियमों का पालन किया जाएगा. इससे किसानों में यह भरोसा बनेगा कि बाजार पारदर्शी है और उन्हें ठगा नहीं जाएगा. समय पर भुगतान और सही दाम मिलने से तसर रेशम की खेती फिर से मजबूत होगी.

कुल मिलाकर यह सरकारी तसर कोकून बाजार गड़चिरौली के किसानों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है. इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि उनके जीवन में स्थिरता भी आएगी. सरकार का यह कदम दिखाता है कि अगर सही योजना और नीयत हो, तो गांव और जंगलों में रहने वाले किसानों की जिंदगी भी बेहतर बनाई जा सकती है.

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