Mandi Bhav: आलू की गिरती कीमतों से परेशान किसानों का प्रदर्शन, नेशनल हाइवे किया जाम

असम के तिनसुकिया जिले के सादिया क्षेत्र के आलू किसानों ने लगातार घटते दामों और बिचौलियों के शोषण के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया. किसानों ने आधुनिक बाजार और कोल्ड स्टोरेज की मांग रखी. अधिकारियों ने आश्वासन दिया, फिर भी किसानों ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन तेज होगा.

नोएडा | Updated On: 6 Jan, 2026 | 12:09 PM

Potato Price Fall: आलू की गिरती कीमतों से परेशान असम के तिनसुकिया जिले के किसानों ने प्रदर्शन किया. नाराज किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर आलू डालकर रास्ता जाम कर दिया. कहा जा रहा है कि किसानों का यह प्रदर्शन आलू के लगातार गिरते दामों और बिचौलियों व कारोबारी सिंडिकेट्स द्वारा शोषण के आरोपों के विरोध में किया गया. करीब 300 किसान पैदल पहुंचे और 7- 8 ट्रैक्टरों के साथ अपनी फसल सीधे सड़क पर फेंक दी. ऐसे में 8 माइल इलाके में देखते ही देखते हाईवे आलू से भर गया. किसानों ने स्थानीय किसानों की सुरक्षा में नाकामी को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इस वजह से हाईवे पर लंबा जाम लग गया और दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों का आरोप है कि असम के सबसे बड़े आलू उत्पादक क्षेत्रों में शामिल सादिया में होने के बावजूद उन्हें बिचौलियों और व्यापारियों से सिर्फ 6 से 7 रुपये प्रति किलो ही मिलते हैं. जबकि खुले बाजार  में यही आलू 10 से 14 रुपये प्रति किलो में बेचा जाता है. इससे बीच के दलाल भारी मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि किसान अपनी लागत तक निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

कम दाम पर आलू बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं

प्रदर्शन कर रहे किसान विद्युत बोरगोहेन ने कहा कि सादिया में सही बाजार व्यवस्था न होने के कारण किसानों के पास बिचौलियों को बेहद कम दाम पर आलू बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. वहीं व्यापारी बाद में उसी आलू को लगभग दोगुने दाम पर बेच देते हैं, जबकि किसान अपनी खेती की लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. किसानों का गुस्सा इस बात से भी बढ़ गया कि असम में पर्याप्त उत्पादन होने के बावजूद दूसरे राज्यों से आलू मंगाया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्थानीय किसान नुकसान में फसल बेचने को मजबूर हैं, तो बाहर से आलू आयात करने का क्या औचित्य है.

असम के सबसे बड़े आलू उत्पादक इलाकों में से एक

एक अन्य किसान ने कहा कि सादिया असम के सबसे बड़े आलू उत्पादक  इलाकों में से एक है, फिर भी यहां के किसानों की पूरी तरह अनदेखी हो रही है. इस आंदोलन से राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और यात्रियों व मालवाहक वाहनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. हालात को संभालने के लिए सरकारी अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत शुरू की.

किसानों की ये हैं मुख्य मांगें

सरकारी अधिकारियों से बातचीत में किसानों ने दो मुख्य मांगें रखीं- सादिया में आलू किसानों के लिए आधुनिक बाजार  सुविधा का निर्माण और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था, ताकि वे अपनी फसल सुरक्षित रख सकें और कटाई के बाद होने वाले नुकसान से बच सकें. अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएंगी और उचित कार्रवाई पर विचार किया जाएगा. इसके बाद किसानों ने राजमार्ग साफ किया और प्रदर्शन खत्म किया, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन तेज कर सकते हैं.

Published: 6 Jan, 2026 | 11:59 AM

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