चाय बाजार में आखिर क्या हुआ? एक हफ्ते में ऑर्थोडॉक्स चाय के दाम अचानक लुढ़के

ऑर्थोडॉक्स चाय के साथ-साथ CTC चाय बाजार में भी गिरावट देखी गई. CTC लीफ चाय के दाम नीचे आए, हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाली कुछ किस्मों में हल्की मजबूती बनी रही. निर्यात मांग कमजोर होने के बावजूद केरल और दूसरे राज्यों के खरीदारों ने कुछ हद तक बाजार को संभालने की कोशिश की.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 9 May, 2026 | 08:09 AM

orthodox tea prices: देश के चाय कारोबार में इस समय दबाव का माहौल देखने को मिल रहा है. खासकर केरल के कोच्चि चाय बाजार में ऑर्थोडॉक्स चाय की कीमतों में अचानक गिरावट दर्ज की गई है. विदेशी बाजारों से मांग कमजोर होने और शिपिंग लागत को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण चाय कारोबार प्रभावित हुआ है. हालात ऐसे हैं कि कोच्चि नीलामी में ऑर्थोडॉक्स चाय के दाम करीब 9 रुपये प्रति किलो तक गिर गए.

चाय व्यापार से जुड़े जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बनी स्थिति का असर अब भारतीय चाय निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है. जहाजों के रूट बदलने के कारण माल ढुलाई की नई दरें तय नहीं हो पा रही हैं, जिससे निर्यातक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.

कोच्चि नीलामी में क्यों गिरे दाम?

कोच्चि में हुई हालिया चाय नीलामी में ऑर्थोडॉक्स चाय की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली. व्यापारियों के मुताबिक विदेशी खरीदारों की मांग पहले की तुलना में कम रही. जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर बढ़ती लागत ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है. कई कंपनियों ने फिलहाल खरीदारी की रफ्तार धीमी कर दी है ताकि शिपिंग दरें स्थिर होने का इंतजार किया जा सके.

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के रूट बदलने का असर सिर्फ तेल बाजार पर ही नहीं, बल्कि चाय व्यापार पर भी पड़ा है. निर्यातकों को अब वैकल्पिक रास्तों से माल भेजने के लिए ज्यादा खर्च उठाना पड़ सकता है. इसी वजह से कई खरीदार फिलहाल बड़ी खरीदारी करने से बच रहे हैं. व्यापारियों का मानना है कि जैसे ही समुद्री परिवहन सामान्य होगा, बाजार में दोबारा तेजी लौट सकती है.

कितनी रही गिरावट?

नीलामी में ऑर्थोडॉक्स चाय की औसत कीमत घटकर 184.36 रुपये प्रति किलो रह गई. पिछले सप्ताह यही औसत कीमत 193.28 रुपये प्रति किलो थी. यानी एक सप्ताह में लगभग 9 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई.

इस बार नीलामी में करीब 1,98,488 किलो ऑर्थोडॉक्स चाय बिक्री के लिए पेश की गई थी. इनमें नीलगिरी क्षेत्र की कुछ अच्छी गुणवत्ता वाली चाय की कीमतें मजबूत रहीं, लेकिन बाकी ग्रेड कमजोर पड़े.

कुछ किस्मों की मांग बनी रही

हालांकि बाजार में पूरी तरह कमजोरी नहीं रही. अमेरिका को चाय भेजने वाले निर्यातकों और टी-बैग बनाने वाली कंपनियों की ओर से कुछ किस्मों की मांग अच्छी बनी रही. फैनिंग्स श्रेणी की चाय में खरीदारी अपेक्षाकृत स्थिर देखी गई. इससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला.

CTC चाय बाजार भी दबाव में

ऑर्थोडॉक्स चाय के साथ-साथ CTC चाय बाजार में भी गिरावट देखी गई. CTC लीफ चाय के दाम नीचे आए, हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाली कुछ किस्मों में हल्की मजबूती बनी रही. निर्यात मांग कमजोर होने के बावजूद केरल और दूसरे राज्यों के खरीदारों ने कुछ हद तक बाजार को संभालने की कोशिश की.

एलपीजी संकट का भी असर

कोचीन टी ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज ने कहा कि स्थानीय बाजार में एलपीजी सप्लाई संकट का असर भी चाय की खपत पर पड़ रहा है. कई छोटे चाय दुकानदारों और स्थानीय बाजारों में गैस की समस्या के कारण खपत प्रभावित हुई है. इससे CTC चाय की मांग अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है.

CTC डस्ट की कीमतों में भी गिरावट

CTC डस्ट चाय बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई. कीमतों में 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई. करीब 5,83,572 किलो CTC डस्ट चाय बिक्री के लिए पेश की गई थी, जिसमें 86 प्रतिशत चाय की बिक्री हुई. कुल बिकने वाली CTC चाय में से लगभग 69 प्रतिशत हिस्सेदारी ब्लेंडिंग कंपनियों की रही.

व्यापारियों को जल्द सुधार की उम्मीद

चाय कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा दबाव ज्यादा लंबे समय तक नहीं रह सकता. अनिल जॉर्ज के अनुसार वैश्विक बाजार में ऑर्थोडॉक्स चाय की कमी के संकेत मिल रहे हैं. अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य हुई तो निर्यात मांग फिर से मजबूत हो सकती है.

भारतीय चाय उद्योग के लिए क्यों अहम है निर्यात?

भारत दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक देशों में शामिल है. खासकर ऑर्थोडॉक्स चाय की विदेशों में अच्छी मांग रहती है. मध्य पूर्व, रूस, सीआईएस देशों और अमेरिका जैसे बाजार भारतीय चाय उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में शिपिंग संकट और वैश्विक तनाव का असर सीधे चाय कारोबार पर पड़ता है.

किसानों और छोटे कारोबारियों की बढ़ी चिंता

कीमतों में गिरावट से चाय बागान मालिकों और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. अगर निर्यात मांग लंबे समय तक कमजोर रहती है तो इसका असर किसानों की आमदनी पर भी पड़ सकता है. हालांकि व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में हालात धीरे-धीरे सुधर सकते हैं.

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