Amazing Bird: क्या कौवें भी मनाते हैं इसानों की तरह मातम, आखिर मौत के बाद क्यों जुटता है पूरा झुंड?

कौवों के झुंड का किसी मृत कौवे के आसपास इकट्ठा होना केवल शोर नहीं बल्कि एक खास सामाजिक व्यवहार माना जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पक्षियों का खतरे को समझने और समूह को सतर्क करने का तरीका है, जो उनकी बुद्धिमानी दिखाता है. ये घटना प्रकृति और जानवरों की समझ को नया नजरिया देती.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Feb, 2026 | 08:30 PM

Amazing Bird: शहरों और गांवों में अक्सर हम कौवों को झुंड में शोर मचाते हुए देखते हैं. कई बार सड़क या पेड़ के नीचे मरे हुए कौवे के आसपास दर्जनों कौवे इकट्ठा होकर जोर-जोर से आवाज करते दिखाई देते हैं. आम तौर पर लोग इसे सिर्फ शोर समझते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक खास तरह का व्यवहार है, जिसे कौवों का अंतिम संस्कार या क्रो फ्यूनरल कहा जाता है. यह घटना पक्षियों की समझ और उनके सामाजिक व्यवहार को लेकर नई जानकारी देती है.

मौत को पहचानने की क्षमता

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जानवरों की दुनिया में शोक या दुख को समझना अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य है. हाथियों के बारे  में पहले से माना जाता है कि वे अपने साथियों की मौत पर अलग तरह का व्यवहार दिखाते हैं. अब शोध में सामने आया है कि कौवे भी मौत को पहचानते हैं. जब किसी कौवे की मृत्यु हो जाती है, तो आसपास के कौवे उसके पास इकट्ठा हो जाते हैं और जोर-जोर से आवाज करके एक-दूसरे को सतर्क करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ संयोग नहीं बल्कि एक सामाजिक प्रतिक्रिया है. कौवे अपने साथी की मौत को अनदेखा नहीं करते, बल्कि उस जगह को ध्यान से देखते और समझने की कोशिश करते हैं.

Animal Behavior, Crow Intelligence, Wildlife Science, Bird Behavior

कौवों का समूह मृत कौवे के पास खतरा समझता है.

क्यों जुटते हैं कौवे?

नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार, कौवों का यह व्यवहार  इंसानों के शोक मनाने जैसा दिख सकता है, लेकिन इसके पीछे का कारण अलग है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कौवे यह जानने की कोशिश करते हैं कि उनके साथी की मौत कैसे हुई. वे यह समझना चाहते हैं कि कहीं आसपास कोई खतरा तो नहीं है. जब कई कौवे एक साथ इकट्ठा होकर आवाज करते हैं, तो वे दूसरे कौवों को भी सतर्क करते हैं. यह उनके समूह की सुरक्षा का तरीका माना जाता है. यानी यह भावनात्मक शोक से ज्यादा सुरक्षा और सीखने से जुड़ा व्यवहार है.

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बुद्धिमान पक्षियों में गिने जाते हैं

बेहद बुद्धिमान पक्षियों में गिने जाते हैं कौवे

कौवे दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों  में गिने जाते हैं. वे चेहरों को पहचान सकते हैं, समस्याओं का हल निकाल सकते हैं और समूह में मिलकर काम कर सकते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक उनके व्यवहार का अध्ययन लंबे समय से कर रहे हैं. कौवे कॉर्विड नाम के पक्षियों के परिवार से आते हैं. इस समूह में रेवेन, मैगपाई और जे जैसे पक्षी भी शामिल हैं. इन सभी पक्षियों में सीखने और याद रखने की क्षमता काफी मजबूत होती है. यही कारण है कि वे अपने साथी की मौत से जुड़ी जानकारी को भी याद रख सकते हैं.

प्रकृति से मिलने वाली सीख

कौवों का यह व्यवहार हमें यह समझने में मदद करता है कि जानवर और पक्षी अपने तरीके से दुनिया को समझते हैं. वे खतरे को पहचानने और उससे बचने के लिए समूह में मिलकर काम करते हैं. यह प्रकृति की एक अनोखी व्यवस्था है, जो जीवों को सुरक्षित  रहने में मदद करती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे व्यवहार का अध्ययन करने से जानवरों की भावनाओं और उनकी सोच को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

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कौवों का फ्यूनरल

कौवों का फ्यूनरल हमें यह भी याद दिलाता है कि प्रकृति में हर जीव अपने अनुभवों से सीखता है और अपने समूह की सुरक्षा के लिए अलग-अलग तरीके अपनाता है. कुल मिलाकर, अगली बार जब आप कौवों को किसी एक जगह पर इकट्ठा होकर शोर मचाते देखें, तो संभव है कि वे सिर्फ आवाज नहीं कर रहे हों, बल्कि अपने साथी की मौत से जुड़ी किसी बड़ी बात को समझने की कोशिश कर रहे हों.

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Published: 14 Feb, 2026 | 08:30 PM

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