देश की प्रमुख चीनी और इथेनॉल निर्माता कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल-जून) की पहली तिमाही में प्रदर्शन बेहतर रहा. चीनी की अधिक बिक्री और बेहतर कीमत मिलने से कंपनी का नेट टर्नओवर 2.1 फीसदी बढ़कर 1,581 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, इस दौरान अल्कोहल की बिक्री (ऑफटेक) में कमी और वेस्टवॉटर कारोबार से होने वाली आय घटने का असर भी देखने को मिला. वहीं, कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि पहली तिमाही में मुनाफे में सुधार की सबसे बड़ी वजह चीनी पर बेहतर मार्जिन रहा. यह मार्जिन चीनी के अच्छे दाम मिलने, मक्का की खरीद लागत कम होने, डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) की बेहतर कीमत मिलने और उत्पादन व परिचालन में सुधार के कारण बढ़ा. अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी ने 2,77,403 टन चीनी की बिक्री की, जो पिछले साल की समान अवधि के 2,58,196 टन के मुकाबले 7.4 फीसदी अधिक है. वहीं, चीनी का औसत बिक्री मूल्य भी बढ़कर 41,525 रुपये प्रति टन हो गया, जबकि एक साल पहले यह 40,421 रुपये प्रति टन था.
2026-27 के चीनी सीजन में उत्पादन घट सकता है
त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज का मानना है कि आने वाले समय में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं. कंपनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से कम चीनी उत्पादन और निर्यात के कारण पूरे साल घरेलू बाजार में चीनी के दाम मजबूत रहे. अब भी चीनी का शुरुआती स्टॉक (कैरी-ओवर स्टॉक) कम है और अगले सीजन में अल नीनो के कारण मॉनसून कमजोर रहने की आशंका है. ऐसे में 2026-27 के चीनी सीजन में उत्पादन घट सकता है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है.
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करीब 7 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है
कंपनी के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) में करीब 7 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है, जबकि 30 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई. इसके कारण देश में चीनी का स्टॉक तेजी से घटा है. त्रिवेणी इंजीनियरिंग का अनुमान है कि 30 सितंबर 2026 तक देश में चीनी का भंडार घटकर 41 लाख टन रह सकता है. यह सितंबर 2017 के बाद सबसे निचला स्तर होगा और पिछले 10 वर्षों का सबसे कम स्टॉक माना जा रहा है
चीनी उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव
कंपनी ने यह भी कहा कि अल नीनो की स्थिति को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. यदि इसका असर मॉनसून पर पड़ता है, तो 2026-27 के चीनी उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ध्रुव एम. साहनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 कंपनी के लिए एक नए दौर की शुरुआत है. पावर ट्रांसमिशन कारोबार के अलग होकर त्रिवेणी पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (TPTL) बनने के बाद कंपनी ने नई शुरुआत की है.
चीनी की कीमतों में अच्छी बढ़त
उन्होंने कहा कि गन्ने की पैदावार कम रहने, गन्ने के दाम बढ़ने और इथेनॉल की मांग में बदलाव जैसी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने पहली तिमाही में बेहतर मुनाफा दर्ज किया है. साहनी ने बताया कि पहली तिमाही के बाद से ही घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में अच्छी बढ़त देखने को मिली है. इसकी बड़ी वजह मौजूदा चीनी सीजन के अंत में कम चीनी स्टॉक रहने का अनुमान और अगले सीजन में एल नीनो के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि कंपनी अब गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन प्रक्रिया में सुधार पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि भविष्य में चीनी उत्पादन बढ़ाया जा सके और कारोबार को और मजबूत बनाया जा सके.