IFFCO nano NPK fertilisers: देश में खेती को आधुनिक और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार ने IFFCO (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव) के नैनो NPK खाद को मंजूरी दे दी है. इसे अब फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO) के तहत शामिल कर लिया गया है, जिससे इसका इस्तेमाल पूरे देश में व्यावसायिक रूप से किया जा सकेगा.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण गैस की कमी हो रही है और पारंपरिक उर्वरकों (जैसे यूरिया और DAP) की सप्लाई पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में नैनो खाद किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहा है.
क्या हैं नैनो NPK उर्वरक?
नैनो NPK उर्वरक एक आधुनिक तकनीक से बनाए गए खाद हैं, जिनमें नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) को बहुत छोटे कणों में तैयार किया जाता है. इससे पौधों को पोषण अधिक तेजी और प्रभावी तरीके से मिलता है.
केंद्र सरकार ने जिन दो उत्पादों को मंजूरी दी है, वे हैं:
- Nano NPK Liquid (8-8-20-10-10-10) – यह पत्तियों पर छिड़काव के लिए उपयोगी है
- Nano NPK Solid (20-10-10) – यह मिट्टी और जड़ों के जरिए पौधों को पोषण देता है
इन दोनों को खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हो गई है, जिसका सीधा असर भारत में पारंपरिक उर्वरकों के उत्पादन और उपलब्धता पर पड़ा है. दरअसल, यूरिया और DAP जैसे खाद बनाने में गैस की अहम भूमिका होती है, इसलिए गैस की कमी से इनकी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है. ऐसे हालात में सरकार चाहती है कि किसान धीरे-धीरे नैनो उर्वरकों की ओर रुख करें, ताकि पारंपरिक खाद पर निर्भरता कम हो, उर्वरकों की सप्लाई पर दबाव घटे और खेती की लागत भी कम हो सके.
पहले भी आ चुके हैं नैनो उर्वरक
कुछ साल पहले सरकार ने नैनो यूरिया और नैनो DAP भी लॉन्च किए थे. देश में फिलहाल नैनो उत्पादों की उत्पादन क्षमता करीब 29 करोड़ बोतल है, लेकिन इनकी वास्तविक बिक्री अब तक 4 करोड़ बोतल से कम ही रही है. अब नैनो NPK को मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि किसानों के बीच इन उत्पादों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा.
किसानों को कैसे होगा फायदा?
IFFCO के अनुसार, नैनो उर्वरकों का इस्तेमाल किसानों के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. इनकी खास बात यह है कि कम मात्रा में भी ज्यादा असर मिलता है, जिससे खेती की लागत घटती है. इसके उपयोग से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं, वहीं पारंपरिक रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम हो जाती है.
इसके अलावा, नैनो उर्वरक मिट्टी की सेहत पर कम नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह तकनीक काफी लाभकारी साबित हो सकती है.
पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प
नैनो उर्वरकों का एक बड़ा फायदा यह है कि ये पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं. पारंपरिक खाद के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी और पानी दोनों प्रभावित होते हैं, लेकिन नैनो तकनीक इस नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है.
IFFCO का क्या कहना है?
IFFCO ने अपने बयान में कहा है कि यह नई तकनीक किसानों को आधुनिक, प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल खेती की दिशा में आगे बढ़ाएगी. इसके जरिए न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाली फसल भी मिलेगी.