गेहूं किसानों के लिए एडवाइजरी, गर्मी से फसल को पहुंच सकता है नुकसान.. करें पोटैशियम का छिड़काव

हरियाणा में मार्च में सामान्य से 6 डिग्री अधिक तापमान दर्ज होने से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा. कृषि विशेषज्ञों ने फसल बचाने के लिए सिंचाई, पोटैशियम नाइट्रेट स्प्रे और खेतों में मंडूसी-कंकी के पौधे हटाने की सलाह दी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 10 Mar, 2026 | 07:16 PM

Haryana Agriculture News: हरियाणा में मार्च महीने के दौरान सामान्य से करीब 6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा तापमान होने से गर्मी असामान्य रूप से बढ़ गई है. इससे गेहूं किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ रही है, क्योंकि इतनी जल्दी गर्मी बढ़ने से फसल पर असर पड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के सभी मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जबकि कुछ जगहों पर यह 35 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा दर्ज किया गया.

IMD के शाम के बुलेटिन के मुताबिक महेंद्रगढ़ में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं रविवार को हिसार में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई, जहां अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों तक मौसम ज्यादातर शुष्क रहने की संभावना है. 15 मार्च को कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान  में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा.

तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है

तेजी से बढ़ते तापमान को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं की फसल पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है. कैथल के कृषि उपनिदेशक (DDA) और किसान कल्याण विभाग के अधिकारी रविंदर सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि मार्च में तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान  हो सकता है. इससे दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसके कारण दाने छोटे और हल्के रह सकते हैं और कुल उत्पादन में कमी आ सकती है.

देर से बोई गई किस्मों के लिए जारी गई सलाह

करनाल स्थित ICAR-भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के निदेशक रतन तिवारी ने कहा कि दिन के तापमान में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन रात के तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसलिए अक्टूबर-नवंबर में बोई गई शुरुआती फसल और 15-20 नवंबर के बीच बोई गई मध्यम अवधि की फसल पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए दिसंबर में देर से बोई गई किस्मों वाले किसानों के लिए सलाह जारी की गई है.

गर्मी से फसल को बचाने के लिए करें ये काम

गेहूं अनुसंधान संस्थान की ओर से जारी सलाह में किसानों से कहा गया है कि वे जरूरत के अनुसार फसल की सिंचाई  करें, ताकि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे और ज्यादा तापमान का असर कम हो सके. किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि तेज हवा चलने के दौरान, खासकर शाम के समय, सिंचाई न करें क्योंकि इससे फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है.

गुजरात में कई जगहों पर गेहूं की कटाई शुरू हो गई

इसके अलावा गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए किसानों को 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इसके लिए 4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर फसल पर स्प्रे करने को कहा गया है. तिवारी ने कहा कि इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली ज्यादातर गेहूं की फसलें अपने महत्वपूर्ण चरण को पार कर चुकी हैं. मध्य प्रदेश और गुजरात में तो कई जगहों पर गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है, इसलिए देश में फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है.

गेहूं के खेतों में मंडूसी दिखाई देने पर करें ये काम

वहीं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन गेहूं के खेतों में मंडूसी या कंकी के पौधे दिखाई दें, उन्हें हाथ से उखाड़कर खेत से बाहर फेंक दें. इससे उनके बीज खेत में नहीं गिरेंगे और अगले साल इनका प्रकोप कम होगा.

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Published: 10 Mar, 2026 | 07:12 PM
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