एशिया की सबसे बड़ी मंडी में प्याज हुआ धड़ाम, क्या किसानों को 1500 रुपये क्विंटल मिलेगा अनुदान ?

अप्रैल महीने के दौरान महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के भाव में काफी अंतर  देखने को मिले. 4 अप्रैल को अहमदनगर APMC मंडी में कुल 1,265.10 मीट्रिक टन लाल प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 150 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,200 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल रहा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 14 Apr, 2026 | 01:51 PM

Maharashtra News: महाराष्ट्र के नासिक स्थित लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में प्याज की कीमतों में गिरावट आई है. इससे किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है. कहा जा रहा है कि खरीफ प्याज की थोक कीमतों में लगभग 30 फीसदी की तेज कमी दर्ज की गई है. एक महीने पहले जहां कीमत करीब 1,100 रुपये प्रति क्विंटल थी, वहीं अब यह घटकर 775 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है, जो एक साल का सबसे निचला स्तर है. वहीं, महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने नुकसान की भरपाई के लिए प्रति क्विंटल 1,500 रुपये का अनुदान की मांग की है.

मंडी अधिकारियों के अनुसार, प्याज की आवक बढ़ने और मांग कम होने के कारण कीमतों में गिरावट आई है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मांग घटने का भी दबाव थोक दामों पर पड़ा है. हालांकि, गर्मी के मौसम की प्याज अभी अपेक्षाकृत बेहतर दाम पर बिक रही है और इसकी कीमत करीब 1,100 रुपये प्रति क्विंटल है. किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव उनकी उत्पादन लागत से काफी कम है, जो लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और उनकी परेशानी बढ़ गई है.

अहमदनगर APMC मंडी में कितनी हुई प्याज की आवक

खास बात यह है कि अप्रैल महीने के दौरान महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के भाव में काफी अंतर  देखने को मिले. Agmarknet के आंकड़ों केअनुसार, 4 अप्रैल को अहमदनगर APMC मंडी में कुल 1,265.10 मीट्रिक टन लाल प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 150 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,200 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल रहा. वहीं, 13 अप्रैल को इसी मंडी में कुल 2,128.80 मीट्रिक टन लाल प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 150 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,200 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 750 रुपये प्रति क्विंटल रहा.

13 अप्रैल को लासलगांव मंडी में प्याज का ताजा रेट

वहीं, 4 अप्रैल को लासलगांव (निफाड) APMC मंडी में 290.00 मीट्रिक टन अन्य किस्म के प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 411 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,322 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 1,150 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जबकि, 13 अप्रैल को 432.00 मीट्रिक टन अन्य किस्म के प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 525 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,163 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 1,050 रुपये प्रति क्विंटल रहा.

लासलगांव (विंचूर) APMC मंडी में क्या है प्याज का भाव

वहीं, 4 अप्रैल को लासलगांव (विंचूर) APMC मंडी में 292.50 मीट्रिक टन अन्य किस्म के प्याज की आवक  दर्ज की गई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,322 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 1,100 रुपये प्रति क्विंटल रहा. इसी मंडी में 13 अप्रैल को 700.20 मीट्रिक टन प्याज की आवक हुई. इस दिन प्याज का न्यूनतम भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,600 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 1,150 रुपये प्रति क्विंटल रहा.

मंडी तारीख आवक (मीट्रिक टन) न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) मॉडल भाव (₹/क्विंटल)
अहमदनगर APMC 4 अप्रैल 1,265.10 150 1,200 700
अहमदनगर APMC 13 अप्रैल 2,128.80 150 1,200 750
लासलगांव (निफाड) APMC 4 अप्रैल 290.00 411 1,322 1,150
लासलगांव (निफाड) APMC 13 अप्रैल 432.00 525 1,163 1,050
लासलगांव (विंचूर) APMC 4 अप्रैल 292.50 500 1,322 1,100
लासलगांव (विंचूर) APMC 13 अप्रैल 700.20 500 1,600 1,150

1,800 रुपये क्विंटल खेती में लागत

महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने एक बयान में कहा है कि प्रमुख मंडियों में प्याज के थोक दामों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्याज की उत्पादन लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन किसानों को मजबूरी में 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. दिघोले ने आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार इस गंभीर स्थिति पर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ रही है.

1,500 रुपये क्विंटल अनुदान की मांग

उन्होंने कहा कि जब भी प्याज के दाम बढ़ते हैं, सरकार तुरंत न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP), आयात शुल्क या निर्यात पर रोक जैसी पाबंदियां लगा देती है. भारत दिघोले ने मांग की कि सरकार उन किसानों को तुरंत आर्थिक राहत दे, जिन्होंने पिछले छह महीनों में कम दामों पर अपनी उपज बेची है. उन्होंने यह भी दोहराया कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रति क्विंटल 1,500 रुपये का अनुदान दिया जाना चाहिए.

 

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Published: 14 Apr, 2026 | 01:41 PM
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