अगस्त में ऐसे तैयार करें बैंगन की नर्सरी, सर्दियों में होगी बंपर कमाई, लाखों का मिलेगा मुनाफा

अगर बैंगन की खेती से ज्यादा कमाई चाहते हैं तो अगस्त में सही तरीके से नर्सरी तैयार करना बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार उन्नत बीज, ऊंची क्यारियां, सही रोपाई और संतुलित पोषण अपनाकर किसान कम लागत में बंपर उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 8 Aug, 2026 | 09:49 PM

Brinjal Farming: बैंगन की खेती किसानों के लिए कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली सब्जी फसलों में शामिल है. अगस्त का महीना बैंगन की अगेती खेती के लिए नर्सरी तैयार करने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. सही तरीके से नर्सरी तैयार करने, उन्नत किस्मों के बीजों का चयन और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान सर्दियों के मौसम में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, स्वस्थ नर्सरी तैयार करना बैंगन की अच्छी पैदावार की पहली और सबसे अहम कड़ी है.

अगस्त में नर्सरी तैयार करना क्यों है फायदेमंद

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के मुताबिक, अगस्त में तैयार की गई बैंगन की नर्सरी को अगस्त में मुख्य खेत में रोपाई किया जा सकता है. इससे पौधों को बढ़ने के लिए अनुकूल समय मिलता है और सर्दियों के मौसम में फसल की अच्छी मांग के दौरान किसानों को बेहतर बाजार भाव मिल सकता है. बैंगन की फसल लंबे समय तक उत्पादन देती है, इसलिए किसान इसे नियमित आमदनी वाली फसल के रूप में अपना सकते हैं. उन्होंने बताया कि नर्सरी तैयार करते समय जल निकासी, मिट्टी की गुणवत्ता और बीज उपचार का विशेष ध्यान रखना चाहिए. स्वस्थ पौध तैयार होने से खेत में रोगों का खतरा कम होता है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है.

ऐसे करें बैंगन की स्वस्थ नर्सरी तैयार

बैंगन की नर्सरी के लिए सबसे पहले खेत में ऊंची क्यारियां यानी रेज्ड बेड तैयार करनी चाहिए. क्यारियों की ऊंचाई करीब 15 सेंटीमीटर और चौड़ाई लगभग 1 मीटर रखी जा सकती है. मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाने से पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है. बीजों की बुवाई  से पहले उन्हें ट्राइकोडर्मा या कार्बेन्डाजिम जैसे फफूंदनाशक से उपचारित करना फायदेमंद रहता है. बीजों को करीब 1 सेंटीमीटर गहराई पर बोना चाहिए और इसके बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए. नर्सरी को पुआल या जाली से ढकने पर तेज धूप और कीटों से बचाव होता है. ध्यान रखें कि नर्सरी में पानी जमा न हो, क्योंकि इससे डैम्पिंग ऑफ यानी आर्द्र पतन रोग का खतरा बढ़ जाता है.

खेत की तैयारी और रोपाई का सही तरीका

नर्सरी तैयार होने के साथ ही मुख्य खेत की तैयारी  शुरू कर देनी चाहिए. खेत की 2 से 3 बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाएं. अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और जरूरत के अनुसार एनपीके खाद का प्रयोग करें. जब नर्सरी के पौधे 15 सेंटीमीटर लंबे हो जाएं या उनमें 4 से 5 पत्तियां आ जाएं, तब उनकी रोपाई खेत में करनी चाहिए. पौधों की रोपाई शाम के समय करने से पौधों को नुकसान कम होता है. बेहतर विकास के लिए पौधों के बीच करीब 60×60 सेंटीमीटर की दूरी रखना लाभकारी होता है.

बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखें ध्यान

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बैंगन की खेती में हमेशा प्रमाणित और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों का चुनाव  करना चाहिए. फसल को तना छेदक और फल छेदक जैसे कीटों से बचाने के लिए नियमित निगरानी जरूरी है. खेत में फेरोमोन ट्रैप और यलो स्टिकी कार्ड लगाने से कीट नियंत्रण में मदद मिलती है. एक एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से बैंगन की खेती करने पर किसान 120 से 150 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इसकी खेती में लगभग 30 से 40 हजार रुपये तक लागत आती है, जबकि अच्छे प्रबंधन और बाजार भाव के आधार पर किसान 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. लंबे समय तक तुड़ाई देने वाली यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है.

Published: 8 Aug, 2026 | 10:30 PM

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