बासमती निर्यात पर राइस मिलर्स ने जताई चिंता, सरकार को लिखा पत्र.. की तुरंत सुधार की मांग

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों और एग्रो-प्रोसेसिंग  इकाइयों जैसे सभी संबंधित पक्षों से ज्यादा बातचीत की जानी चाहिए, ताकि बदलते बाजार की जरूरतों को बेहतर समझा जा सके. साथ ही, सुधारों को तेजी से लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाने की सिफारिश की गई है.

Kisan India
नोएडा | Published: 17 Apr, 2026 | 05:04 PM

Basmati Export: बासमती निर्यात को लेकर पंजाब राइस मिलर्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने गंभीर चिंता जताई है. उसने केंद्र सरकार से तुरंत सुधार की मांग की है. एसोसिएशन ने कहा है कि बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) के कामकाज में कई खामियां हैं, जिन्हें ठीक करना जरूरी है, ताकि देश के बासमती निर्यात को सुरक्षित रखा जा सके. इस संबंध में एसोसिएशन ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है. इसमें बताया गया है कि BEDF, जो एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के तहत काम करता है, उसमें संरचनात्मक कमियां और दीर्घकालिक योजना की कमी है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएशन ने कहा कि करीब 20 साल पहले बासमती चावल को वैश्विक स्तर पर GI टैग के तहत बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए बनाए गए बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर पड़ गया है. पत्र में कहा गया है कि अब जरूरी है कि उच्च गुणवत्ता वाले बासमती के उत्पादन और उसके प्रमोशन पर दोबारा ध्यान दिया जाए, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों  पर खरा उतर सके. निर्यातकों ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में कई समस्याएं हैं, जैसे निर्यात और घरेलू बाजार के लिए स्पष्ट दीर्घकालिक योजना का अभाव और नेतृत्व में अनुभवी विशेषज्ञों की कमी. उन्होंने सुझाव दिया कि उत्पादन, प्रोसेसिंग और वैश्विक मार्केटिंग का अनुभव रखने वाले योग्य और सक्रिय कृषि विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, ताकि इस क्षेत्र को मजबूत बनाया जा सके.

संबंधित पक्षों से ज्यादा बातचीत की जानी चाहिए

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों और एग्रो-प्रोसेसिंग  इकाइयों जैसे सभी संबंधित पक्षों से ज्यादा बातचीत की जानी चाहिए, ताकि बदलते बाजार की जरूरतों को बेहतर समझा जा सके. साथ ही, सुधारों को तेजी से लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाने की सिफारिश की गई है. एसोसिएशन का कहना है कि बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) का मौजूदा कामकाज काफी ज्यादा सरकारी प्रक्रियाओं पर आधारित है और अक्सर इसे अस्थायी या रिटायर्ड अधिकारियों द्वारा चलाया जाता है, जिससे इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है.

सक्रिय व दूरदर्शी नेतृत्व की जरूरत है

पत्र में यह भी कहा गया है कि चावल निर्यात क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, इसलिए इसमें लगातार संवाद और सक्रिय व दूरदर्शी नेतृत्व की जरूरत है, तभी यह वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर पाएगा. एसोसिएशन ने बासमती चावल की वैश्विक पहचान (GI टैग)  की सुरक्षा के लिए जुटाए जा रहे फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि निर्यातक हर टन पर 70 रुपये का योगदान देते हैं, लेकिन इस खर्च का असर साफ दिखाई नहीं देता, खासकर उन देशों में जहां अभी बासमती का रजिस्ट्रेशन लंबित है.

पत्र में तुरंत सुधार की मांग की गई

पत्र में इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा गया है कि तुरंत सुधार की जरूरत है. एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “बहुत अस्थिर” बताते हुए केंद्र सरकार से बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) की पूरी समीक्षा और बड़े स्तर पर बदलाव करने की मांग की है, ताकि भारत का बासमती निर्यात वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बना रह सके. अशोक सेठी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में अंत में केंद्र सरकार से तुरंत कार्रवाई की अपील की गई है. इसमें कहा गया है कि समय पर सुधार करना बहुत जरूरी है, ताकि बासमती का उत्पादन और निर्यात दोनों मजबूत हो सकें, क्योंकि ये भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.

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