आम के पेड़ों पर टूटा ‘कीटों का कहर’! एक गलती और बर्बाद हो जाएगी पूरी फसल, जानें बचाव के उपाय

Mango Farming: आम की अच्छी पैदावार के लिए कीट और रोग प्रबंधन बेहद जरूरी है. मधुआ रोग, चूर्णिल आसिता, मिलीबग और फल मक्खी जैसे कीट-रोग फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, समय पर सही दवाओं का छिड़काव, फेरोमोन ट्रैप का उपयोग और जैविक उपाय अपनाकर किसान फसल को सुरक्षित रख सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 8 May, 2026 | 10:00 PM

Mango Pest Control Tips: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है. स्वाद और मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है. देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है, लेकिन अच्छी पैदावार लेना किसानों के लिए हमेशा आसान नहीं होता. मौसम में बदलाव, कीटों का हमला और रोगों का प्रकोप फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन न किया जाए, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, आम के बौर आने के समय कीट और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी होता है. सही प्रबंधन नहीं होने पर बौर गिरने लगते हैं, जिससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.

क्यों जरूरी है कीट एवं रोग प्रबंधन?

आम की खेती में कई प्रकार के कीट और फफूंद जनित रोग लगते हैं, जो पेड़ों की पत्तियों, फूलों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे न केवल पैदावार घटती है, बल्कि बाजार में फलों की गुणवत्ता भी कमजोर पड़ जाती है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, किसानों को अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए. इसके लिए इंटीग्रेटेड पेस्ट एंड डिजीज मैनेजमेंट (IPDM) सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है. यह तकनीक कीट और रोगों को नियंत्रित करने के साथ पर्यावरण की सुरक्षा में भी मदद करती है.

मधुआ रोग और चूर्णिल आसिता से ऐसे करें बचाव

आम के पेड़ों में मधुआ रोग यानी पाउडरी मिल्ड्यू और चूर्णिल आसिता सबसे आम समस्याओं में गिने जाते हैं. ये रोग खासतौर पर फूलों और नई पत्तियों को प्रभावित करते हैं. इससे बौर सूखने लगते हैं और फल बनने में रुकावट आती है. इन रोगों को नियंत्रित करने के लिए किसान हेक्साकोनाजोल 5 फीसदी ईसी की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं.

इसके अलावा डाइनोकैप 46 ईसी का उपयोग भी प्रभावी माना जाता है. कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, एज़ॉक्सीस्ट्रोबिन और डाइफेनोकोनाजोल के मिश्रण वाली दवाएं इन रोगों पर तेजी से असर करती हैं और फसल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं.

मिलीबग कीट से पेड़ों को कैसे बचाएं?

मिलीबग आम की फसल के लिए बेहद खतरनाक कीट माना जाता है. यह पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर बना देता है. इसके कारण पत्तियां सूखने लगती हैं और फल उत्पादन कम हो जाता है. इसके नियंत्रण के लिए किसान थायोमेथोक्साम 25 WG या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL का छिड़काव कर सकते हैं. वहीं जैविक खेती करने वाले किसान ब्यूवेरिया बेसियाना का उपयोग भी कर सकते हैं, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

फल मक्खी से ऐसे बचाएं आम की फसल

फल मक्खी आम की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले कीटों में से एक है. यह फलों के अंदर अंडे देती है, जिससे फल सड़ने लगते हैं और बाजार में उनकी कीमत घट जाती है. इससे बचाव के लिए किसानों को खेत में मेथाइल यूजेनॉल आधारित फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए. विशेषज्ञ प्रति हेक्टेयर 15 से 20 ट्रैप लगाने की सलाह देते हैं. इसके अलावा गिरे हुए और खराब फलों को नियमित रूप से इकट्ठा कर नष्ट करना भी जरूरी है.

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगा मुनाफा

आम की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए समय पर कीट और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी है. खेत की साफ-सफाई, सही दवाओं का उपयोग और जैविक उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. अगर किसान आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो वे न सिर्फ फसल को नुकसान से बचा पाएंगे, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाले आम पैदा कर अधिक मुनाफा भी कमा सकेंगे.

 

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Published: 8 May, 2026 | 10:00 PM
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