परंपरागत खेती से आगे बढ़ें किसान, ब्लूबेरी उगाकर पाएं लाखों की आमदनी
ब्लूबेरी की खेती में शुरुआती लागत जरूर थोड़ी ज्यादा होती है, क्योंकि पौधे महंगे होते हैं और मिट्टी की तैयारी में खर्च आता है. लेकिन यही खेती आगे चलकर किसानों को मालामाल कर सकती है. एक बीघा जमीन में कुछ साल बाद ब्लूबेरी से लाखों रुपये तक की सालाना कमाई संभव है.
Blueberry farming: खेती अब सिर्फ पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रही. बदलते समय के साथ किसानों के सामने ऐसे नए विकल्प आ रहे हैं, जो कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता रखते हैं. इन्हीं विकल्पों में से एक है ब्लूबेरी की खेती. नीले रंग का यह छोटा सा फल आज बड़े-बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स, जूस बार और सुपरमार्केट्स की शान बन चुका है. सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता ने ब्लूबेरी को “सुपरफूड” की पहचान दिला दी है, और यही वजह है कि इसकी मांग हर साल तेजी से बढ़ रही है.
क्यों खास है ब्लूबेरी और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग
ब्लूबेरी स्वाद में हल्की मीठी और खट्टी होती है, लेकिन इसके फायदे बेहद बड़े हैं. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और फाइबर पाए जाते हैं. नियमित रूप से ब्लूबेरी खाने से दिल की सेहत बेहतर रहती है, याददाश्त मजबूत होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. यही कारण है कि डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी इसे डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं. भारत में अभी इसकी आपूर्ति सीमित है और ज्यादातर ब्लूबेरी विदेशों से आयात होती है, जिससे इसकी कीमत ऊंची बनी रहती है. किसानों के लिए यह एक बड़ा मौका है.
भारत में कहां और कैसे सफल होती है ब्लूबेरी की खेती
ब्लूबेरी की खेती के लिए ठंडी और पहाड़ी जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में इसकी खेती के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं. हालांकि, आधुनिक तकनीक और सही देखभाल के साथ इसे अन्य क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है.
इस पौधे को अम्लीय मिट्टी पसंद होती है, जिसका पीएच स्तर करीब 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए. अगर खेत की मिट्टी सामान्य है, तो उसमें जैविक खाद, सूखी पत्तियां और विशेष प्रकार का ऑर्गेनिक मिक्स मिलाकर उसे तैयार किया जा सकता है. सही मिट्टी तैयार करना ब्लूबेरी की सफल खेती की सबसे अहम कड़ी है.
पौध रोपण और देखभाल का सही तरीका
ब्लूबेरी के पौधे बहुत गहरी जड़ नहीं बनाते, इसलिए इन्हें 4 से 5 फीट की दूरी पर लगाया जाता है. पौधों को लगातार नमी की जरूरत होती है, लेकिन पानी जमा होना नुकसानदायक हो सकता है. इसी वजह से ड्रिप सिंचाई को सबसे बेहतर माना जाता है. इससे पानी भी बर्बाद नहीं होता और पौधे को सही मात्रा में नमी मिलती रहती है.
पौधे लगाने के बाद शुरुआती दो से तीन साल तक धैर्य रखना पड़ता है, क्योंकि इस दौरान फल कम आते हैं. तीसरे या चौथे साल से उत्पादन बढ़ने लगता है और पांचवें साल तक पौधा पूरी क्षमता से फल देने लगता है. खास बात यह है कि एक बार स्थापित हो जाने के बाद ब्लूबेरी का पौधा 20 से 25 साल तक फल देता है. समय-समय पर छंटाई और मिट्टी पर मल्चिंग करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं.
एक बीघा खेती से कितनी हो सकती है कमाई
ब्लूबेरी की खेती में शुरुआती लागत जरूर थोड़ी ज्यादा होती है, क्योंकि पौधे महंगे होते हैं और मिट्टी की तैयारी में खर्च आता है. लेकिन यही खेती आगे चलकर किसानों को मालामाल कर सकती है. एक बीघा जमीन में कुछ साल बाद ब्लूबेरी से लाखों रुपये तक की सालाना कमाई संभव है.
ब्लूबेरी को सिर्फ ताजा फल के रूप में ही नहीं, बल्कि जैम, जूस, ड्राय फ्रूट और बेकरी उत्पादों के लिए भी बेचा जा सकता है. होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में इसकी कीमत सामान्य फलों की तुलना में कहीं ज्यादा मिलती है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.
आधुनिक खेती में ब्लूबेरी का भविष्य
आज का उपभोक्ता सेहत को प्राथमिकता दे रहा है. ऑर्गेनिक और न्यूट्रिशन से भरपूर फलों की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ब्लूबेरी की खेती आने वाले समय में किसानों के लिए एक मजबूत और स्थायी आय का जरिया बन सकती है. सही जानकारी, धैर्य और आधुनिक तकनीक के साथ अगर किसान ब्लूबेरी की खेती शुरू करते हैं, तो यह न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि खेती को एक नई दिशा भी देगी.