हरियाणा के मुकाबले पंजाब में ज्यादा सस्ता चावल, 20 रुपये किलो तक का है अंतर.. मिलर्स परेशान

पंजाब में FRK की टेंडर दर 39.80 रुपये प्रति किलो तय की गई है, जबकि हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में यही कीमत 58 से 62 रुपये प्रति किलो तक है.

नोएडा | Updated On: 20 Jan, 2026 | 11:51 AM

Punjab News: पंजाब में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की कम कीमत को लेकर चावल मिलरों और निर्माताओं के बीच चिंता बढ़ गई है. यहां FRK की सबसे कम स्वीकृत बोली 39.80 रुपये प्रति किलो रही, जबकि हरियाणा समेत कई राज्यों में इसकी कीमत 60 रुपये प्रति किलो तक है. यानी करीब 20 रुपये किलो तक का अंतर है. इस बड़े अंतर के चलते निर्माता तय दर पर सप्लाई करने से हिचक रहे हैं, जिससे मिलरों को जरूरत पूरी करने के लिए 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, FRK चावल फोर्टिफिकेशन योजना  का अहम हिस्सा है, जिसमें 100 किलो चावल में 1 फीसदी FRK मिलाया जाता है. पंजाब में इस सीजन 156 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है और मिलरों को 105 लाख मीट्रिक टन चावल राष्ट्रीय पूल में देना है, जिसके लिए करीब 1.05 लाख मीट्रिक टन FRK की जरूरत है. लेकिन सप्लाई की कमी से चावल की डिलीवरी प्रभावित हो रही है. मिलरों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि 31 मार्च के बाद मिलिंग मुश्किल हो जाती है और उत्पादन घटता है.

सप्लाई पर नजर रखी जा रही है

निर्माताओं का कहना है कि टेंडर के बाद FRK से जुड़ा एसओपी बदला गया, जिससे नियम सख्त हो गए और लागत बढ़ गई. अब सैंपल जांच और सप्लाई की प्रक्रिया पहले से ज्यादा जटिल हो गई है, जिससे तय दर पर उत्पादन संभव नहीं है. उनका दावा है कि मौजूदा कीमत पर काम जारी रखना मुश्किल है और दरों में संशोधन जरूरी है. वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निदेशक वरिंदर शर्मा ने कहा कि टेंडर 126 निर्माताओं की सहमति से हुआ है और सप्लाई पर नजर  रखी जा रही है. विभाग को अधिक वसूली की शिकायतें भी मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

टेंडर दर 39.80 रुपये प्रति किलो तय की गई

पंजाब में FRK की टेंडर दर 39.80 रुपये प्रति किलो तय की गई है, जबकि हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में यही कीमत 58 से 62 रुपये प्रति किलो तक है. निर्माताओं का कहना है कि इस बड़े अंतर की वजह से पंजाब में सप्लाई करना घाटे का सौदा बन गया है. ऊपर से कच्चे माल और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे तय की गई दर उनके वास्तविक खर्च से कम पड़ रही है.

निर्माताओं की परेशानी नई SOP से भी बढ़ी है, जो टेंडर के बाद लागू की गई. पहले सैंपल जांच  के लिए NABL लैब भेजे जाते थे, लेकिन अब DFPD खुद सैंपल लेकर लंबी और सख्त प्रक्रिया से मंजूरी देता है. इससे गुणवत्ता जांच, दस्तावेज़ी काम और अनुपालन लागत बढ़ गई है. इसके अलावा, पंजाब में सप्लाई से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से रिलीज ऑर्डर लेना भी अनिवार्य है, जिसे निर्माता अतिरिक्त देरी और खर्च का कारण बता रहे हैं.

कागजी प्रक्रिया बढ़ गई है

सप्लायरों का कहना है कि दूसरे राज्यों में ज्यादा कीमत मिलने के कारण पंजाब में कम दर पर FRK बेचना आर्थिक रूप से नुकसानदेह है. कुछ राज्यों के व्यापारी पंजाब से सस्ता FRK खरीदकर अपने राज्यों में महंगे दाम  पर बेच रहे हैं, जिससे स्थानीय सप्लायरों को नुकसान का डर है. नई SOP और RO सिस्टम के कारण कागजी प्रक्रिया बढ़ गई है और भुगतान में देरी का जोखिम भी है. ऐसे में तय टेंडर रेट पर सप्लाई करने का मतलब लागत भी न निकल पाना हो सकता है. दूसरी ओर, मिलरों पर समय सीमा का दबाव है, लेकिन सप्लायर घाटा उठाकर माल देने से बच रहे हैं.

Published: 20 Jan, 2026 | 12:15 PM

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