अचानक महंगी हुईं सब्जियां, 110 रुपये किलो करेला.. बैंगन की कीमत सुनकर पकड़ लेंगे माथा

ईरान-अमेरिका तनाव और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब सब्जियों के दामों पर दिख रहा है. कोलकाता में करेला 110 रुपये और बैंगन 100 रुपये किलो तक पहुंच गया है. बढ़ी परिवहन लागत, गर्मी और उत्पादन में कमी से महंगाई बढ़ी है, जबकि किसानों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Jun, 2026 | 08:08 AM

Vegetable Price Hike: ईरान- अमेरिका के बीच जारी जंग का असर अब आम जनता की जेब पर भी पड़ रहा है. इससे किचन का खर्च बढ़ गया है. खासकर गैस, पेट्रोल और डीजल महंगा होने के चलते सब्जियों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने और मौसमी उत्पादन में कमी के कारण थोक और खुदरा कीमतों के बीच अंतर भी बढ़ गया है. लेकिन पश्चिम बंगाल में महंगाई कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है. फिलहाल कोलकाता में करेला 110 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि, एक किलो बैंगन की कीमत 100 रुपये हो गई है.

व्यापारियों का कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने की वजह से थोक बाजार में सब्जियों के दाम 10 फीसदी से 12 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जबकि खुदरा बाजार में कीमतें और भी ज्यादा बढ़ी हैं. फिलहाल कोलकाता के रिटेल मार्केट में ज्योति आलू की कीमत 12 रुपये से बढ़कर 15 रुपये किलो हो गई है. इसी तरह प्याज के दाम भी 25 रुपये से बढ़कर 30 रुपये किलो हो गए हैं. ऐसे में ग्राहकों का कहना है कि जब हर सब्जी के दाम 5 रुपये तक बढ़ जाते हैं, तो मजबूरी में घर का खर्च चलाने के लिए सब्जियों की मात्रा कम करनी पड़ती है.

45 रुपये किलो भिंडी

बड़ी बात यह है कि गर्मी के मौसम में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं. पिछले हफ्ते तक जो परवल और भिंडी  30 रुपये किलो बिक रही थीं, अब वे 40 से 45 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं. वहीं महंगी और खास किस्म की सब्जियां अब और भी ज्यादा महंगी हो गई हैं. करेला, जो पहले 80 रुपये किलो था, अब बढ़कर 110 रुपये किलो हो गया है. इसी तरह बैंगन की कीमत भी 80 रुपये से बढ़कर 90 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है, जिससे ये सब्जियां आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं.

इस वजह से महंगी हुईं सब्जियां

लेक मार्केट के सब्जी विक्रेता अनवर अली ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि हम इस बढ़ती कीमतों से कोई अतिरिक्त मुनाफा नहीं कमा रहे हैं. जो ट्रक जिलों से सब्जियां लेकर आते हैं, वे डीजल की कीमत बढ़ने की वजह से अब ज्यादा किराया वसूल रहे हैं. जब तक माल हमारे स्टॉल तक पहुंचता है, तब तक गर्मी के कारण उसका एक बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है और हमें उसी नुकसान की भरपाई करनी पड़ती है. ग्राहक हमसे बहस करते हैं, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.

किसानों को नहीं हो रहा फायदा

हालांकि, जमीनी स्तर पर छोटे किसान इस बढ़ी हुई खुदरा कीमतों  का फायदा बहुत कम ही देख पा रहे हैं. सिंगूरके सब्जी किसान सुकुमार मंडल ने कहा कि उनके खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने की लागत बढ़ गई है और खाद भी महंगी हो गई है. इसके बावजूद स्थानीय मंडियों में थोक व्यापारी उन्हें लगभग पहले जैसे ही दाम दे रहे हैं. उनका कहना है कि इस पूरी स्थिति में सबसे ज्यादा फायदा बिचौलियों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों को मिल रहा है, क्योंकि ईंधन संकट का असर वहीं से शुरू होता है. सुकुमार मंडल के अनुसार, अभी फसल चक्र का बदलाव चल रहा है. पुरानी फसलें खत्म हो रही हैं और नई फसलें पूरी तरह तैयार नहीं हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैंं.

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Published: 4 Jun, 2026 | 08:04 AM

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