मनरेगा मजदूरी 700 रुपये.. राकेश टिकैत की हुंकार, किसानों की ऋण माफी हो और खाद सब्सिडी बहाल करे सरकार
राकेश टिकैत ने कहा कि सभी फसलों के लिए एमएसपी गारंटीड खरीद की घोषणा सरकार करे और सभी ब्लॉकों में सरकारी मंडियां स्थापित की जाएं. टिकैत ने कहा कि मनरेगा की दैनिक मजदूरी 700 रुपये की जाए और न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये किया जाए. असमय बारिश और खेतों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वर्तमान 17 फीसदी की नमी सीमा बढ़ाकर 22 फीसदी की जाए.
किसानों और खेतिहर मजदूरों की ऋण माफी योजना की घोषणा सरकार करे. इसके अलावा सरकार 84 हजार करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को भी बहाल करे. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रयागराज में चिंतन शिविर के अंतिम दिन केंद्र सरकार से यह मांगें करते हुए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है. राकेश टिकैत ने कहा कि सभी फसलों के लिए एमएसपी गारंटीड खरीद की घोषणा सरकार करे और सभी ब्लॉकों में सरकारी मंडियां स्थापित की जाएं. टिकैत ने कहा कि मनरेगा की दैनिक मजदूरी 700 रुपये की जाए और न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये किया जाए. असमय बारिश और खेतों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वर्तमान 17 फीसदी की नमी सीमा बढ़ाकर 22 फीसदी की जाए.
उत्तर प्रदेश के जनपद प्रयागराज में आयोजित राष्ट्रीय चिंतन शिविर के अंतिम दिन आज अपनी मांगों का एक ज्ञापन अधिकार पत्र के रूप में देश के प्रधानमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन की ओर से केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजी जा रही है और इसमें दर्शाई गई मांगों पर केंद्र सरकार तुरंत फैसला ले और राज्यों को भी निर्देशित करे.
सभी फसलों के लिए एमएसपी गारंटी और सरकारी मंडियां बनें
सभी फसलों के लिए एमएसपी गारंटीड खरीद हेतु संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में तुरंत कानून पारित करें. सभी ब्लॉकों में सरकारी मंडियां स्थापित की जाएँ। असमय बारिश और खेतों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वर्तमान 17 प्रतिशत की नमी सीमा बढ़ाकर 22 प्रतिशत की जाए। गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित तुरंत निपटाए जाए.
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किसानों और कृषि मजदूरों के लिए ऋण माफी योजना घोषित हो
किसानों और कृषि मजदूरों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना घोषित की जाए. सूक्ष्म वित्त संस्थानों की ओर से गरीब किसान, निर्धन भूमिहीन मजदूर परिवारों से ऊंचे ब्याज की वसूली पर नियंत्रण के लिए कानून बनाया जाए और ऋण ग्रस्त लोगों के उत्पीड़न पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा किसानों को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए. इसके साथ ही बिजली बिल 2025 तुरंत वापस लिया जाए. बिजली का निजीकरण रोका जाए. स्मार्ट मीटरों पर रोक लगाई जाए. सभी परिवारों को प्रति माह 300 यूनिट और खेती में मुफ्त बिजली दी जाए.
मनरेगा दैनिक मजदूरी 700 रुपये, 26 हजार मासिक वेतन दिया जाए
हाल में अधिसूचित 4 श्रम संहिताएं तुरंत वापस ली जाएं. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को समाप्त किया जाए. संगठित क्षेत्र में सुरक्षित स्थायी रोजगार दिया जाए और न्यूनतम वेतन 26000 रुपये प्रति माह तथा असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों सहित कृषि मजदूरों को 10000 रुपये मासिक वृद्धावस्था पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए. मनरेगा या उससे परिवर्तित योजना में बजट बढ़ाकर 200 दिन का काम तथा 700 रुपये दैनिक मजदूरी पक्की की जाए.
खाद सब्सिडी बहाल हो और असफल बीमा योजना बंद की जाए
84000 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी बहाल की जाए, डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा काला बाज़ारी बंद की जाए। किसानों पर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी थोपना बंद किया जाए. सभी भीषण बाढ़ और भूस्खलनों को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए. सभी आपदा प्रभावित राज्यों को 1 लाख करोड़ रुपये तथा पंजाब को 25000 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए. बंटाईदार किसानों और कृषि मजदूरों को भी मुआवजा दिया जाए. असफल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को समाप्त कर सार्वजनिक क्षेत्र में फसल व पशुधन बीमा योजना बनाई जाए.
किसान आत्महत्या और पलायन पर रोका जाए
जबरन और अंधाधुंध भूमि अधिग्रहण रोका जाए. एलएआरआर 2013 का सख्ती से पालन किया जाए और सभी पीड़ित भूमि-धारकों को मुआवजा दिया जाए. राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा की जाए. एमएसपी और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा की जाए. कृषि संकट, किसान आत्महत्या और मजबूरन पलायन का अंत किया जाए. देश की रीढ़ कहे जाने वाले किसान, मजदूर आज सबसे अधिक संकट में हैं. यदि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो सामाजिक और आर्थिक संतुलन और गहरा होगा. देश की खाद्य सुरक्षा और सामाजिक संतुलन हेतु इन मांगों पर शीघ्र निर्णय अपेक्षित है.